होटल, 'इवेंट ऑर्गेनाइजर' जैसी संस्थाओं द्वारा ग्राहकों के आधार की फोटोकॉपी लेकर उसे कागजी रूप में रखने की प्रथा को रोकने के लिए जल्द ही नया नियम जारी किया जाएगा। एक सीनियर सरकारी अधिकारी ने रविवार को ये जानकारी दी। ये प्रथा वर्तमान आधार अधिनियम का उल्लंघन है। भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) के सीईओ भुवनेश कुमार ने पीटीआई को बताया कि प्राधिकरण ने एक नया नियम मंजूर किया है, जिसके तहत होटल, इवेंट ऑर्गेनाइजर आदि संस्थाओं को आधार-बेस्ड वैरिफिकेशन के लिए रजिस्ट्रेशन कराना अनिवार्य होगा। उन्होंने बताया कि रजिस्टर्ड संस्थाओं को नई टेक्नोलॉजी उपलब्ध कराई जाएगी, जिससे वे क्यूआर कोड स्कैन करके या आधार के नए ऐप के माध्यम से वैरिफिकेशन कर सकेंगे।
बहुत जल्द नोटिफाई किया जाएगा नया नियम
भुवनेश कुमार ने कहा, "इस नियम को बहुत जल्द नोटिफाई किया जाएगा। इसका उद्देश्य आधार की फोटोकॉपी लेकर ऑफलाइन वैरिफिकेशन को पूरी तरह रोकना है।" ऑफलाइन वैरिफिकेशन करने वाली संस्थाओं को एपीआई (एप्लिकेशन प्रोग्रामिंग इंटरफेस) उपलब्ध कराया जाएगा, जिसके जरिए वे अपने सिस्टम को आधार वैरिफिकेशन के लिए अपडेट कर सकेंगी। यूआईडीएआई एक नए ऐप की बीटा-टेस्टिंग कर रहा है, जो प्रत्येक आधार वैरिफिकेशन के लिए सेंट्रल डेटाबेस से जुड़े बिना सीधे ऐप से ऐप तक पहचान की जांच करने की सुविधा देगा। बीटा-टेस्टिंग एक ऐसी टेस्टिंग होती है, जिसमें किसी नये सॉफ्टवेयर, ऐप या टेक्नोलॉजी का सामान्य यूजर्स के लिए पूरी तरह से पेश करने से पहले सीमित लोगों के बीच इस्तेमाल किया जाता है। इसका उद्देश्य ये देखना होता है कि ऐप या सॉफ्टवेयर वास्तविक परिस्थितियों में सही काम कर रहा है या नहीं और इसमें कोई समस्या तो नहीं है।
एयरपोर्ट पर भी इस्तेमाल किया जा सकेगा नया आधार ऐप
आधार के नये ऐप का इस्तेमाल एयरपोर्ट, उम्र-प्रतिबंधित उत्पाद बेचने वाली दुकानों आदि जगहों पर भी किया जा सकेगा। भुवनेश कुमार ने कहा, "वैरिफिकेशन में ये सुगमता ऑफलाइन वैरिफिकेशन को पेपरलेस बनाएगी, साथ ही यूजर्स की प्राइवेसी पूरी तरह सुरक्षित रहेगी और आधार की जानकारी के लीक होकर दुरुपयोग होने का कोई जोखिम नहीं रहेगा।" नया ऐप आधार सर्टिफिकेशन सर्विस को डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन एक्ट के पूरी तरह अनुरूप बनाएगा, जो अगले 18 महीनों में पूर्ण रूप से लागू हो जाएगा।



































