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क्रिप्टो निवेशकों पर सरकार का शिकंजा! एक्सचेंज अब सीधे इनकम टैक्स डिपार्टमेंट को देंगे आपके हर ट्रांजैक्शन की रिपोर्ट

 Published : Jul 27, 2026 05:55 pm IST,  Updated : Jul 27, 2026 06:29 pm IST

केंद्र सरकार ने क्रिप्टो लेनदेन पर निगरानी और टैक्स पारदर्शिता बढ़ाने के लिए बड़ा कदम उठाया है। केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) ने नई गाइडलाइन जारी की है, जिसके तहत अब क्रिप्टो एक्सचेंज और अन्य संबंधित प्लेटफॉर्म आपके हर ट्रांजैक्शन की जानकारी सीधे इनकम टैक्स विभाग को देंगे।

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क्रिप्टो निवेशकों के लिए बड़ा अलर्ट! Image Source : CANVA

अगर आप बिटकॉइन, इथेरियम  या किसी अन्य क्रिप्टोकरेंसी में निवेश करते हैं, तो अब आपको पहले से ज्यादा सतर्क रहने की जरूरत है। सरकार ने क्रिप्टो लेनदेन पर निगरानी बढ़ाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) ने एक नया गाइडेंस नोट जारी किया है, जिसके तहत क्रिप्टो एक्सचेंज और अन्य संबंधित प्लेटफॉर्म अब निवेशकों के ट्रांजैक्शन की जानकारी सीधे आयकर विभाग को देंगे। इसका मकसद क्रिप्टो निवेश को ज्यादा पारदर्शी बनाना और टैक्स चोरी पर रोक लगाना है।

CBDT के निर्देश के अनुसार, क्रिप्टो एक्सचेंजों और अन्य रिपोर्टिंग क्रिप्टो-एसेट सर्विस प्रोवाइडर्स (RCASP) को अपने ग्राहकों के ट्रांजैक्शन का रिकॉर्ड रखना होगा और इसकी जानकारी आयकर विभाग को देनी होगी। यह व्यवस्था OECD के क्रिप्टो-एसेट रिपोर्टिंग फ्रेमवर्क (CARF) के तहत लागू की जा रही है, जिसका उद्देश्य विभिन्न देशों के बीच क्रिप्टो लेनदेन से जुड़ी जानकारी शेयर करना है।

क्रिप्टो एक्सचेंजों को क्या करना होगा?

नए नियमों के तहत एक्सचेंजों को ग्राहकों की पहचान और टैक्स रेजिडेंसी की जांच करनी होगी। इसके अलावा उन्हें KYC जानकारी, ट्रांजैक्शन रिकॉर्ड और अन्य जरूरी डॉक्यूमेंट सुरक्षित रखने होंगे। हर साल उन्हें निर्धारित फॉर्म के जरिए इन जानकारियों को आयकर विभाग के साथ शेयर करना होगा। आसान शब्दों में कहें तो अब क्रिप्टो एक्सचेंज भी बैंकों की तरह टैक्स अधिकारियों को जानकारी देने वाले संस्थान बन जाएंगे।

निवेशकों पर क्या असर पड़ेगा?

इस नियम के तहत आम निवेशकों को कोई नया फॉर्म भरने की जरूरत नहीं होगी, लेकिन उनकी जिम्मेदारी बढ़ जाएगी। अब निवेशकों को अपने सभी क्रिप्टो निवेश और ट्रांजैक्शन का सही रिकॉर्ड रखना होगा। खरीद, बिक्री, ट्रांसफर और वॉलेट मूवमेंट से जुड़े डॉक्यूमेंट्स सुरक्षित रखने होंगे ताकि आयकर रिटर्न में दी गई जानकारी एक्सचेंज के रिकॉर्ड से मेल खा सके।

क्यों बढ़ी सरकार की चिंता?

क्रिप्टो एसेट्स पुराने बैंकिंग और फाइनेंशियल सिस्टम से बाहर काम करते हैं, इसलिए इनकी निगरानी करना मुश्किल होता है। सरकार का मानना है कि इस वजह से कई लेनदेन टैक्स अधिकारियों की नजर से बच सकते हैं। इसी चुनौती से निपटने के लिए भारत ने G20 और OECD के साथ मिलकर CARF ढांचे को अपनाया है। इसके तहत 2027 से देशों के बीच क्रिप्टो लेनदेन से जुड़ी जानकारी का स्वतः आदान-प्रदान शुरू होने की उम्मीद है।

अब छिपाना होगा मुश्किल

नए नियमों के बाद क्रिप्टो निवेशकों के लिए अपने ट्रांजैक्शन छिपाना काफी मुश्किल हो जाएगा। इसलिए जो लोग क्रिप्टो में निवेश करते हैं, उन्हें समय पर और सही तरीके से आयकर रिटर्न दाखिल करने के साथ-साथ सभी रिकॉर्ड सुरक्षित रखने की सलाह दी जा रही है।

इनपुट- PTI

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