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मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन की सबसे बड़ी चुनौती पार, पालघर में पहाड़ के आर-पार पहुंची सुरंग

भारत की पहली बुलेट ट्रेन परियोजना ने एक और ऐतिहासिक मुकाम हासिल कर लिया है। मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर में महाराष्ट्र के पालघर जिले में पहाड़ी सुरंग (माउंटेन टनल-5) का सफल ब्रेकथ्रू पूरा कर लिया गया है।

Edited By: Shivendra Singh
Published : Jan 02, 2026 01:10 pm IST, Updated : Jan 02, 2026 01:12 pm IST
बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट...- India TV Paisa
Photo:ANI बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट में ऐतिहासिक पल

भारत के पहली बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट ने एक और ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल कर ली है। मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर में महाराष्ट्र के पालघर जिले में पहली पहाड़ी सुरंग का सफल ब्रेकथ्रू हो गया है। इसे इस मेगा प्रोजेक्ट की अब तक की सबसे बड़ी इंजीनियरिंग चुनौतियों में से एक माना जा रहा है। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने शुक्रवार को इस उपलब्धि की जानकारी देते हुए इसे बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट के लिए मील का पत्थर बताया।

रेल मंत्री के मुताबिक, यह माउंटेन टनल-5 (MT-5) पूरे प्रोजेक्ट में बनने वाली सात पहाड़ी सुरंगों में सबसे लंबी और पहली है, जिसकी लंबाई लगभग 1.48 किलोमीटर है। यह सुरंग पालघर जिले में स्थित है और पहाड़ों के कठिन भूगर्भीय ढांचे को पार करते हुए बनाई गई है। इस सफलता से महाराष्ट्र में बुलेट ट्रेन कॉरिडोर के निर्माण को बड़ी गति मिलने की उम्मीद है।

परियोजना का विस्तार

मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना की कुल लंबाई 508 किलोमीटर है, जिसमें करीब 27.4 किलोमीटर का हिस्सा सुरंगों से होकर गुजरेगा। इनमें से 21 किलोमीटर भूमिगत और 6.4 किलोमीटर सतही सुरंगें शामिल हैं। परियोजना में कुल आठ पहाड़ी सुरंगें बनाई जा रही हैं, जिनमें से सात महाराष्ट्र में और एक गुजरात में स्थित है।

तकनीकी चुनौतीपूर्ण सुरंग

इससे पहले, सितंबर 2025 में ठाणे से बांद्रा-कुर्ला कॉम्प्लेक्स (BKC) के बीच करीब 5 किलोमीटर लंबी पहली अंडरग्राउंड सुरंग पूरी की जा चुकी है। पालघर की यह सुरंग तकनीकी दृष्टि से बेहद चुनौतीपूर्ण मानी जा रही थी, क्योंकि इसमें पहाड़ी इलाके, कठोर चट्टानें और सुरक्षा मानकों का विशेष ध्यान रखा गया।

स्टेशन और डिपो योजना

रेल मंत्री ने यह भी बताया कि परियोजना में कुल 12 स्टेशन होंगे, जिनमें मुंबई का टर्मिनल BKC और अहमदाबाद का टर्मिनल साबरमती होगा। इसके अलावा, तीन डिपो बनाए जा रहे हैं, जबकि सामान्य तौर पर इतनी लंबी परियोजना में दो डिपो पर्याप्त होते हैं। देरी और अनुमति संबंधी समस्याओं के कारण अतिरिक्त व्यवस्थाएं करनी पड़ीं।

अत्याधुनिक कॉरिडोर निर्माण

पूरा बुलेट ट्रेन कॉरिडोर अत्याधुनिक तकनीक से तैयार किया जा रहा है, जिसमें करीब 85 प्रतिशत हिस्सा वायडक्ट पर आधारित है। अब तक 326 किलोमीटर वायडक्ट का निर्माण पूरा हो चुका है। परियोजना पूरी होने के बाद मुंबई से अहमदाबाद की दूरी महज दो घंटे में तय की जा सकेगी।

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