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बच्चों की डेटा प्राइवेसी के लिए DPDP नियमों को अपग्रेड कर रही सरकार, जानिए कैसे होगा फायदा

 Edited By: Pawan Jayaswal
 Published : Jan 08, 2025 07:14 am IST,  Updated : Jan 08, 2025 07:14 am IST

तीन जनवरी को डीपीडीपी नियम, 2025 का मसौदा जारी किया गया था। इन पर 18 फरवरी, 2024 तक सार्वजनिक टिप्पणियां की जा सकती हैं। नियमों के मसौदे के मुताबिक, डिजिटल प्लेटफॉर्म किसी बच्चे के सत्यापित अभिभावक या माता-पिता से सहमति लेने के बाद ही उसके डेटा का प्रसंस्करण कर सकते हैं।

डेटा प्राइवेसी- India TV Hindi
डेटा प्राइवेसी Image Source : FILE

इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने मंगलवार को कहा कि बच्चों को डिजिटल जगत में होने वाले नुकसान से बचाते हुए उन्हें टेक्नोलॉजी से जोड़ने के लिए डिजिटल निजी डेटा संरक्षण (DPDP) नियमों को और परिष्कृत किया जाएगा। वैष्णव ने संवाददाताओं से बातचीत में कहा कि डीपीडीपी के नए नियम उनके कार्यान्वयन से हासिल अनुभवों के आधार पर विकसित होंगे। वैष्णव ने कहा, ‘‘हम इसे (डीपीडीपी नियमों को) और परिष्कृत करेंगे ताकि बच्चों को कई तरह के नुकसान से बचाते हुए टेक्नोलॉजी की ताकत को बच्चों तक पहुंचाया जा सके।’’

डीपीडीपी नियम, 2025

सरकार ने तीन जनवरी को डीपीडीपी नियम, 2025 का मसौदा जारी किया था। इन पर 18 फरवरी, 2024 तक सार्वजनिक टिप्पणियां की जा सकती हैं। नियमों के मसौदे के मुताबिक, डिजिटल प्लेटफॉर्म  किसी बच्चे के सत्यापित अभिभावक या माता-पिता से सहमति लेने के बाद ही उसके डेटा का प्रसंस्करण कर सकते हैं। इसका सत्यापन पहचान और आयु के बारे में स्वैच्छिक रूप से दिए गए ब्योरे का इस्तेमाल कर या किसी कानूनी निकाय या केंद्र/ राज्य सरकारों द्वारा निर्धारित इकाई से जारी वर्चुअल टोकन के जरिये किया जा सकता है।

व्यक्ति की गोपनीयता को कोई खतरा नहीं होगा

वैष्णव ने कहा कि टोकन प्रणाली आधार-आधारित लेनदेन के मामले में सत्यापन जैसे विभिन्न मामलों में कामयाब रही है। उन्होंने कहा, ‘‘सत्यापन के लिए जारी होने वाले टोकन अस्थायी होंगे और एक लेनदेन तक ही सीमित होंगे। उसके बाद इसे स्वचालित रूप से नष्ट कर दिया जाएगा।’’ केंद्रीय मंत्री ने कहा कि जरूरत पड़ने पर क्षेत्र-विशिष्ट दिशानिर्देश क्षेत्रीय विशेषज्ञों और हितधारकों के परामर्श के बाद जारी किए जा सकते हैं। उन्होंने कहा कि वर्चुअल टोकन के जरिये सत्यापन होने से किसी व्यक्ति की गोपनीयता को कोई खतरा नहीं होगा। वैष्णव ने कहा कि डीपीडीपी अधिनियम का व्हिसलब्लोअर पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा क्योंकि उन्हें इस कानून के तहत संरक्षण मिला हुआ है। उन्होंने कहा कि डीपीडीपी अधिनियम के तहत शिकायत दर्ज करने की कोई सीमा तय नहीं की गई है।

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