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पश्चिम एशिया संकट पर सरकार की पैनी नजर! निर्मला सीतारमण ने बताया कैसे ‘3F’ बचाएंगे भारत की अर्थव्यवस्था

 Edited By: Shivendra Singh
 Published : May 25, 2026 06:13 pm IST,  Updated : May 25, 2026 07:19 pm IST

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल के बीच भारत सरकार पूरी तरह अलर्ट मोड में नजर आ रही है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने साफ कहा है कि सरकार देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले असर पर लगातार नजर बनाए हुए है।

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निर्मला सीतारमण ने बताई भारत की इकोनॉमी बचाने की पूरी तैयारी

पश्चिम एशिया में जारी तनाव और युद्ध के असर ने पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था की चिंता बढ़ा दी है। भारत भी इस संकट पर लगातार नजर बनाए हुए है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सोमवार को साफ कहा कि सरकार देश की अर्थव्यवस्था को सुरक्षित रखने के लिए खास तौर पर “3F” यानी फ्यूल (ईंधन), फर्टिलाइजर (उर्वरक) और फॉरेक्स (विदेशी मुद्रा भंडार) पर फोकस कर रही है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि वैश्विक दबाव के बावजूद भारत की घरेलू अर्थव्यवस्था अभी भी मजबूत और स्थिर बनी हुई है।

‘3F’ क्यों बना सरकार की सबसे बड़ी चिंता?

पीटीआई के मुताबिक, वित्त मंत्री ने कहा कि कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें, उर्वरकों की महंगाई और विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव सरकार के लिए बड़ी चुनौती बन गए हैं। उन्होंने बताया कि पेट्रोल-डीजल पर एक्साइज ड्यूटी घटाने से सरकार को करीब 1 लाख करोड़ रुपये का नुकसान होगा, लेकिन आम लोगों को राहत देना जरूरी था। उन्होंने यह भी कहा कि खाद की कीमतें कल्पना से परे स्तर तक पहुंच चुकी हैं। वहीं सोने की बढ़ती कीमतें भी अर्थव्यवस्था पर असर डाल रही हैं।

सरकार ने डर फैलाने वालों को दिया जवाब

निर्मला सीतारमण ने बिना नाम लिए उन लोगों पर निशाना साधा जो देश की आर्थिक स्थिति को लेकर नकारात्मक माहौल बना रहे हैं। उन्होंने कहा कि भारत की चुनौतियां ज्यादातर बाहरी कारणों से पैदा हुई हैं, लेकिन देश की आंतरिक आर्थिक स्थिति अब भी मजबूत है। वित्त मंत्री ने कहा कि लोगों में डर फैलाने के बजाय भरोसा पैदा करना जरूरी है। सरकार हर हालात से निपटने के लिए पूरी तैयारी में है।

MSME सेक्टर की बढ़ी चिंता

वित्त मंत्री ने MSME सेक्टर का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि छोटे और मझोले उद्योगों का करीब 8.1 लाख करोड़ रुपये अभी भी फंसा हुआ है। उन्होंने सरकारी कंपनियों को निर्देश दिया कि MSME का भुगतान 45 दिनों के भीतर किया जाए।

होर्मुज संकट से बढ़ी परेशानी

ईरान संकट और होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव के कारण भारत के लिए तेल और यूरिया की सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ गई है। पिछले कुछ दिनों में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में कई बार बढ़ोतरी हो चुकी है, जिससे आम लोगों की जेब पर सीधा असर पड़ रहा है।

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