क्रिप्टोकरेंसी की दुनिया में इन दिनों हलचल तेज हो गई है। एक नई रिसर्च ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि आने वाले समय में क्वांटम कंप्यूटर इतने ताकतवर हो सकते हैं कि वे बिटक्वाइन और एथेरियम जैसे नेटवर्क की सुरक्षा को चुनौती दे दें। रिसर्च के मुताबिक, पहले माना जाता था कि क्रिप्टो की सुरक्षा तोड़ने के लिए बेहद बड़े और ताकतवर क्वांटम कंप्यूटर की जरूरत होगी। लेकिन अब दावा किया गया है कि कम क्षमता वाले क्वांटम सिस्टम भी यह काम कर सकते हैं। यानी खतरा पहले से ज्यादा करीब आ गया है।
कैसे काम करती है क्रिप्टो सिक्योरिटी?
बिटक्वाइन और एथेरियम जैसे प्लेटफॉर्म एक खास तरह की क्रिप्टोग्राफी पर आधारित हैं। इसमें पब्लिक-की और प्राइवेट-की का सिस्टम होता है। पब्लिक-की से कोई भी आपको पैसे भेज सकता है, लेकिन प्राइवेट-की ही असली मालिकाना हक साबित करती है। अगर किसी तरह प्राइवेट-की किसी के हाथ लग जाए, तो वह आपके पूरे फंड पर कब्जा कर सकता है। यही वजह है कि इसे सबसे ज्यादा सुरक्षित रखना जरूरी होता है।
9 मिनट में चोरी का खतरा!
रिसर्च में एक संभावित खतरे का जिक्र किया गया है, जिसमें कहा गया है कि भविष्य के क्वांटम कंप्यूटर सिर्फ 9 मिनट में प्राइवेट-की निकाल सकते हैं। यानी जब आप ट्रांजैक्शन कर रहे होंगे, उसी दौरान आपका डेटा हैक हो सकता है और पैसा चोरी हो सकता है।
तीन तरह के बड़े खतरे
एक्सपर्ट्स ने तीन तरह के हमलों की बात कही है:
- On-spend attack: ट्रांजैक्शन के दौरान हमला
- At-rest attack: पुराने और निष्क्रिय वॉलेट्स पर हमला
- On-setup attack: सिस्टम की कमजोरियों का फायदा
इन खतरों से साफ है कि जैसे-जैसे टेक्नोलॉजी आगे बढ़ेगी, रिस्क भी बढ़ सकता है।
पुराने वॉलेट्स पर सबसे ज्यादा खतरा
जो वॉलेट सालों से इस्तेमाल नहीं हुए हैं और जिनकी प्राइवेट की खो चुकी है, वे सबसे ज्यादा रिस्क में हैं। ऐसे वॉलेट्स में अरबों डॉलर की क्रिप्टो पड़ी है, जिसे भविष्य में निशाना बनाया जा सकता है।
क्या है इसका समाधान?
इस खतरे से बचने के लिए एक्सपर्ट पोस्ट-क्वांटम क्रिप्टोग्राफी अपनाने की सलाह दे रहे हैं। इसके अलावा कुछ सावधानियां भी जरूरी हैं:
- प्राइवेट-की को सुरक्षित रखें
- एक ही key का बार-बार इस्तेमाल न करें
- वॉलेट सिक्योरिटी मजबूत करें
क्या घबराने की जरूरत है?
इंडस्ट्री के जानकारों का कहना है कि फिलहाल घबराने की जरूरत नहीं है, लेकिन तैयारी जरूरी है। यह एक संकेत है कि क्रिप्टो सिस्टम को और मजबूत बनाना होगा।