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नोएडा में औद्योगिक जमीनों की ट्रांसफर फीस में 3% की कटौती, टाइम एक्सटेंशन और शेयरहोल्डिंग के नियमों में भी राहत

 Written By: Sunil Chaurasia
 Published : Oct 28, 2026 10:31 pm IST,  Updated : Oct 28, 2026 10:31 pm IST

यूनिफाइड रेगुलेशंस-2025 में ऑपरेशनल इंडस्ट्रियल यूनिट्स की ट्रांसफर फीस को 4 प्रतिशत से बढ़ाकर 10 प्रतिशत कर दिया गया था।

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सांकेतिक तस्वीर Image Source : FREEPIK

नोएडा में ऑपरेशनल इंडस्ट्रियल यूनिट्स के ट्रांसफर पर अब 10 प्रतिशत के बजाय 7 प्रतिशत फीस देनी होगी। नोएडा अथॉरिटी बोर्ड ने यूनिफाइड रेगुलेशंस-2025 के प्रावधानों में बदलाव को मंजूरी दे दी है। इसके साथ ही, इंडस्ट्रियल यूनिट्स के कंस्ट्रक्शन और प्रोडक्शन शुरू करने के लिए टाइम एक्सटेंशन, कंपनियों की शेयरहोल्डिंग में बदलाव की सूचना देने में देरी पर लगने वाले जुर्माने और कंपनी का लीगल स्ट्रक्चर बदलने के प्रोसेस में भी राहत दी गई है।

2025 में 4 प्रतिशत से बढ़ाकर 10 प्रतिशत कर दी गई थी ट्रांसफर फीस

बताते चलें कि यूनिफाइड रेगुलेशंस-2025 में ऑपरेशनल इंडस्ट्रियल यूनिट्स की ट्रांसफर फीस को 4 प्रतिशत से बढ़ाकर 10 प्रतिशत कर दिया गया था। अब इसमें 3 प्रतिशत घटाकर 10 से 7 प्रतिशत कर दिया गया है। इससे इंडस्ट्रियल यूनिट्स का ट्रांसफर करने वाले ऑन्त्रेप्रेन्यॉर्स को राहत मिलेगी।

3 साल तक मिल सकेगा एक्स्ट्रा टाइम एक्सटेंशन

औद्योगिक जमीनों पर कंस्ट्रक्शन पूरा करने और यूनिट को शुरू करने के लिए भी टाइम एक्सटेंशन के नियमों में बदलाव किए गए हैं। 20 हजार वर्गमीटर तक की जमीनों के लिए 3 साल और इससे बड़ी जमीनों के लिए 5 साल का बेस पीरियड रहेगा। इसके बाद अधिकतम 3 साल तक सालाना टाइम एक्सटेंशन मिल सकेगा। बेस पीरियड खत्म हो जाने के बाद, पहले साल के लिए जमीन के क्षेत्रफल का 3 प्रतिशत, दूसरे साल के लिए 5 प्रतिशत और तीसरे साल के लिए 7 प्रतिशत फीस देनी होगी। प्रत्येक बार अधिकतम एक साल का टाइम एक्सटेंशन दिया जाएगा।

शेयरहोल्डिंग में बदलाव पर लेट फीस में भी कटौती

निर्धारित समय के अंदर कंपनी की शेयरहोल्डिंग में बदलाव की सूचना नहीं देने पर लगने वाली लेट फीस 500 रुपये प्रतिदिन से घटाकर 300 रुपये प्रतिदिन कर दी गई है। इसके अलावा, प्राइवेट लिमिटेड कंपनी को एलएलपी में बदलने के प्रोसेस को भी आसान बना दिया गया है। अगर सभी शेयरहोल्डर उसी रेश्यो में एलएलपी के पार्टनर बनते हैं और एक्चुअल ऑनरशिप और कंट्रोल में बदलाव नहीं होता है, तो डिक्लेरेशन डीड के आधार पर अथॉरिटी के रिकॉर्ड में संस्था का स्वरूप बदला जा सकेगा।

फैमिली शेयर ट्रांसफर में भी राहत

फैमिली शेयरहोल्डिंग ट्रांसफर के नियमों में भी बदलाव किया गया है। सास-ससुर से बहू को शेयर ट्रांसफर करने को फीस में छूट के लिए तय पारिवारिक संबंधों की कैटेगरी में शामिल किया जाएगा। इसके अलावा, सरकारी नोटिफिकेशन के हिसाब से निर्धारित पारिवारिक संबंधों में होने वाले ट्रांसफर पर भी नियमानुसार छूट मिलेगी।

अथॉरिटी के मुताबिक, ये ताजा बदलाव ऑफिस ऑर्डर जारी होने की तारीख से प्रभावी होंगे। ये पेंडिंग और इसके बाद प्राप्त होने वाले ऐप्लिकेशन पर लागू होंगे। हालांकि, ऑफिस ऑर्डर से पहले दी गई मंजूरियों के तहत जमा की गई फीस की वापसी या एडजस्टमेंट नहीं किया जाएगा।

नोएडा से राहुल ठाकुर की रिपोर्ट

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