मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव का असर अब भारत की अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है। अगर हालात और बिगड़ते हैं तो देश में पेट्रोल-डीजल, गैस, खाद, प्लास्टिक और हीरे जैसे कई जरूरी सामान की सप्लाई प्रभावित हो सकती है। एक रिपोर्ट के मुताबिक भारत हर साल इस क्षेत्र से करीब 98 अरब डॉलर (करीब ₹9 लाख करोड़ से ज्यादा) का सामान आयात करता है। ऐसे में अगर सप्लाई में रुकावट आती है तो इसका असर आम लोगों से लेकर उद्योगों तक महसूस किया जा सकता है।
ऊर्जा सप्लाई पर सबसे बड़ा खतरा
भारत की सबसे ज्यादा निर्भरता मिडिल ईस्ट पर ऊर्जा यानी तेल और गैस के लिए है। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा इसी क्षेत्र से खरीदता है। रिपोर्ट के अनुसार करीब 70 अरब डॉलर का पेट्रोलियम मिडिल ईस्ट से आता है, जिसमें कच्चे तेल की हिस्सेदारी लगभग 50 अरब डॉलर से ज्यादा है। अगर सप्लाई बाधित होती है तो देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतें बढ़ सकती हैं। इसका असर ट्रांसपोर्ट, लॉजिस्टिक्स और खेती-किसानी पर भी पड़ेगा, क्योंकि खेतों में इस्तेमाल होने वाले डीजल पंप और ट्रैक्टर भी महंगे हो सकते हैं।
एलएनजी और गैस सप्लाई भी जोखिम में
भारत की गैस जरूरत का बड़ा हिस्सा भी इसी क्षेत्र से आता है। रिपोर्ट के मुताबिक भारत की करीब 68 फीसदी LNG सप्लाई मिडिल ईस्ट से होती है। हाल ही में कतर की कंपनी ने जहाजों की आवाजाही में दिक्कत के कारण कुछ गैस सप्लाई रोक दी है, जिससे चिंता और बढ़ गई है।
रसोई गैस पर भी असर संभव
मिडिल ईस्ट से आने वाली एलपीजी (LPG) भारत की कुल आयात का लगभग 47 फीसदी है। अगर लंबे समय तक सप्लाई में रुकावट आती है तो देश के करोड़ों घरों में इस्तेमाल होने वाली रसोई गैस पर भी असर पड़ सकता है।
खेती और खाद की सप्लाई पर असर
भारत बड़ी मात्रा में खाद भी मिडिल ईस्ट से खरीदता है। 2025 में भारत ने करीब 3.7 अरब डॉलर का उर्वरक आयात किया। अगर इसकी सप्लाई प्रभावित होती है तो किसानों को खाद महंगी मिल सकती है और सरकार पर सब्सिडी का बोझ भी बढ़ सकता है। इससे खाद्य पदार्थों की कीमतों पर भी असर पड़ सकता है।
हीरा और उद्योग भी प्रभावित हो सकते हैं
भारत का हीरा उद्योग भी इस क्षेत्र पर निर्भर है। 2025 में भारत ने करीब 6.8 अरब डॉलर के कच्चे हीरे मिडिल ईस्ट से खरीदे। अगर इनकी सप्लाई रुकती है तो सूरत जैसे शहरों में हीरा उद्योग पर असर पड़ सकता है।
क्या है चिंता की वजह
हाल के दिनों में सऊदी अरब, कतर, यूएई और ओमान के कई ऊर्जा और लॉजिस्टिक ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन हमले हुए हैं। इससे तेल और गैस की सप्लाई में बाधा की आशंका बढ़ गई है।






































