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अर्थव्यवस्था को बचाने फेडरल रिजर्व का मास्टरस्ट्रोक! तीसरी बार घटाईं दरें, क्या भारतीय शेयर बाजार में आएगा भूचाल?

 Edited By: Shivendra Singh
 Published : Dec 11, 2025 07:52 am IST,  Updated : Dec 11, 2025 07:52 am IST

अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व ने ब्याज दर में कटौती तो की, लेकिन साथ ही साफ संकेत दे दिया कि आगे दरें घटाना आसान नहीं होगा। यह फैसला निवेशकों और बाजारों के लिए मिला-जुला संदेश लेकर आया है।

फेडरल रिजर्व ने फिर...- India TV Hindi
फेडरल रिजर्व ने फिर घटाई दरें Image Source : ANI

अमेरिकी अर्थव्यवस्था इन दिनों ऐसे मोड़ पर खड़ी है, जहां एक गलत कदम भी बाजारों में बड़ा भूचाल ला सकता है। ऐसे में फेडरल रिजर्व ने तीसरी बार ब्याज दरों में कटौती कर दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। लेकिन दिलचस्प यह है कि राहत के इस कदम के साथ ही फेड ने साफ संकेत दे दिया कि आगे दरों में बड़ी कटौतियों की गुंजाइश बेहद कम है। यानी राहत भी और सतर्कता भी, फेड की नीति ने निवेशकों को उलझन में डाल दिया है।

फेडरल रिजर्व ने क्या कहा?

फेड की नीति निर्धारण समिति (FOMC) ने ओवरनाइट लेंडिंग रेट में 0.25 प्रतिशत अंक की कटौती की, जिससे नई दरें 3.5-3.75% के दायरे में पहुंच गईं। यह फैसला बाजारों की उम्मीदों के मुताबिक था, लेकिन फेड का टोन ‘हॉकिश’ रहा यानी कटौती तो की, लेकिन भविष्य में राहत के कम संकेत। सबसे अहम पहलू यह रहा कि छह साल बाद पहली बार इतनी बड़ी असहमति देखी गई। 9-3 के अंतर से यह प्रस्ताव पास हुआ। जहां एक सदस्य 0.50% यानी ज्यादा कटौती चाहते थे, वहीं दो सदस्यों ने किसी भी तरह की कटौती का विरोध किया। इससे साफ है कि फेड के भीतर भी अर्थव्यवस्था की दिशा को लेकर बड़ा मतभेद है।

महंगाई पर फेड की कड़ी नजर

FOMC ने साफ कहा कि आगे के फैसले आर्थिक आंकड़ों पर निर्भर होंगे। हालांकि GDP अनुमान को 2.3% तक बढ़ा दिया गया है, लेकिन महंगाई अब भी 2% के लक्ष्य से काफी ऊपर है। फेड का मानना है कि मुद्रास्फीति 2028 तक भी अपने लक्ष्य के करीब नहीं आएगी। सितंबर में महंगाई दर 2.8% रही, जो कम जरूर है, लेकिन अभी भी चिंताजनक बनी हुई है।

फेड फिर खरीद रहा है ट्रेजरी बॉन्ड

ब्याज दर कटौती के साथ फेड ने बैलेंस शीट पर भी बड़ा कदम उठाया है। शुक्रवार से 40 बिलियन डॉलर के ट्रेजरी बिल्स खरीदने का निर्णय लिया गया है। यह कदम फंडिंग मार्केट में दबाव को रोकने की कोशिश का हिस्सा है और शॉर्ट-टर्म में लिक्विडिटी बढ़ा सकता है।

रिपोर्ट्स ने बढ़ाया राजनीतिक तापमान

यह सब तब हो रहा है जब चेयर जेरोम पॉवेल के कार्यकाल की केवल तीन बैठकें बची हैं। राष्ट्रपति ट्रंप पहले ही संकेत दे चुके हैं कि वे कम दरों के समर्थक चेयर को नियुक्त करेंगे। बाजारों के मुताबिक केविन हैसेट की दावेदारी सबसे मजबूत मानी जा रही है।

भारतीय बाजारों पर असर?

फेड का सख्त रुख भारतीय बाजारों के लिए भी अहम है। FII फ्लो, रुपये की चाल और RBI की भविष्य की नीति पर इसका सीधा असर है। भारत की घरेलू ग्रोथ मजबूत है, लेकिन ग्लोबल टाइटनिंग का दबाव अस्थिरता बढ़ा सकता है।

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