शेयर बाजार में नियमों का उल्लंघन करने वालों के लिए भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ने सेटलमेंट प्रक्रिया में बड़ा बदलाव किया है। नए नियमों के तहत अब ₹10 लाख तक की सेटलमेंट रकम वाले मामलों का तेजी से निपटारा किया जा सकेगा। इसके साथ ही सेटलमेंट की रकम तय करने का फॉर्मूला भी बदल दिया गया है। नए नियमों का मकसद प्रक्रिया को आसान, पारदर्शी और अनुमान के मुताबिक बनाना है, ताकि छोटे मामलों में अनावश्यक देरी न हो। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि नियम तोड़ने वालों को राहत देकर छोड़ दिया जाएगा। सेटलमेंट के साथ जरूरी नियामकीय शर्तें और गलत कमाई की वसूली भी लागू हो सकती है।
SEBI की 6 अक्टूबर की अधिसूचना के मुताबिक, नए सेटलमेंट फ्रेमवर्क में रकम तय करने के लिए एक आधार राशि निर्धारित की जाएगी। यह राशि संबंधित उल्लंघन के लिए प्रतिभूति कानूनों के तहत तय न्यूनतम जुर्माने से जुड़ी होगी। इसके बाद मामले की स्थिति, पहले की गई नियामकीय कार्रवाई, उल्लंघन की गंभीरता, मामले को बढ़ाने वाले या राहत देने वाले कारकों और कानूनी खर्चों को ध्यान में रखकर राशि में बदलाव किया जाएगा। इससे अलग-अलग मामलों में सेटलमेंट की रकम तय करने की प्रक्रिया अधिक स्पष्ट और अनुमानित बनाने में मदद मिलेगी।
गलत कमाई और निवेशकों के नुकसान की होगी अलग गणना
नए नियमों का एक अहम बदलाव यह है कि गलत तरीके से कमाए गए पैसे, नुकसान से बचाई गई रकम या निवेशकों को हुए नुकसान को आधार राशि में शामिल नहीं किया जाएगा। यदि इन रकमों की गणना संभव है, तो उनकी वसूली अलग से की जाएगी। इससे पहले सेटलमेंट की गणना में ऐसी रकम शामिल होने से दोहरी गणना की स्थिति बन सकती थी। नए ढांचे में सेटलमेंट राशि, गलत कमाई की वापसी और सुधारात्मक व नियामकीय शर्तों को अलग-अलग रखा गया है। पहले गैर-मौद्रिक शर्तों के रूप में जानी जाने वाली व्यवस्था को अब रेमेडियल एंड रेगुलेटरी टर्म्स (RRT) कहा गया है।
₹10 लाख तक के मामलों में फास्ट-ट्रैक सुविधा
SEBI ने फास्ट-ट्रैक सेटलमेंट के दो रास्ते शुरू किए हैं। पहला, रकम की सीमा पर आधारित और दूसरा, उल्लंघन के प्रकार पर आधारित। रकम पर आधारित व्यवस्था के तहत ₹10 लाख तक की सेटलमेंट राशि वाले मामले आंतरिक समिति से सीधे पूर्णकालिक सदस्यों के पैनल के पास भेजे जाएंगे। उल्लंघन आधारित व्यवस्था में SEBI संबंधित इकाई को नोटिस देकर निर्धारित राशि चुकाकर मामला निपटाने का अवसर देगा। भुगतान के बाद सदस्यों का पैनल सेटलमेंट आदेश जारी करेगा।
वित्तीय गड़बड़ी वाले मामलों पर भी लागू हो सकते हैं नियम
नए नियमों के तहत वित्तीय विवरणों में गलत जानकारी देने या फंड के दुरुपयोग से जुड़े मामलों का भी सेटलमेंट संभव होगा, बशर्ते जरूरी सुधारात्मक कदम उठाए जाएं। इनमें उचित खुलासे करना और गलत तरीके से हटाए गए फंड को वापस लाना शामिल हो सकता है।
इनपुट- PTI
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