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SBI के ग्राहकों को बैंक का झटका, जानिए क्या हुआ बदलाव

एक साल से 2 साल से कम की अवधि की एफडी पर ब्याज दरों में कटौती की है। ये कटौती 0.2 फीसदी की है। बाकी सभी मैच्योरिटी पीरियड के लिए दरों में बदलाव नही किया गया है।

Edited by: India TV Paisa Desk
Published : Sep 13, 2020 07:59 pm IST, Updated : Sep 13, 2020 07:59 pm IST
एसबीआई की FD दरों में...- India TV Paisa
Photo:GOOGLE

एसबीआई की FD दरों में कटौती

नई दिल्ली। स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के ग्राहकों को बैक से झटका मिला है। बैंक ने फिक्स्ड डिपॉजिट की दरों में कटौती कर दी है। ये कटौती 10 सितंबर से लागू हो गई है। इससे पहले बैंक ने 27 मई को दरों में बदलाव किया है। जानिए क्या हैं नई दरें।

 

कितनी हुई है कटौती   

स्टेट बैंक ने 2 करोड़ रुपये से कम की एक साल से 2 साल से कम की अवधि की एफडी पर ब्याज दरों में कटौती की है। ये कटौती 0.2 फीसदी की है। बाकी सभी मैच्योरिटी पीरियड के लिए दरों में बदलाव नही किया गया है। अब 1 साल से अधिक और 2 साल से कम की FD पर इस बैंक में 4.90 फीसदी का ब्याज मिलेगा. जबकि इससे पहले बैंक 5.10 फीसदी ब्याज दे रहा था.

जानिए क्या हैं अन्य अवधि की FD पर ब्याज दरें

7 दिन से लेकर 45 दिन की मैच्योरिटी वाली फिक्स्ड डिपॉजिट पर ब्याज दर 2.9 फीसदी, 46 दिन से 179 दिन की एफडी पर ब्याज दर 3.9 फीसदी, 180 दिन से लेकर एक साल से कम की एफडी पर ब्याज दर 4.4 फीसदी है।

2 से 3 साल तक के लिए एफडी पर ब्याज दर 5.1 फीसदी, तीन साल से लेकर पांच साल तक के लिए एफडी पर ब्याज दर 5.3 फीसदी और पांच साल से लेकर 10 साल तक की अवधि पर ब्याज दर 5.4 फीसदी मिलेगी. 

सीनियर सिटीजन के लिए ऑफर

सीनियर सिटीजन को 5 साल से कम अवधि के लिए फिक्स्ड डिपॉजिट पर 0.50% अतिरिक्त ब्याज मिलेगा. जबकि 5 साल से ज्यादा के रिटेल टर्म डिपॉजिट पर 0.80% ब्याज मिलेगा, इसमें अतिरिक्त 0.30% भी शामिल है. हालांकि, मैच्योरिटी से पहले निकासी पर अतिरिक्त ब्याज का लाभ नहीं मिलेगा. 5 साल की FD पर इसके तहत 6.20 फीसदी ब्याज मिलेगा।

गौरतलब है कि महामारी की वजह से कर्ज बांटने की रफ्तार पर असर पड़ा है, वहीं बैंक इस रफ्तार को वापस पाने और आर्थिक ग्रोथ तेज करने के लिए कई कदम उठा रहे हैं। दूसरी तरफ लोगों का बचत पर जोर बढ़ने से बैंकों में नकदी का फ्लो भी बढ़ रहा है। ऐसी स्थिति में कर्ज को सस्ता रख कर्ज रफ्तार बढ़ाने की कोशिश में बैंक जमा पर दरें कम कर अपनी आर्थिक स्थिति को बेहतर रखने की कोशिश में हैं।

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