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WPI: थोक महंगाई लगातार चौथे महीने बढ़ी, फरवरी में 2.13% पर पहुंची, जानें किसके बढ़े दाम

 Published : Mar 16, 2026 01:54 pm IST,  Updated : Mar 16, 2026 01:54 pm IST

फरवरी में खाद्य वस्तुओं की महंगाई में उछाल देखने को मिला। खुदरा महंगाई दर भी फरवरी में बढ़कर 3.2% हो गई। महंगाई दर के आधार पर ही रिजर्व बैंक ब्याज दरें तय करता है।

रिटेल स्टोर में खरीदारी करते लोग।- India TV Hindi
रिटेल स्टोर में खरीदारी करते लोग। Image Source : INDIA TV

देश में थोक महंगाई दर में लगातार चौथे महीने बढ़ोतरी दर्ज की गई है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, फरवरी 2026 में थोक मूल्य सूचकांक (WPI) आधारित महंगाई दर बढ़कर 2.13% हो गई। यह बढ़ोतरी मुख्य रूप से खाद्य और गैर-खाद्य वस्तुओं की कीमतों में इजाफे के कारण हुई, हालांकि सब्जियों की कीमतों में महीने-दर-महीने कुछ नरमी देखने को मिली है। जनवरी में थोक महंगाई दर 1.81% थी, जबकि फरवरी 2025 में यह 2.45% दर्ज की गई थी।

खाद्य वस्तुओं की महंगाई दर बढ़ी

खबर के मुताबिक, थोक मूल्य सूचकांक आंकड़ों के अनुसार, फरवरी में खाद्य वस्तुओं की महंगाई दर 2.19% रही, जो जनवरी में 1.55% थी। हालांकि सब्जियों की महंगाई दर 4.73% पर आ गई, जो जनवरी में 6.78% थी। इसके विपरीत दाल, आलू, अंडा, मांस और मछली की महंगाई दर फरवरी के दौरान दर्ज की गई।  वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय ने अपने बयान में कहा कि फरवरी 2026 में महंगाई की पॉजिटिव दर का मुख्य कारण अन्य विनिर्माण उत्पाद, बेसिक धातु, गैर-खाद्य वस्तुएं, खाद्य वस्तुएं और टेक्सटाइल की कीमतों में बढ़ोतरी है। 

मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में भी तेजी से

विनिर्मित उत्पादों में महंगाई दर फरवरी में बढ़कर 2.92% हो गई, जबकि जनवरी में यह 2.86% थी। वहीं गैर-खाद्य वस्तुओं की श्रेणी में महंगाई दर तेजी से बढ़ने के साथ 8.80% पर पहुंच गई, जो जनवरी में 7.58% थी। 

ईंधन और बिजली में जारी रहा डिफ्लेशन

ईंधन और बिजली की श्रेणी में नेगेटिव महंगाई (डिफ्लेशन) बनी रही। फरवरी में यह -3.78% रही, जबकि जनवरी में यह -4.01% थी।

खुदरा महंगाई भी बढ़ी है

पिछले हफ्ते जारी आंकड़ों के अनुसार, उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) आधारित खुदरा महंगाई फरवरी में बढ़कर 3.2% हो गई, जो जनवरी में 2.75% थी। महंगाई के लगातार नियंत्रित रहने के चलते भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने चालू वित्त वर्ष में अपनी नीतिगत ब्याज दरों में 1.25 प्रतिशत अंक की कटौती की है। RBI महंगाई नीति तय करते समय मुख्य रूप से महंगाई दर को आधार मानता है।

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