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अब रेलवे पार्सल खोजने के लिए नहीं जाना होगा स्टेशन! घर बैठे मिलेगा लाइव स्टेटस, जानिए कैसे?

 Written By: Shivendra Singh
 Published : Jun 26, 2026 02:35 pm IST,  Updated : Jun 26, 2026 02:35 pm IST

अगर आप ट्रेन से पार्सल भेजते हैं और हर बार यह जानने के लिए स्टेशन या पार्सल कार्यालय के चक्कर लगाते हैं कि आपका सामान कहां तक पहुंचा है, तो जल्द ही यह परेशानी खत्म हो सकती है। भारतीय रेलवे पार्सल सेवा को पूरी तरह आधुनिक और डिजिटल बनाने की तैयारी कर रहा है।

घर बैठे मिलेगा रेलवे...- India TV Hindi
घर बैठे मिलेगा रेलवे पार्सल का लाइव स्टेटस Image Source : PTI/CANVA

भारतीय रेलवे (Indian Railways) से सफर करने वाले यात्रियों के साथ-साथ अब अपना सामान या व्यावसायिक माल पार्सल के जरिए भेजने वाले लोगों के लिए एक खुशखबरी आई है। अभी तक रेलवे से पार्सल बुक करने के बाद सामान समय पर पहुंचा या नहीं, यह जानने के लिए ग्राहकों को बार-बार रेलवे स्टेशन के चक्कर काटने पड़ते थे। लेकिन अब ऐसा नहीं होगा। रेलवे प्रशासन अपने पूरे पार्सल सिस्टम का कायाकल्प करने जा रहा है, जिससे आप घर बैठे ही अपने स्मार्टफोन पर पार्सल की पल-पल की लाइव लोकेशन और स्टेटस ट्रैक कर सकेंगे।

दरअसल, रेलवे पार्सल बुकिंग सेवा को आधुनिक, डिजिटल और आसान बनाने के लिए रेलवे बोर्ड ने एक देशव्यापी अध्ययन कराया है। इस विशेष अध्ययन दल ने दिल्ली के तीन सबसे बड़े पार्सल कार्यालयों नई दिल्ली, हजरत निजामुद्दीन और आनंद विहार रेलवे स्टेशन का दौरा किया। टीम ने वहां जमीनी स्तर पर ग्राहकों को होने वाली व्यावहारिक समस्याओं को चिह्नित किया और रेलवे बोर्ड को एक विस्तृत रिपोर्ट सौंपी है। इस रिपोर्ट का मुख्य उद्देश्य रेलवे पार्सल सेवाओं को पूरी तरह डिजिटल करना और इससे रेलवे के राजस्व को बढ़ाना है।

वर्तमान पार्सल सिस्टम में कमियां और ग्राहकों की परेशानियां

  • दूरी और अव्यवस्था: कई स्टेशनों पर पार्सल बुकिंग काउंटर और सामान रखने का हैंडलिंग एरिया एक-दूसरे से काफी दूर हैं। ग्राहकों को पहले एक जगह कागजी कार्रवाई पूरी करनी होती है और फिर सामान लेकर दूसरी जगह जाना पड़ता है।
  • गलत पते पर सामान जाना: डिजिटल ट्रैकिंग और सटीक लेबलिंग न होने की वजह से कई बार पार्सल गलत स्टेशनों पर पहुंच जाते हैं।
  • अपडेट का न होना: वर्तमान सिस्टम में ग्राहकों को एसएमएस (SMS), ईमेल या ऐप के जरिए बुकिंग या डिलीवरी की कोई ऑटोमेटिक जानकारी नहीं मिलती है।
  • पुराने तोल मशीनें: छोटे स्टेशनों पर वजन और नाप साधारण मशीनों से होता है, जिससे गलती की आशंका रहती है। साथ ही सीसीटीवी (CCTV) कैमरों की कमी के कारण चोरी या नुकसान के दावों को सुलझाने में दिक्कत आती है।

अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस होंगे नए पार्सल केंद्र

रेलवे बोर्ड के इस नए मास्टर प्लान के तहत पार्सल केंद्रों को हाईटेक बनाने के लिए निम्नलिखित बदलाव किए जाएंगे:

  • आरएफआईडी (RFID) और सॉफ्टवेयर ट्रैकिंग: सभी पार्सल की स्कैनिंग आरएफआईडी तकनीक से होगी, जिससे ग्राहक एक ही ऐप के जरिए अपने पार्सल को लाइव ट्रैक कर सकेंगे।
  • पीएमएस ऐप का अपग्रेड: रेलवे के पार्सल मैनेजमेंट सिस्टम (PMS) ऐप की क्षमताओं को बढ़ाया जाएगा ताकि बुकिंग और ट्रैकिंग बेहद स्मूथ हो सके।
  • शटल सर्विस और एडवांस्ड वेयरहाउसिंग: प्लेटफॉर्म तक सामान पहुंचाने के लिए बैटरी चालित कार्ट या छोटी वैन का इस्तेमाल होगा। साथ ही आधुनिक वेयरहाउसिंग और मशीनीकृत हैंडलिंग सिस्टम लागू किया जाएगा।
  • तापमान कंट्रोल स्टोरेज: खराब होने वाले उत्पादों (जैसे फल, सब्जियां या दवाइयां) को सुरक्षित रखने के लिए तापमान कंट्रोल स्टोरेज की व्यवस्था होगी।
  • सुरक्षा के लिए सीसीटीवी: चोरी रोकने और पारदर्शिता बनाए रखने के लिए पूरे परिसर में सीसीटीवी कैमरों का जाल बिछाया जाएगा।

घर बैठे लाइव स्टेटस चेक करने का आसान तरीका

  • सबसे पहले आपको भारतीय रेलवे के पार्सल पोर्टल या रेलवे के आधिकारिक ऐप पर जाना होगा।
  • होमपेज पर आपको 'ट्रैक पार्सल' या 'लॉजिस्टिक्स लाइव स्टेटस' का विकल्प दिखाई देगा।
  • बुकिंग के समय मिले रसीद नंबर या पीआरएन (Parcel Receipt Number) को बॉक्स में डालें।
  • कैप्चा कोड भरकर सबमिट करते ही आपके पार्सल की पूरी जर्नी, मौजूदा स्टेशन और पहुंचने का संभावित समय (ETA) स्क्रीन पर आ जाएगा।

SMS के जरिए भी मिलेगा अलर्ट

स्मार्टफोन या इंटरनेट न होने की स्थिति में भी घबराने की जरूरत नहीं है। रेलवे ने एसएमएस अलर्ट सेवा भी शुरू करने का निर्णय लिया है। पार्सल बुक होते ही, गाड़ी में लोड होते ही और अंतिम स्टेशन पर पहुंचते ही आपके रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर तुरंत एक मैसेज आ जाएगा। इससे देश के छोटे व्यापारियों, किसानों और आम जनता को अपने लॉजिस्टिक्स का प्रबंधन करने में अभूतपूर्व मदद मिलेगी। रेलवे का यह डिजिटल कदम निश्चित रूप से देश के ट्रांसपोर्टेशन और लॉजिस्टिक्स सेक्टर के लिए एक गेम-चेंजर साबित होगा।

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