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''घरों की बिक्री पर सरकारों को जाता है 30-50% तक का टैक्स'', क्रेडाई अध्यक्ष बोले- किफायती घर बनाने में बिल्डर असमर्थ

 Written By: Sunil Chaurasia
 Published : Oct 03, 2026 12:05 pm IST,  Updated : Oct 03, 2026 12:12 pm IST

क्रेडाई के अध्यक्ष शेखर पटेल ने कहा कि केंद्र सरकार प्रत्येक फ्लैट के लिए 45 लाख रुपये की अधिकतम सीमा को खत्म करके किफायती आवास की परिभाषा में बदलाव करना चाहिए।

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सांकेतिक तस्वीर Image Source : UPAVP

रियल एस्टेट कंपनियों के संगठन क्रेडाई (CREDAI) ने शुक्रवार को कहा कि घर बनाने की लागत में काफी बढ़ोतरी हो गई है। इसके साथ ही, घरों की बिक्री पर टैक्स की ऊंची दरों ने भी काफी दबाव बना दिया है। लागत और टैक्स बढ़ने की वजह से रियल एस्टेट बिल्डरों के लिए 45 लाख रुपये वाले किफायती मकान बनाना बहुत मुश्किल हो गया है। इन बाधाओं को ध्यान में रखते हुए क्रेडाई ने सस्ते फ्लैटों की डिमांड और सप्लाई को रफ्तार देने के लिए सरकार से प्रोत्साहन देने की मांग की है। 

किफायती आवास की परिभाषा में बदलाव करने की जरूरत

क्रेडाई के अध्यक्ष शेखर पटेल ने शुक्रवार को एक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि केंद्र सरकार प्रत्येक फ्लैट के लिए 45 लाख रुपये की अधिकतम सीमा को खत्म करके किफायती आवास (Affordable Housing) की परिभाषा में बदलाव करना चाहिए। उन्होंने उम्मीद जताई कि सरकार रियल एस्टेट इंडस्ट्री की इस मांग पर ध्यान देगी। पटेल ने कहा, ''हम पर्याप्त संख्या में किफायती मकान उपलब्ध कराने में सक्षम नहीं हैं।'' 

30 से 50 प्रतिशत तक केंद्र सरकार, राज्य सरकारों और नगर निगमों को टैक्स के रूप में चुकाते हैं बिल्डर्स

शेखर पटेल ने कहा कि जमीन की कीमत, निर्माण की बढ़ती लागत और बिक्री मूल्य पर 30 से 50 प्रतिशत तक के ऊंचे टैक्स किफायती आवास की सप्लाई बढ़ाने में प्रमुख बाधाएं हैं। गौरतलब है कि डेवलपर्स बिक्री मूल्य का 30 से 50 प्रतिशत तक केंद्र सरकार, राज्य सरकारों और नगर निगमों को टैक्स के रूप में चुकाते हैं। पटेल ने कहा, ''हम इन बाधाओं और चुनौतियों से पार पाने के लिए सरकार के साथ मिलकर काम कर रहे हैं।'' 

45 लाख रुपये की अधिकतम सीमा हटाने की मांग

क्रेडाई के अध्यक्ष ने उम्मीद जताई कि सस्ते मकानों की डिमांड और सप्लाई को बढ़ाने के लिए अगले 6 महीनों में कुछ नीतिगत पहल की जाएगी। किफायती आवास की परिभाषा में बदलाव की मांग पर उन्होंने कहा कि क्रेडाई इस मुद्दे पर सरकार के साथ लगातार बातचीत कर रही है। पटेल ने कहा, ''हम चाहते हैं कि 45 लाख रुपये की अधिकतम सीमा हटाई जाए। किफायती मकान कहलाने के लिए सिर्फ क्षेत्रफल की सीमा होनी चाहिए, जो महानगरों के लिए 60 वर्ग मीटर और गैर-महानगरों के लिए 90 वर्ग मीटर हो।

PTI Inputs

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