भारत में थोक मूल्य सूचकांक (डब्ल्यूपीआई) आधारित मुद्रास्फीति नवंबर 2025 में लगातार नकारात्मक बनी रही और माइनस 0.32 प्रतिशत दर्ज की गई। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, यह नरमी मुख्य रूप से खाद्य पदार्थों, खनिज तेलों और विनिर्मित उत्पादों की कीमतों में गिरावट के कारण आई है, जबकि अक्टूबर में यह दर माइनस 1.21 प्रतिशत थी। उद्योग मंत्रालय के बयान के अनुसार, WPI में यह गिरावट खाद्य पदार्थों (नवंबर में 4.16% अपस्फीति) और ईंधन व बिजली (नवंबर में 2.27% अपस्फीति) में आई बड़ी नरमी से प्रेरित है।
सब्जियों में 20.23% की अपस्फीति दर्ज की गई, जिसमें आलू और प्याज की कीमतों में क्रमशः 36.14% और 64.70% की तेज गिरावट शामिल है। विनिर्मित उत्पादों में भी महंगाई घटकर 1.33% रह गई।
खुदरा महंगाई और RBI की नीति
डब्ल्यूपीआई में राहत के बावजूद, खुदरा मुद्रास्फीति (सीपीआई) नवंबर में मामूली बढ़कर 0.71 प्रतिशत हो गई (अक्टूबर में 0.25%)। आरबीआई, जो ब्याज दरों का फैसला सीपीआई के आधार पर करता है, ने इस महीने की शुरुआत में मुख्य नीतिगत ब्याज दर में 25 आधार अंकों की कटौती कर इसे 5.25 प्रतिशत कर दिया।
आरबीआई का दृष्टिकोण
चालू वित्त वर्ष में RBI अब तक कुल 1.25 प्रतिशत की ब्याज दर कटौती कर चुका है। केंद्रीय बैंक ने कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था इस समय एक “दुर्लभ गोल्डीलॉक्स दौर” से गुजर रही है, जहां तेज आर्थिक वृद्धि और कम महंगाई एक साथ देखी जा रही है। RBI ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए GDP वृद्धि अनुमान को 6.8% से बढ़ाकर 7.3 प्रतिशत कर दिया है, जो पिछली दो तिमाहियों (जून में 7.8% और सितंबर में 8.2%) की मजबूत वृद्धि को दर्शाता है।
इस महीने की शुरुआत में RBI ने चालू वित्त वर्ष के लिए महंगाई अनुमान घटाकर 2 प्रतिशत कर दिया, जो पहले 2.6 प्रतिशत था। केंद्रीय बैंक के मुताबिक, अर्थव्यवस्था में तेजी से डिसइन्फ्लेशन देखने को मिल रहा है। आरबीआई पर महंगाई को नियंत्रण में रखने की जिम्मेदारी है।






































