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देश की अर्थव्यवस्था अभी भी मजबूत स्थिति में, वित्त मंत्री बोलीं- फ्यूल, फर्टिलाइजर, फॉरेन करेंसी पर फोकस करने की जरूरत

 Edited By: Sunil Chaurasia
 Published : May 25, 2026 02:46 pm IST,  Updated : May 25, 2026 02:46 pm IST

वित्त मंत्री ने बताया कि डीजल और पेट्रोल पर उत्पाद शुल्क (Excise Duty) में कटौती से सरकार को 1,00,000 करोड़ रुपये के राजस्व का नुकसान होगा।

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वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण Image Source : PTI

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सोमवार को पश्चिम एशिया संकट के बीच 'फ्यूल, फर्टिलाइजर और फॉरेन करेंसी (3F) पर फोकस करने की जरूरत पर बल दिया। उन्होंने कहा कि देश की अर्थव्यवस्था लगातार मजबूत बनी हुई है। भारतीय लघु उद्योग विकास बैंक (सिडबी) के 37वें स्थापना दिवस समारोह को संबोधित करते हुए वित्त मंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ईंधन बचाने की अपीलों के बाद कुछ लोगों द्वारा निराशावादी और नकारात्मक माहौल बनाए जाने की आलोचना की और कहा कि देश में भय फैलाने की कोई गुंजाइश नहीं है और लोगों में विश्वास बनाए रखना जरूरी है। वित्त मंत्री ने कहा कि भारत की नीतिगत प्रतिक्रिया वृद्धि को बनाए रखने के लिए संतुलित तरीके से तैयार की गई है। 

उत्पाद शुल्क में कटौती से सरकार को 1,00,000 करोड़ रुपये के राजस्व का नुकसान

वित्त मंत्री ने बताया कि डीजल और पेट्रोल पर उत्पाद शुल्क (Excise Duty) में कटौती से सरकार को 1,00,000 करोड़ रुपये के राजस्व का नुकसान होगा। उन्होंने कहा कि कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के साथ-साथ खाद की कीमतें भी अकल्पनीय स्तर पर पहुंच गई हैं, जबकि सोने की ऊंची कीमतें बाहरी क्षेत्र पर कुछ चुनौतियां पैदा कर रही हैं। सीतारमण ने कहा कि ऐसे समय में फ्यूल, फर्टिलाइजर और फॉरेन करेंसी पर खास ध्यान देने की जरूरत है और प्रधानमंत्री के आह्वानों का संदर्भ भी इसी पृष्ठभूमि में है। उन्होंने कहा कि कुछ लोग स्थिति को लेकर ये दावा कर रहे हैं कि सब कुछ "बर्बाद हो रहा है", जो सही नहीं है।

सरकारी कंपनियों से एमएसएमई को समय पर भुगतान करने की अपील

निर्मला सीतारमण ने कहा, "लोगों द्वारा किए जा रहे अच्छे कामों को भुला दिया जाता है और एक निराशावादी व नकारात्मक माहौल बनाया जाता है, जो बिल्कुल सही नहीं है।" वित्त मंत्री ने कहा कि चुनौतियां मुख्य रूप से बाहरी कारणों से उत्पन्न हुई हैं, जबकि भारत की घरेलू आर्थिक स्थिति आज भी सकारात्मक और मजबूत बनी हुई है। सीतारमण ने ये भी कहा कि सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्यमों (MSME) के 8.1 लाख करोड़ रुपये के लंबित भुगतान का मामला उनकी कार्यशील पूंजी और वृद्धि को प्रभावित कर रहा है। उन्होंने सरकारी कंपनियों से कहा कि वे एमएसएमई को भुगतान करने में 45 दिन की समय-सीमा से ज्यादा देरी न करें। 

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