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फिच की भारत पर मुहर, इतनी रेटिंग रखी बरकरार, अर्थव्यवस्था और विदेशी फंड मजबूत, जानें क्या कहा?

Edited By: Sourabha Suman @sourabhasuman Published : Aug 25, 2025 03:55 pm IST, Updated : Aug 25, 2025 04:23 pm IST

फिच रेटिंग्स ने यह भी कहा है कि पिछले दो सालों में भारत की आर्थिक गति में कुछ सुस्ती भी देखी गई है। साथ ही कहा कि अगर सरकार प्रस्तावित जीएसटी दरों में सुधार को अमल में लाती है, तो इससे घरेलू उपभोग को बल मिलेगा और यह आर्थिक मंदी के प्रभावों को संतुलित करने में मदद करेगा।

रिपोर्ट में यह भी चेताया गया है कि भारत की राजकोषीय स्थिति अब भी एक कमजोरी है। - India TV Paisa
Photo:FREEPIK रिपोर्ट में यह भी चेताया गया है कि भारत की राजकोषीय स्थिति अब भी एक कमजोरी है।

ग्लोबल रेटिंग एजेंसी फिच रेटिंग्स ने कहा है कि भारत की सॉवरेन क्रेडिट रेटिंग 'BBB-' को सोमवार को स्थिर दृष्टिकोण के साथ बरकरार रखा है। एजेंसी ने कहा कि भारत की मजबूत आर्थिक वृद्धि दर और ठोस बाह्य वित्तीय स्थिति इस रेटिंग को समर्थन प्रदान करती है। पीटीआई की खबर के मुताबिक, फिच ने अनुमान जताया है कि वित्त वर्ष 2025-26 (FY26) में भारत की जीडीपी वृद्धि दर यानी विकास दर 6.5% रहेगी, जो पिछले वर्ष के समान है। यह दर 'BBB' कैटेगरी के देशों के औसत 2.5% से काफी अधिक है, जिससे भारत की स्थिति तुलनात्मक रूप से मजबूत नजर आती है।

खबर के मुताबिक, हालांकि फिच रेटिंग्स ने यह भी स्वीकार किया कि पिछले दो सालों में भारत की आर्थिक गति में कुछ सुस्ती देखी गई है। बावजूद इसके, भारत की स्थिति अपने समकक्ष देशों की तुलना में काफी मजबूत बनी हुई है।

घरेलू उपभोग को बल मिलेगा

रेटिंग एजेंसी का मानना है कि अगर सरकार द्वारा प्रस्तावित जीएसटी दरों में सुधार को अमल में लाया गया, तो इससे घरेलू उपभोग को बल मिलेगा और यह आर्थिक मंदी के प्रभावों को संतुलित करने में मदद करेगा। सरकार ने GST सिस्टम को आसान बनाने के लिए 5% और 18% की दो-स्लैब दरों का प्रस्ताव दिया है, वहीं 5-7 वस्तुओं पर 40% की ऊंची दर लागू करने की योजना है। इससे मौजूदा 12% और 28% के टैक्स स्लैब हटाए जा सकते हैं।

भारत की राजकोषीय स्थिति अब भी एक कमजोरी

फिच का कहना है कि स्थिर आर्थिक विकास, मैक्रोइकोनॉमिक स्थिरता और राजकोषीय विश्वसनीयता में सुधार से भारत के संरचनात्मक संकेतकों में भी सकारात्मक बदलाव आ सकते हैं। इससे मध्यम अवधि में देश का कर्ज धीरे-धीरे कम हो सकता है। हालांकि, रिपोर्ट में यह भी चेताया गया है कि भारत की राजकोषीय स्थिति अब भी एक कमजोरी है। 'BBB' कैटेगरी के अन्य देशों की तुलना में भारत का राजकोषीय घाटा और सार्वजनिक कर्ज कहीं अधिक है।

इसके अतिरिक्त, शासन संकेतक और प्रति व्यक्ति आय जैसे क्षेत्रों में पिछड़ापन भी देश की रेटिंग को सीमित करता है। उल्लेखनीय है कि हाल ही में 14 अगस्त को S&P Global Ratings ने भारत की सॉवरेन रेटिंग में 18 वर्षों बाद सुधार करते हुए इसे 'BBB-' से 'BBB' कर दिया था।

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