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Letter to Prime Minister of India: स्टार्टअप्स ने मोदी को लिखा पत्र, कहा नेट न्यूट्रैलिटी का बचाव करें प्रधानमंत्री

 Written By: Dharmender Chaudhary
 Published : Jan 26, 2016 01:15 pm IST,  Updated : Jan 26, 2016 01:15 pm IST

जोमाटो, क्लियरट्रिप, पेटीएम सहित सैकड़ों स्टार्टअप्स और उनके कर्मचारियों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से नेट न्यूट्रैलिटी का बचाव करने को कहा है।

Letter to Prime Minister of India: स्टार्टअप्स ने मोदी को लिखा पत्र, कहा नेट न्यूट्रैलिटी का बचाव करें प्रधानमंत्री- India TV Hindi
Letter to Prime Minister of India: स्टार्टअप्स ने मोदी को लिखा पत्र, कहा नेट न्यूट्रैलिटी का बचाव करें प्रधानमंत्री

नई दिल्ली। जोमाटो, क्लियरट्रिप, पेटीएम सहित सैकड़ों स्टार्टअप्स और उनके कर्मचारियों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से नेट न्यूट्रैलिटी का बचाव करने को कहा है। प्रधानमंत्री को लिखे पत्र में स्टार्टअप्स ने कहा है, हम आपसे आग्रह करते हैं कि हाल में घोषित स्टार्टअप इंडिया पहल को सुनिश्चित करें और नेट न्यूट्रैलिटी पर चिंता को दूर करें। साथ ही स्टार्टअप ने कहा, स्पष्ट रूप से डिफाइन पॉलिसी और मजबूत नियमों की जरूरत है।

500 लोगों ने हस्ताक्षर कर भेजा पत्र

इस पत्र पर करीब 500 लोगों ने हस्ताक्षर किए हैं। इनमें जोमाटो के संस्थापक दीपिंदर गोयल, क्लियरट्रिप के संस्थापक एच भट्ट, एक्सवाईएसईसी लैब्स के संस्थापक सुभो हल्दर, आईस्पि्रट फाउंडेशन के सह संस्थापक शरद शर्मा और पेटीएम के संस्थापक विजय शेखर शर्मा शामिल हैं। स्टार्टअप्स ने मोदी सरकार की पहल विशेषरूप डिजिटल इंडिया और स्टार्टअप इंडिया तथा कारोबार सुगमता की सराहना की है।

नेट न्यूट्रलिटी का बचाव करे सरकार

इस पत्र में लिखा गया है कि एंटी-नेट न्यूट्रलिटी प्रैक्टिस से देश में किस तरह स्टार्टअप इकोसिस्टम की ग्रोथ पर बुरा असर पड़ सकता है। इसके अलावा ‘बड़ी टेलीकॉम कंपनियों के निजी स्वार्थ या ऑनलाइन सर्विस कंपनियों के चलते स्टार्टअप इंडिया को नुकसान के बार में भी लिखा गया है। स्टार्टअप ने सरकार से मांग की है कि उन्हें रोकने के लिए नेट न्यूट्रलिटी पर साफ नियम की जरूरत है। देश में इन दिनों फेसबुक के फ्री बेसिक्स को लेकर बवाल चल रहा है। टेलीकॉम रेगुलेटर ट्राई ने भी ‘नेट न्यूट्रैलिटी’ बहस के मामले में फेसबुक के रूख को बांटने वाला करार दिया है। उसने कहा है कि इस मुद्दे पर परामर्श की सारी प्रक्रिया को केवल आंकड़ों का खेल और प्रायोजित चुनाव बना दिया गया।

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