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अक्टूबर में थोक मुद्रास्फीति 27 महीने के निचले स्तर (-) 1.21% पर, जानें किसके दम पर मिली राहत

 Edited By: Sourabha Suman
 Published : Nov 14, 2025 04:08 pm IST,  Updated : Nov 14, 2025 04:31 pm IST

जीएसटी कटौती और अनुकूल आधार के चलते अक्टूबर में थोक मुद्रास्फीति में गिरावट देखने को मिली है।

सब्जी मंडी में खरीदारी करते लोग।- India TV Hindi
सब्जी मंडी में खरीदारी करते लोग। Image Source : INDIA TV

अक्टूबर 2025 में थोक मूल्य सूचकांक (डब्ल्यूपीआई) आधारित महंगाई दर घटकर (-)1.21 प्रतिशत के 27-महीने के निचले स्तर पर आ गई। इसका मुख्य कारण दालों, सब्जियों जैसी खाद्य वस्तुओं में तेज गिरावट, और ईंधन तथा विनिर्मित उत्पादों के दाम कम होना रहा। सरकार द्वारा शुक्रवार को जारी आंकड़ों में यह जानकारी दी गई। पीटीआई की खबर के मुताबिक, सितंबर में डब्ल्यूपीआई महंगाई दर 0.13 प्रतिशत थी, जबकि अक्टूबर 2024 में यह 2.75 प्रतिशत पर थी।

क्यों मिली महंगाई में बड़ी राहत

उद्योग मंत्रालय ने कहा कि अक्टूबर 2025 में नकारात्मक मुद्रास्फीति मुख्य रूप से खाद्य पदार्थों, कच्चे पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस, बिजली, मिनरल ऑयल्स और बेसिक मेटल्स के दामों में कमी के कारण दर्ज की गई है। डब्ल्यूपीआई आंकड़ों के अनुसार, अक्टूबर में खाद्य वस्तुओं में 8.31% की तेज गिरावट दर्ज की गई, जो सितंबर के 5.22% से अधिक है।

सबसे बड़ी गिरावट इन वस्तुओं में देखी गई

  • सब्जियां: –34.97% 
  • दालें: –16.50%
  • आलू: –39.88%
  • प्याज: –65.43%

विनिर्मित उत्पाद और ईंधन में भी नरमी

विनिर्मित उत्पादों में महंगाई घटकर अक्तूबर में 1.54% रही। ईंधन और बिजली में –2.55% की गिरावट रही। यह लगातार सातवें महीने कमजोरी का संकेत है। इंडिया रेटिंग्स एंड रिसर्च के एसोसिएट डायरेक्टर पारस जसराी ने कहा कि वित्तीय वर्ष 2026 के बाकी महीनों में अनुकूल बेस इफेक्ट के चलते डब्ल्यूपीआई में और गिरावट बनी रह सकती है। नवंबर 2025 में थोक महंगाई 1% से नीचे रहने की उम्मीद है।

GST कटौती का बड़ा असर

22 सितंबर से लागू GST दरों में कटौती के बाद कई दैनिक उपयोग की वस्तुएं सस्ती हुईं। चार-स्तरीय जीएसटी स्लैब को घटाकर सिर्फ दो स्लैब (5% और 18%) कर देने से वस्तुओं के दाम कम हुए और थोक और खुदरा महंगाई में गिरावट आई।

खुदरा महंगाई भी ऐतिहासिक न्यूनतम स्तर पर

पिछले सप्ताह जारी आंकड़ों में अक्टूबर में खुदरा महंगाई (सीपीआई) 0.25% के अब तक के सबसे निचले स्तर पर रही। सितंबर में खुदरा महंगाई दर 1.44% थी। आरबीआई, जो खुदरा महंगाई को नीति निर्धारण में आधार मानता है, ने पिछले महीने रेपो रेट 5.5% पर स्थिर रखा था। थोक महंगाई और खुदरा महंगाई दोनों में तेजी से गिरावट से दिसंबर 3–5 को होने वाली आरबीआई की मौद्रिक नीति बैठक में ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद बढ़ गई है।

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