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36 महीने में खड़ी कर दी जामनगर रिफाइनरी, फिर Jio से बदल दी भारत की तस्वीर; जानिए कैसे मुकेश अंबानी ने बनाया रिलायंस का साम्राज्य

 Written By: Shivendra Singh
 Published : Oct 15, 2026 10:59 am IST,  Updated : Oct 15, 2026 10:59 am IST

एक ऐसा सपना, जिसने भारत की औद्योगिक ताकत को नई पहचान दी। फिर एक ऐसी पहल, जिसने करोड़ों लोगों के मोबाइल इस्तेमाल करने का तरीका बदल दिया। रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन मुकेश अंबानी ने जामनगर रिफाइनरी से लेकर Jio तक, कारोबार को नए मुकाम पर पहुंचाने की कहानी लिखी है।

मुकेश अंबानी ने कैसे...- India TV Hindi
मुकेश अंबानी ने कैसे बनाया रिलायंस का साम्राज्य Image Source : RELIANCE INDUSTRIES OFFICIAL WEBSITE

भारत के कारोबारी इतिहास में कुछ ऐसे फैसले हैं, जिन्होंने न सिर्फ एक कंपनी की किस्मत बदली, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था और आम लोगों की जिंदगी पर भी गहरा असर डाला। रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन मुकेश अंबानी की कहानी भी कुछ ऐसी ही है। एक तरफ गुजरात के जामनगर में दुनिया के सबसे बड़े रिफाइनिंग केंद्रों में शामिल रिफाइनरी को रिकॉर्ड समय में तैयार करने का लक्ष्य था, तो दूसरी तरफ Jio के जरिए करोड़ों भारतीयों तक सस्ता इंटरनेट पहुंचाने का सपना। इन दोनों बड़ी परियोजनाओं ने रिलायंस को एनर्जी से लेकर डिजिटल कारोबार तक एक मजबूत पहचान दिलाई।

पिता के सपने को पूरा करने के लिए बनाया रिफाइनरी का साम्राज्य

रिलायंस इंडस्ट्रीज की नींव धीरूभाई अंबानी ने रखी थी। उनका सपना था कि भारत में बड़े पैमाने पर औद्योगिक परियोजनाएं बनाई जाएं और देश को वैश्विक स्तर पर मजबूत पहचान मिले। इसी सोच को आगे बढ़ाते हुए मुकेश अंबानी ने गुजरात के जामनगर में विशाल रिफाइनरी परियोजना को साकार करने में अहम भूमिका निभाई। इस परियोजना की खास बात इसकी रफ्तार थी। जामनगर रिफाइनरी को महज 36 महीनों में खड़ा किया गया। इस दौरान बड़े लेवल पर योजना, तकनीक, निवेश और निर्माण क्षमता का इस्तेमाल हुआ। मुकेश अंबानी ने अपनी पढ़ाई के दौरान स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी का कोर्स बीच में छोड़कर भारत लौटने का फैसला भी किया, ताकि रिलायंस के कारोबार को आगे बढ़ाने में योगदान दे सकें। जामनगर परियोजना ने रिलायंस की पहचान एक बड़े औद्योगिक समूह के रूप में मजबूत की। इसने दिखाया कि भारतीय कंपनियां भी बड़े पैमाने की जटिल परियोजनाओं को कम समय में पूरा करने की क्षमता रखती हैं।

Jio ने सस्ते इंटरनेट से बदल दी भारत की तस्वीर

रिफाइनिंग कारोबार में अपनी ताकत दिखाने के बाद रिलायंस ने डिजिटल दुनिया में बड़ा दांव लगाया। साल 2016 में जियो की शुरुआत के साथ भारतीय टेलीकॉम बाजार में बड़ा बदलाव आया। कंपनी ने मुफ्त वॉयस कॉल और बेहद सस्ते डेटा की पेशकश की, जिससे इंटरनेट आम लोगों की पहुंच में आने लगा।जियो ने सिर्फ 170 दिनों में 10 करोड़ ग्राहक जोड़ लिए। इसके बाद देश में वीडियो कॉल, ऑनलाइन पढ़ाई, डिजिटल भुगतान और इंटरनेट आधारित सेवाओं का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा। मोबाइल इंटरनेट के मामले में भारत की वैश्विक रैंकिंग में भी बड़ा सुधार हुआ। जियो का नेटवर्क बड़े शहरों तक सीमित नहीं रहा। दूरदराज के गांवों, पहाड़ी इलाकों और आदिवासी क्षेत्रों में कनेक्टिविटी बढ़ने से लोगों को शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं और रोजगार के नए अवसरों तक पहुंच मिली।

ऊर्जा से डिजिटल तकनीक तक रिलायंस का विस्तार

कोरोना महामारी के दौरान जब स्कूल, दफ्तर और कई जरूरी सेवाएं ऑनलाइन हो गईं, तब डिजिटल कनेक्टिविटी ने करोड़ों लोगों को जोड़े रखने में अहम भूमिका निभाई। इस दौर ने इंटरनेट की जरूरत को और स्पष्ट कर दिया। रिलायंस ने ऊर्जा और रिफाइनिंग से आगे बढ़कर दूरसंचार, डिजिटल सेवाओं और नई तकनीकों में भी निवेश किया। कंपनी की रणनीति का मुख्य उद्देश्य भारत में बड़े कारोबार खड़े करना और वैश्विक कंपनियों के साथ प्रतिस्पर्धा करने की क्षमता विकसित करना रहा है।

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