महाराष्ट्र राज्य सड़क परिवहन निगम यानी MSRTC को पिछले वित्त वर्ष में हर दिन औसतन 1.60 करोड़ रुपये का घाटा झेलना पड़ा। यह खुलासा बुधवार को जारी आधिकारिक बयान में हुआ, जिसने राज्य के सार्वजनिक परिवहन तंत्र की वित्तीय स्थिति पर सवाल खड़े कर दिए हैं। पीटीआई की खबर के मुताबिक, देश के सबसे बड़े सरकारी परिवहन निगमों में शामिल MSRTC के पास 15,000 से ज्यादा बसों का बेड़ा और करीब 90,000 कर्मचारी हैं।
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MSRTC की दैनिक आय करीब 31.40 करोड़ रुपये
महाराष्ट्र राज्य सड़क परिवहन निगम रोजाना 55 लाख से अधिक यात्रियों को सेवाएं देता है, लेकिन इसके बावजूद आय और खर्च के बीच का अंतर लगातार बढ़ रहा है। निगम की दैनिक आय करीब 31.40 करोड़ रुपये है, जबकि खर्च लगभग 33 करोड़ रुपये तक पहुंच जाता है। यही वजह है कि हर दिन करोड़ों का घाटा दर्ज हो रहा है। पूरे वित्त वर्ष 2025-26 की बात करें तो कुल खर्च 12,066 करोड़ रुपये रहा, जबकि आय 11,475 करोड़ रुपये ही रही, जिससे सालाना घाटा 591 करोड़ रुपये तक पहुंच गया।
ठोस और व्यापक कदम उठाने के निर्देश
इस स्थिति को गंभीर मानते हुए महाराष्ट्र के परिवहन मंत्री और MSRTC के अध्यक्ष प्रताप सरनाइक ने अधिकारियों को नुकसान कम करने के लिए ठोस और व्यापक कदम उठाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने चिंता जताई कि निगम की 31 डिवीजनों में से केवल 8- जालना, परभणी, बुलढाणा, भंडारा, गढ़चिरौली, अकोला, धुले और वर्धा—ही मुनाफे में हैं।
मंत्री ने साफ कहा कि आने वाले वित्त वर्ष में बेहतर योजना और प्रबंधन के जरिए बसों और मानव संसाधनों का अधिक प्रभावी उपयोग करना होगा। उनका लक्ष्य है कि रोजाना हो रहे 1.5 से 2 करोड़ रुपये के नुकसान को जल्द से जल्द कम किया जाए, ताकि निगम को वित्तीय रूप से मजबूत बनाया जा सके।