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Crude Oil Price: तेल की कीमतों में भारी गिरावट! $100 से नीचे आया क्रूड, क्या ईरान-यूएस तनाव में आ रही है नरमी?

 Written By: Shivendra Singh
 Published : May 07, 2026 01:36 pm IST,  Updated : May 07, 2026 01:36 pm IST

वैश्विक तेल बाजार में एक बार फिर बड़ी हलचल देखने को मिली है। कच्चे तेल की कीमतें एक ही दिन में करीब 8% तक गिर गईं। ब्रेंट क्रूड फिसलकर $99 प्रति बैरल के करीब पहुंच गया, जबकि WTI क्रूड $93 के आसपास कारोबार करता दिखा। इस तेज गिरावट ने निवेशकों को चौंका दिया है।

$100 के नीचे आया क्रूड ऑयल- India TV Hindi
$100 के नीचे आया क्रूड ऑयल Image Source : CANVA

वैश्विक ऊर्जा बाजार में एक बार फिर बड़ा बदलाव देखने को मिला है। कच्चे तेल की कीमतों में तेज गिरावट दर्ज की गई है और ब्रेंट क्रूड $100 प्रति बैरल से नीचे फिसल गया है। इससे पहले पिछले सत्र में भी तेल करीब 8% तक गिर चुका था। बाजार में यह गिरावट अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम करने की संभावित कोशिशों के बाद आई है।

रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिका ने ईरान को एक नया प्रस्ताव दिया है, जिसमें दोनों देशों के बीच बातचीत फिर से शुरू करने और धीरे-धीरे स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) को खोलने की बात शामिल है। यह प्रस्ताव एक “वन-पेज मेमोरेंडम” के रूप में दिया गया है। माना जा रहा है कि ईरान आने वाले दिनों में इस पर जवाब दे सकता है। इस खबर के बाद निवेशकों में उम्मीद जगी है कि मध्य पूर्व में चल रहा तनाव कम हो सकता है, जिसका सीधा असर तेल आपूर्ति पर पड़ेगा।

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बना सबसे बड़ा मुद्दा

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया का एक बेहद अहम तेल परिवहन मार्ग है, जो पिछले कुछ समय से लगभग बंद पड़ा है। ईरान और अमेरिका के बीच तनाव के चलते यह मार्ग बाधित रहा है। विशेषज्ञों के मुताबिक, यदि यह मार्ग फिर से खुलता है तो वैश्विक तेल सप्लाई में बड़ा सुधार हो सकता है और कीमतें और नीचे जा सकती हैं।

बाजार अभी भी अनिश्चित

हालांकि कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि मौजूदा गिरावट जल्दबाजी में की गई प्रतिक्रिया हो सकती है। एनालिस्ट वंदना हारी के अनुसार, जब तक स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पूरी तरह नहीं खुलता, तब तक बाजार में स्थिरता की उम्मीद करना मुश्किल है।

अमेरिका की रणनीति और वैश्विक दबाव

अमेरिकी राष्ट्रपति ने संकेत दिया है कि अगर ईरान सहमत होता है तो सैन्य कार्रवाई और ब्लॉकेड हटाए जा सकते हैं। लेकिन अगर समझौता नहीं हुआ, तो हालात फिर बिगड़ सकते हैं। अमेरिका पर घरेलू स्तर पर भी दबाव है क्योंकि तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव से महंगाई बढ़ रही है।

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