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FPIs ने अगस्त में किया ₹16,621 करोड़ का निवेश, लगातार दूसरे महीने भारतीय बाजार में पैसा लगा रहे हैं विदेशी निवेशक

 Written By: Sunil Chaurasia
 Published : Aug 16, 2026 01:00 pm IST,  Updated : Aug 16, 2026 01:00 pm IST

मनीष भंडारी ने कहा कि निवेशक दक्षिण कोरिया और ताइवान के अत्यधिक लोकप्रिय एआई शेयरों से कुछ पूंजी भारत की ओर भी मोड़ रहे हैं।

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अगस्त में भी जारी है FPIs का निवेश Image Source : PIXABAY

भारतीय शेयर बाजार में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) की खरीदारी का सिलसिला अगस्त में लगातार दूसरी महीने भी जारी है। विदेशी निवेशक अगस्त महीने में अब तक भारतीय शेयरों में 16,621 करोड़ रुपये का निवेश कर चुके हैं। बेहतर वैल्यूएशन, कंपनियों के मजबूत वित्तीय नतीजों और अमेरिका में ब्याज दरों में नरमी की उम्मीद ने निवेशकों के रुख को सकारात्मक बनाने में अहम भूमिका निभाई है। 

विदेशी निवेशकों ने जुलाई में भी किया था निवेश

इससे पहले जुलाई में भी एफपीआई ने भारतीय शेयर बाजार में 20,200 करोड़ रुपये का निवेश किया था। इस तरह लगातार दो महीनों की खरीदारी ने 4 महीने तक चले भारी बिकवाली के रुख को पलट दिया है। इस साल विदेशी निवेशकों ने मार्च में 1.17 लाख करोड़ रुपये, अप्रैल में 60,847 करोड़ रुपये, मई में 32,963 करोड़ रुपये और जून में 49,340 करोड़ रुपये की बिकवाली की थी। इससे पहले फरवरी में उन्होंने 22,615 करोड़ रुपये का निवेश किया था। 

इस साल घरेलू बाजार से 2.4 लाख करोड़ रुपये की हो चुकी है निकासी

बताते चलें कि इस साल एफपीआई शुद्ध बिकवाल बने हुए हैं। जुलाई और अगस्त की खरीदारी के बावजूद, इस साल अब तक उनकी कुल निकासी लगभग 2.4 लाख करोड़ रुपये के आसपास बनी हुई है, जो पूरे 2025 में हुई 1.66 लाख करोड़ रुपये की निकासी से भी काफी ज्यादा है। 

किन वजहों से आकर्षण का केंद्र बना घरेलू बाजार

मार्केट एक्सपर्ट्स के अनुसार, भारत के अपेक्षाकृत आकर्षक मूल्यांकन, कंपनियों के मजबूत नतीजों, अमेरिका में संभावित ब्याज दर कटौती, कच्चे तेल की नरम कीमतों और रुपये में कम उतार-चढ़ाव ने विदेशी निवेशकों का भरोसा बढ़ाया है। वल्लम कैपिटल के सीईओ और पोर्टफोलियो मैनेजर मनीष भंडारी ने कहा कि भारत की शानदार वैल्यूएशन, मजबूत कॉरपोरेट इनकम, अमेरिका में नरम ब्याज दरों की उम्मीद और करेंसी मार्केट में स्थिरता विदेशी निवेश को आकर्षित करने वाले प्रमुख कारण हैं।'' 

एआई शेयरों से कुछ पूंजी निकालकर भारत में निवेश कर रहे FPIs

मनीष भंडारी ने कहा कि निवेशक दक्षिण कोरिया और ताइवान के अत्यधिक लोकप्रिय एआई शेयरों से कुछ पूंजी भारत की ओर भी मोड़ रहे हैं। 'ट्रैक' के को-फाउंडर और सीईओ वेदांत गुप्ते के मुताबिक, अगस्त में एफपीआई की खरीदारी से संकेत मिलता है कि पहले की बिकवाली मुख्य रूप से वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों से प्रेरित थी, न कि भारत को लेकर किसी बड़ी चिंता के कारण। उन्होंने कहा कि अमेरिका में ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद, कच्चे तेल की नरम कीमतें और रुपये में स्थिरता ने विदेशी निवेशकों के लिए भारत से दूरी बनाए रखने के तीन प्रमुख कारणों को काफी हद तक कम कर दिया है। 

आने वाले दिनों में कैसा रहेगा निवेशकों मूड

हालांकि, आने वाले दिनों में विदेशी निवेशकों का रुख वैश्विक संकेतकों पर निर्भर रहेगा। अमेरिकी बॉन्ड पर प्रतिफल, डॉलर सूचकांक, कच्चे तेल की कीमतें और कंपनियों के आमदनी के अनुमान में बदलाव एफपीआई प्रवाह को प्रभावित कर सकते हैं।

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