क्या भारत समेत दुनिया के बड़े देशों में अमीरों का भरोसा डगमगा रहा है? एक नई रिपोर्ट ने चौंकाने वाला खुलासा किया है। पिछले साल दुनियाभर में करीब 1.42 लाख हाई-नेटवर्थ इंडिविजुअल्स (HNWIs) ने अपना देश छोड़कर दूसरे देशों में बसने का फैसला किया। इस लिस्ट में भारत भी टॉप तीन देशों में शामिल है, जहां से बड़ी संख्या में करोड़पतियों ने पलायन किया।
रिपोर्ट के मुताबिक अमीरों के पलायन में पहले नंबर पर ब्रिटेन रहा। पिछले साल वहां से 16,500 रईसों ने देश छोड़ा। इससे पहले 2024 में भी 10,800 अमीर ब्रिटेन को अलविदा कह चुके थे। करीब एक दशक से कमजोर आर्थिक प्रदर्शन और बढ़ते टैक्स बोझ को इसकी बड़ी वजह माना जा रहा है। दूसरे नंबर पर चीन रहा, जहां से 7,800 अमीरों ने दूसरे देशों का रुख किया। भारत इस लिस्ट में तीसरे स्थान पर है। पिछले साल भारत से 3,500 करोड़पतियों ने विदेशों में बसने का फैसला किया। इसके अलावा साउथ कोरिया, रूस और ब्राजील जैसे देशों से भी बड़ी संख्या में अमीरों ने पलायन किया।
अमीरों को क्यों भा रहे दूसरे देश?
रिपोर्ट बताती है कि टैक्स नीतियां, राजनीतिक स्थिरता, लाइफस्टाइल और बिजनेस के अनुकूल माहौल जैसे कारण अमीरों के फैसले को प्रभावित कर रहे हैं। खासकर हाई टैक्स और सख्त नियमों से परेशान रईस ऐसे देशों की तलाश में हैं जहां उन्हें ज्यादा राहत और सुरक्षा मिले।
किसे हुआ सबसे ज्यादा फायदा?
इस पलायन से सबसे बड़ा फायदा यूनाइटेड अरब अमीरात (यूएई) को हुआ। वहां जीरो इनकम टैक्स की नीति के चलते पिछले साल 9,800 अमीरों ने यूएई को अपना नया ठिकाना बनाया। दूसरे नंबर पर अमेरिका रहा, जहां 7,500 अमीरों ने बसना पसंद किया। इसके अलावा इटली, स्विट्जरलैंड, सऊदी अरब और सिंगापुर जैसे देशों ने भी बड़ी संख्या में धनकुबेरों को आकर्षित किया।
क्या है बड़ा संकेत?
विशेषज्ञों का मानना है कि अमीरों का पलायन सिर्फ टैक्स से जुड़ा मसला नहीं है, बल्कि यह किसी देश की आर्थिक सेहत और निवेश माहौल का संकेत भी देता है। भारत में भले ही 3,500 रईसों ने देश छोड़ा हो, लेकिन तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था और स्टार्टअप इकोसिस्टम अभी भी वैश्विक निवेशकों को आकर्षित कर रहा है।



































