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भारत की GDP ग्रोथ FY2027 में 6.6% रहने का अनुमान, ‘विकसित भारत’ के लिए रिफॉर्म्स जरूरी: S&P रिपोर्ट

 Published : May 06, 2026 06:44 pm IST,  Updated : May 06, 2026 06:44 pm IST

रिपोर्ट में कहा गया कि अप्रैल के महंगाई आंकड़ों में बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है, जहां WPI, CPI से अधिक रहने की संभावना है। वहीं भारतीय रिज़र्व बैंक ने FY27 में महंगाई दर 4.6% रहने का अनुमान जताया है, लेकिन इसके ऊपर जाने के जोखिम भी बने हुए हैं।

रुपये में कमजोरी और तेल की कीमतों में तेजी अर्थव्यवस्था के लिए “डबल झटका” है।- India TV Hindi
रुपये में कमजोरी और तेल की कीमतों में तेजी अर्थव्यवस्था के लिए “डबल झटका” है। Image Source : ANI

रेटिंग एजेंसी एसएंडपी ग्लोबल ने कहा है कि भारत की आर्थिक विकास दर चालू वित्त वर्ष में घटकर 6.6 प्रतिशत रह सकती है, जो पहले अनुमानित 7.1 प्रतिशत थी। एजेंसी ने यह भी कहा कि विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को हासिल करने के लिए ऊर्जा और खाद्य सुरक्षा से जुड़े सुधार बेहद जरूरी होंगे। पीटीआई की खबर के मुताबिक, क्रिसिल लिमिटेड के साथ मिलकर जारी रिपोर्ट ‘इंडिया फॉरवर्ड’ में कहा गया है कि भारत इस समय वैश्विक आर्थिक झटकों का सामना कर रहा है, जिनमें ऊर्जा आपूर्ति में बाधा, कच्चे तेल-गैस की बढ़ती कीमतें और करेंसी में उतार-चढ़ाव शामिल हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, इन चुनौतियों से निपटने के लिए भारत को एक मजबूत ऊर्जा स्टोरेज नीति तैयार करनी चाहिए ताकि रणनीतिक भंडार बनाए रखे जा सकें।

पश्चिम एशिया संकट लंबा खिंचने पर नए आर्थिक दबाव बनेंगे

खबर के मुताबिक, रिपोर्ट जारी करते हुए क्रिसिल के मुख्य अर्थशास्त्री धर्मकीर्ति जोशी ने कहा कि पश्चिम एशिया संकट लंबा खिंचने पर नए आर्थिक दबाव उभर सकते हैं। उन्होंने कहा कि रुपये में कमजोरी और तेल की कीमतों में तेजी अर्थव्यवस्था के लिए “डबल झटका” है, जिससे विकास दर पर दबाव बढ़ता है। जोशी ने सुझाव दिया कि भारत को ऊर्जा, खाद्य सुरक्षा और उर्वरक क्षेत्र पर विशेष ध्यान देना चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर संकट जारी रहता है, तो सर्दियों की फसलों को उर्वरक की कमी का सामना करना पड़ सकता है, हालांकि गर्मी की फसलों के लिए स्थिति अपेक्षाकृत स्थिर है।

प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़ानी होगी

जोशी ने कहा कि भारत को हाल ही में हुए फ्री ट्रेड एग्रीमेंट्स (FTA) का लाभ उठाने के लिए अपनी प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़ानी होगी। इसके लिए व्यापक आर्थिक और संरचनात्मक सुधारों की जरूरत है। रिपोर्ट के अनुसार, पश्चिम एशिया में संघर्ष बढ़ने के बाद कच्चे तेल की कीमतों में तेज उतार-चढ़ाव देखा गया है। तेल की कीमतें एक समय चार साल के उच्च स्तर 126 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थीं, जो बाद में घटकर लगभग 97 डॉलर प्रति बैरल पर आ गईं।

कच्चे तेल की कीमतों का दिखेगा प्रभाव

महंगाई पर असर को लेकर जोशी ने कहा कि वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों का प्रभाव थोक मूल्य सूचकांक (WPI) पर ज्यादा पड़ेगा, जबकि खुदरा महंगाई (CPI) पर असर सीमित रहेगा, क्योंकि सरकार ने पेट्रोल-डीजल और घरेलू एलपीजी की कीमतें स्थिर रखी हैं। 

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