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कोटक महिंद्रा बैंक में प्रवर्तक की हिस्‍सेदारी घटकर होगी 26 प्रतिशत, RBI ने दी अपनी मंजूरी

 Edited By: India TV Paisa Desk
 Published : Feb 19, 2020 04:15 pm IST,  Updated : Feb 19, 2020 04:15 pm IST

कोटक महिंद्रा समूह की वित्तीय इकाई कोटक महिंद्रा फाइनेंस को 2003 में आरबीआई से बैंक लाइसेंस मिला। वह बैंक में तब्दील होने वाली पहली एनबीएफसी (गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी) बनी।

Kotak Mahindra Bank gets RBI nod for trimming promoters' stake- India TV Hindi
Kotak Mahindra Bank gets RBI nod for trimming promoters' stake

नई दिल्‍ली। निजी क्षेत्र के कोटक महिंद्रा बैंक ने बुधवार को कहा कि रिजर्व बैंक ने बैंक में प्रवर्तक की हिस्सेदारी कम कर 26 प्रतिशत को अपनी अंतिम मंजूरी दे दी है। इससे पहले, बैंक ने 30 जनवरी को कहा था कि आरबीआई ने नियामक की अंतिम मंजूरी की तारीख से छह महीने के भीतर प्रवर्तक की हिस्सेदारी घटाकर चुकता शेयर पूंजी का 26 प्रतिशत करने को सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है। आरबीआई ने बैंक से प्रवर्तकों की हिस्सेदारी कम कर 31 मार्च 2018 तक चुकता शेयर पूंजी का 20 प्रतिशत और 31 मार्च 2020 तक 15 प्रतिशत करने को कहा था।

कोटक महिंद्रा बैंक ने शेयर बाजार को दी सूचना में कहा कि रिजर्व बैंक ने 18 फरवरी 2020 को पत्र के जरिये प्रवर्तक की बैंक में हिस्सेदारी कम करने को मंजूरी दे दी है। बैंक ने यह भी कहा कि वह प्रवर्तक की हिस्सेदारी कम करने के संदर्भ में आरबीआई के खिलाफ बंबई उच्च न्यायालय में दायर मामले को वापस ले रहा है। बैंक में फिलहाल प्रवर्तक और प्रवर्तक समूह की हिस्सेदारी 29.96 प्रतिशत है।

कोटक महिंद्रा बैंक के प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्यपालक अधिकारी उदय कोटक प्रवर्तक भी हैं। उल्लेखनीय है कि अगस्त 2018 में बैंक ने प्रवर्तक की हिस्सेदारी कम कर 19.70 प्रतिशत करने के लिए तरजीही शेयर जारी करने का प्रस्ताव किया था, जिसे आरबीआई ने खारिज कर दिया। उसके बाद बैंक ने आरबीआई के फैसले को बंबई उच्च न्यायालय में चुनौती दी।

आरबीआई के बैंक लाइसेंस नियम के अनुसार निजी बैंक के प्रवर्तक को तीन साल में अपनी हिस्सेदारी 40 प्रतिशत, 10 साल में 20 प्रतिशत और 15 साल में 15 प्रतिशत करने की जरूरत है। कोटक महिंद्रा समूह की वित्तीय इकाई कोटक महिंद्रा फाइनेंस को 2003 में आरबीआई से बैंक लाइसेंस मिला। वह बैंक में तब्दील होने वाली पहली एनबीएफसी (गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी) बनी। 

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