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मोदी सरकार खास योजना पर कर रही काम, 11.5 करोड़ किसान परिवार से होगा सीधा संपर्क

Reported by: IANS Published : Nov 01, 2019 09:23 am IST, Updated : Nov 01, 2019 09:23 am IST

मोदी सरकार इस समय जिस योजना पर पूरे जोर-शोर से काम कर रही है उससे अगले कुछ महीनों में देश के 11.5 करोड़ किसान परिवारों से सीधा संपर्क किया जा सकेगा।

Modi government plans a massive data bank to directly connect with 11.5 crore farmers- India TV Paisa

Modi government plans a massive data bank to directly connect with 11.5 crore farmers

नई दिल्ली। मोदी सरकार इस समय जिस योजना पर पूरे जोर-शोर से काम कर रही है उससे अगले कुछ महीनों में देश के 11.5 करोड़ किसान परिवारों से सीधा संपर्क किया जा सकेगा। संवाद की यह कवायद अभूतपूर्व है जिसे अमलीजामा पहनाने की दिशा में कोशिशें जारी हैं। अगर, सब कुछ योजना के अनुसार चला तो जून 2020 तक सरकार के पास देश के किसानों का एक बड़ा डाटा बैंक होगा।

केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय में सचिव संजय अग्रवाल की अगुवाई में एक उच्च स्तरीय समिति सूचना एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय और उसके नेशनल ई-गवर्नेंस डिवीजन यानी एनईजीडी के साथ मिलकर इस पर काम कर रही है और प्रधानमंत्री कार्यालय द्वारा तय समयसीमा के तहत डाटा संकलन की इस बड़ी परियोजना को पूरा करने की कोशिश जारी है।

इस डाटाबेस की मदद और प्रौद्योगिकी के प्रयोग से देश के छोटे व सीमांत किसानों के जीवन में एक बड़ा बदलाव आनेवाला हैं। डाटा से किसानों का सशक्तीकरण होगा क्योंकि इससे अब मिट्टी की जांच हो या बाढ़ की चेतावनी, सेटेलाइट से प्राप्त तस्वीर से लेकर जमीन का राजस्व रिकॉर्ड जैसी तमाम सूचनाएं किसानों को घर बैठे ही मिल जाएंगी।

केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने आईएएनएस को बताया, 'अगले छह महीने में एक बार डाटाबेस बन जाने के बाद किसान बाजार की तमाम सूचनाएं ले सकेंगे। वास्तव में ग्रामीण क्षेत्र में यह एक गेम चेंजर साबित होने जा रहा है।' उन्होंने बताया, 'कार्य कृषि सचिव के अलावा आधार कार्ड योजना को अमलीजामा पहनाने वाले पूर्व सूचना प्रौद्योगिकी सचिव जे. सत्यनारायण और कई आईटी विशेषज्ञों की देखरेख में यह काम चल रहा है।'

दरअसल, इस व्यापक डाटा संकलन की प्रेरणा प्रधानमंत्री मोदी की अति महत्वपूर्ण योजना पीएम-किसान सम्मान निधि मिली है अब तक देश के 7.20 करोड़ किसानों को पीएम-किसान योजना का लाभ मिलने लगा है। सिर्फ उत्तर प्रदेश से इस डाटा बैंक में 2.10 करोड़ किसान शामिल हो गए हैं। मालूम हो कि पीएम-किसान सम्मान निधि में एक किसान परिवार को सालाना 6,000 रुपये सीधा हस्तांतरण किया जा रहा है। तीन किस्तों में दी जा रही इस राशि का मकसद किसानों को खेती करने के लिए जरूरी पूंजी में मदद करना है।

सूत्रों ने बताया कि किसानों के इस डाटा का मिलान पब्लिक फंड मैनेजमेंट सिस्टम यानी पीएफएमएस द्वारा किया जाता है, जो यह सुनिश्चित करता है कि पैसा सही जगह पहुंचा है और किसानों के ही खाते में गया। सरकार ने अब तक देश के गरीब किसानों को पीएम-किसान सम्मान निधि के तहत 33,000 करोड़ रुपये का भुगतान किया है। यह योजना पिछले साल दिसंबर महीने से लागू है।

पीएम किसान योजना को आरंभ में दिल्ली और पश्चिम बंगाल की सरकारों ने स्वीकार नहीं किया। हालांकि बाद में दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने अपना विचार बदला और उन्होंने पीएम किसान के तहत किसानों को लाभ दिलाने के लिए मोदी की योजना को स्वीकार कर लिया।

हालांकि पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने अभी भी इस योजना को स्वीकार नहीं किया है। पीएम-किसान योजना की मुखर आलोचक रहीं ममता बनर्जी को शायद लगता है कि यह केंद्र सरकार इसके बहाने किसानों का वोट लेने की कोशिश कर रही है। उधर, भारतीय जनता पार्टी का मानना है कि ममता बनर्जी संकीर्ण राजनीतिक मानसिकता के कारण किसानों को उनके हक से वंचित कर रही हैं। आंकड़ों के अनुसार, पश्चिम बंगाल के करीब 70 लाख किसान केंद्र सरकार की इस योजना का लाभ लेने से वंचित हैं।

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