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RINL की रणनीतिक बिक्री को मंत्रिमंडल की मंजूरी, अगले वित्त वर्ष में होगा निजीकरण

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने इस्पात कंपनी राष्ट्रीय इस्पात निगम लि.(आरआईएनएल) के निजीकरण का रास्ता साफ कर दिया है।

IndiaTV Hindi Desk IndiaTV Hindi Desk
Published on: February 04, 2021 8:14 IST
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Photo:RINL

RINL की रणनीतिक बिक्री को मंत्रिमंडल की मंजूरी, अगले वित्त वर्ष में होगा निजीकरण 

नयी दिल्ली। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने इस्पात कंपनी राष्ट्रीय इस्पात निगम लि.(आरआईएनएल) के निजीकरण का रास्ता साफ कर दिया है। दीपम के सचिव तुहिन कान्त पांडेय ने बुधवार को ट्वीट कर यह जानकारी दी। आरआईएनएल की रणनीतिक बिक्री अगले वित्त वर्ष के विनिवेश लक्ष्य का हिस्सा होगी। सरकार ने अगले वित्त वर्ष 2021-22 में विनिवेश से 1.75 लाख करोड़ रुपये जुटाने का लक्ष्य रखा है। 

पांडेय ने ट्वीट किया, ‘‘मंत्रिमंडल की आर्थिक मामलों की समिति (सीसीईए) ने 27 जनवरी को आरआईएनएल में भारत सरकार की शतप्रतिशत हिस्सेदारी के रणनीतिक विनिवेश को सैद्धान्तिक मंजूरी दे दी है।’’ सरकार का अगले वित्त वर्ष में बीपीसीएल, एयर इंडिया, शिपिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया, कंटेनर कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया, आईडीबीआई बैंक, बीईएमएल, पवन हंस, नीलाचल इस्पात निगम लि. और अन्य कंपनियों के रणनतिक विनिवेश को पूरा करने का लक्ष्य है। 

विनिवेश से 1.75 लाख करोड़ रुपये जुटाने के लिए सरकार के पास प्लान तैयार है। वित्त मंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार ने राज्य सरकारों से भी विनिवेश के लिए योजना तैयार करने के लिए कहा है। सरकार ने बजट में बताया कि कुछ सरकारी कंपनियों में विनिवेश को लेकर फैसले लिए जा चुके हैं। जो अगले वित्त वर्ष में पूरे हो जाएंगे। 

किन-किन कंपनियों में होगा विनिवेश 

वित्त मंत्री ने बजट में बताया कि सरकार ​कोरोना संकट के बाद भी सरकार अपने विनिवेश लक्ष्य को प्राप्त करने की दिशा में काम कर रही है। वित्त मंत्री ने बताया कि सरकार की विनिवेश सूची में बीपीसीएल, एयर इंडिया, शिपिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया, कंटेनर कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया, आईडीबीआई बैंक, बीईएमएल, पवन हंस, नीलाचल इस्पात निगम ͧलिमिटेड के साथ होने वाले कई लेन-देन 2021-22 में पूरे हो जाएंगे।

BPCL का प्रबंधन भी सौंपेगी सरकार

सरकार का ऐलान कर दिया है कि BPCL के रणनीतिक खरीदार को कंपनी का प्रबंधन नियंत्रण भी ट्रांसफर किया जाएगा, यानी मालिकाना हक भी खरीदार के पास चला जाएगा। हिस्सेदारी बेचने से सरकार को करीब 60 हजार करोड़ रुपये मिल सकते हैं। सरकार अपनी 52.98 फीसदी हिस्सेदारी बेच रही है।

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