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दिल्ली सरकार की बिजली सब्सिडी योजना में मिली कई खामियां, CAG ने की डेटा की नियमित जांच की सिफारिश

 Written By: Sunil Chaurasia
 Published : Aug 08, 2026 09:46 am IST,  Updated : Aug 08, 2026 09:46 am IST

कैग रिपोर्ट में बताया गया है कि 0 से 200 यूनिट तक खपत वाले 30 लाख से ज्यादा उपभोक्ताओं को औसतन 6,000 रुपये की सालाना सब्सिडी मिली।

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बिजली मीटर (सांकेतिक तस्वीर) Image Source : PIXABAY

नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) ने 2019-20 से 2022-23 के बीच दिल्ली सरकार की बिजली सब्सिडी योजना में कई खामियां उजागर कीं। कैग ने कहा कि योजना के तहत, बिना बिजली खपत वाले कनेक्शनों को भी 42.26 करोड़ रुपये की सब्सिडी दी गई। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने शुक्रवार को विधानसभा में कैग की रिपोर्ट पेश की। रिपोर्ट के मुताबिक, कम बिजली खपत वाले उपभोक्ताओं को कम सब्सिडी मिली, जबकि ज्यादा खपत करने वाले उपभोक्ताओं को कहीं ज्यादा सब्सिडी का लाभ मिला। 

ज्यादा खपत वाले उपभोक्ताओं को मिली 70 प्रतिशत ज्यादा सब्सिडी

कैग रिपोर्ट में बताया गया है कि 0 से 200 यूनिट तक खपत वाले 30 लाख से ज्यादा उपभोक्ताओं को औसतन 6,000 रुपये की सालाना सब्सिडी मिली। जबकि, 201-400 यूनिट खपत करने वाले 16.6 लाख उपभोक्ताओं को 10,000 रुपये से भी ज्यादा यानी करीब 70 प्रतिशत ज्यादा सब्सिडी दी गई। इस तरह ज्यादा बिजली खपत करने वाले उपभोक्ताओं को तुलनात्मक रूप से ज्यादा फायदा मिला।

अगस्त 2019 में शुरू हुई थी बिजली सब्सिडी योजना

बिजली पर दी जाने वाली सब्सिडी का फायदा सिर्फ जरूरतमंदों और वंचितों ने ही नहीं बल्कि लगभग पूरे घरेलू उपभोक्ता वर्ग ने उठाया। रिपोर्ट में ये भी सामने आया कि कई उपभोक्ताओं ने लगातार कई बिलिंग साइकिल तक जीरो खपत के बावजूद सब्सिडी का लाभ लिया। बताते चलें कि दिल्ली सरकार ने अगस्त 2019 में ये योजना शुरू की थी, जिसमें 200 यूनिट तक बिजली फ्री और 201-400 यूनिट पर 50 प्रतिशत सब्सिडी (अधिकतम 800 रुपये) दी जाती है। 

बिजली पर सब्सिडी का खर्च बढ़ा

बिजली पर सब्सिडी का खर्च 2019-20 के 2,405.59 करोड़ रुपये से बढ़कर 2022-23 में 3,161 करोड़ रुपये हो गया। कैग ने अपनी रिपोर्ट में ट्रांसपैरेंट सिस्टम डेवलप करने और उपभोक्ता डेटा की नियमित जांच की सिफारिश की है, ताकि सब्सिडी सही लोगों तक पहुंचे और इसके गलत इस्तेमाल को रोका जा सके। 

बापरोला में 17 साल तक नहीं इस्तेमाल हुई 81.42 एकड़ जमीन

इसके साथ ही कैग ने दिल्ली राज्य औद्योगिक एवं अवसंरचना विकास निगम (DSIIDC) की बापरोला में मौजूद 81.42 एकड़ जमीन 17 साल तक इस्तेमाल में नहीं लाए जाने पर भी सवाल उठाए हैं। कैग रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2006 में 'जेम्स एंड ज्वेलरी पार्क' के लिए ली गई जमीन पर बार-बार योजना बदलने से 29.45 करोड़ रुपये का खर्च बेकार गया। 

PTI Inputs

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