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जून में सोने की कीमत 12% लुढ़की, अंतरराष्ट्रीय बाजार में $4000 के नीचे आया गोल्ड; 2008 के बाद से सबसे बड़ी मंथली गिरावट

 Edited By: Shivendra Singh
 Published : Jul 01, 2026 07:01 pm IST,  Updated : Jul 01, 2026 07:01 pm IST

सोने की कीमतों में जून 2026 के दौरान बड़ी गिरावट देखने को मिली है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में गोल्ड की कीमत 12% तक टूट गई और यह 4,000 डॉलर प्रति औंस के अहम स्तर से नीचे पहुंच गई। यह अक्टूबर 2008 के बाद सोने की सबसे बड़ी मासिक गिरावट मानी जा रही है।

जून 2026 में सोने की कीमत...- India TV Hindi
जून 2026 में सोने की कीमत 12% टूटी Image Source : CANVA

अगर आप गोल्ड में इन्वेस्टमेंट करने की सोच रहे हैं या पहले से निवेश कर चुके हैं, तो आपके लिए यह बड़ी खबर है। जून 2026 में अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमतों में जोरदार गिरावट दर्ज की गई है। गोल्ड की कीमत 12% टूटकर 4,000 डॉलर से नीचे आ गई है। यह अक्टूबर 2008 के बाद सोने की सबसे बड़ी मासिक गिरावट मानी जा रही है। लगातार तीसरे कारोबारी सत्र में भी गोल्ड की कीमतों पर दबाव बना रहा।

स्पॉट गोल्ड की कीमत करीब 3,975 डॉलर प्रति औंस तक फिसल गई, जबकि एक समय यह 3,943 डॉलर के आसपास पहुंच गई थी, जो पिछले साल नवंबर के बाद का सबसे निचला स्तर है। जून महीने में आई 12% की गिरावट ने सोने को लगातार चौथे महीने नुकसान की राह पर ला दिया है। इसके साथ ही 2024 के बाद पहली बार गोल्ड में तिमाही गिरावट भी देखने को मिली।

क्यों टूट रही हैं सोने की कीमतें?

सोने में गिरावट की सबसे बड़ी वजह अमेरिका में बढ़ती ट्रेजरी यील्ड, मजबूत होता अमेरिकी डॉलर और फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दर बढ़ाने की बढ़ती संभावना है। ऊंची ब्याज दरों के माहौल में निवेशक बिना ब्याज वाले निवेश जैसे सोने से दूरी बनाने लगते हैं। इसके अलावा पश्चिम एशिया में तनाव और महंगाई की चिंता ने भी बाजार की धारणा को प्रभावित किया है।

आगे कैसा रहेगा गोल्ड का रुख?

मार्केट एक्सपर्ट्स के अनुसार, आने वाले दिनों में सोने की कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है। अमेरिका के रोजगार आंकड़े, फेडरल रिजर्व की अगली मौद्रिक नीति और डॉलर की चाल पर गोल्ड की दिशा काफी हद तक निर्भर करेगी। कुछ विश्लेषकों का मानना है कि यदि 4,000 डॉलर का स्तर लंबे समय तक नहीं टिकता, तो कीमतें और नीचे जा सकती हैं।

क्या निवेशकों को खरीदारी करनी चाहिए?

शॉर्ट-टर्म में सोने पर दबाव बना रह सकता है, लेकिन लॉन्ग-टर्म का नजरिया अभी भी पॉजिटिव है। अगर कीमतों में और गिरावट आती है, तो लंबे समय के निवेशक चरणबद्ध तरीके से खरीदारी पर विचार कर सकते हैं। भारतीय निवेशकों के लिए रुपये में कमजोरी अंतरराष्ट्रीय गिरावट के असर को कुछ हद तक कम कर सकती है, जिससे घरेलू बाजार में सोने की कीमतों में सीमित उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।

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