अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एक बार फिर अपने चौंकाने वाले फैसले को लेकर सुर्खियों में हैं। ग्रीनलैंड को लेकर यूरोपीय देशों पर टैरिफ लगाने की धमकी देने वाले ट्रंप ने अचानक अपना रुख बदलते हुए आठ यूरोपीय देशों पर प्रस्तावित आयात शुल्क रद्द कर दिए हैं। यह फैसला ऐसे समय आया है, जब कुछ ही दिन पहले ट्रंप खुले मंच से ग्रीनलैंड को अमेरिका के राइट, टाइटल और ओनरशिप में लेने की बात कह चुके थे। उनके इस यू-टर्न ने वैश्विक राजनीति में नई बहस छेड़ दी है कि क्या इसके पीछे NATO के साथ कोई गोपनीय समझौता हुआ है?
ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में दावा किया कि NATO प्रमुख के साथ आर्कटिक सुरक्षा को लेकर भविष्य के एक “फ्रेमवर्क” पर सहमति बनी है। इस कथित समझौते को ट्रंप ने फॉरएवर डील बताया और कहा कि इससे अमेरिका की सुरक्षा पहले से भी मजबूत होगी। हालांकि, इस डील के ब्योरे सार्वजनिक नहीं किए गए हैं, लेकिन संकेत दिए गए हैं कि इसमें ग्रीनलैंड और आर्कटिक क्षेत्र से जुड़ी रणनीतिक चिंताएं शामिल हैं।
आर्कटिक की रणनीति
रिपोर्ट्स के मुताबिक, ट्रंप ग्रीनलैंड को अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से अहम मानते हैं। उनका तर्क है कि आर्कटिक क्षेत्र में रूस और चीन की बढ़ती गतिविधियों को देखते हुए ग्रीनलैंड अमेरिका के लिए रणनीतिक रूप से जरूरी है। गौरतलब है कि अमेरिका की वहां पहले से एक सैन्य मौजूदगी है, फिर भी ट्रंप ने डेनमार्क और उसके सहयोगी देशों पर दबाव बनाने के लिए टैरिफ का हथियार उठाया था। प्रस्तावित योजना के तहत अगले महीने से 10 फीसदी और जून तक 25 फीसदी तक टैरिफ बढ़ाने की तैयारी थी।
NATO में खलबली
हालांकि, NATO में इस बयानबाजी से खलबली मच गई थी। यूरोपीय देशों ने साफ कहा कि ग्रीनलैंड बिक्री के लिए नहीं है और डेनमार्क की संप्रभुता से कोई समझौता नहीं होगा। ट्रंप के बयानों से गठबंधन टूटने का खतरा तक पैदा हो गया था। इसी बीच NATO महासचिव मार्क रूटे ने सार्वजनिक रूप से कहा कि अगर अमेरिका पर हमला होता है, तो गठबंधन उसके साथ खड़ा रहेगा। इसके कुछ ही देर बाद ट्रंप ने टैरिफ रद्द करने की घोषणा कर दी।
ग्रीनलैंड की तैयारी
इस पूरे घटनाक्रम के बीच ग्रीनलैंड सरकार ने अपने नागरिकों को सतर्क रहने की सलाह दी है। वहां की सरकार ने संकट की स्थिति से निपटने के लिए एक गाइड जारी की है, जिसमें लोगों को कम से कम पांच दिन के लिए जरूरी सामान जमा रखने को कहा गया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि ट्रंप के बयानों को वे धमकी के तौर पर देखते हैं, लेकिन सावधानी बरतना जरूरी है।






































