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Gold Price: सोने की कीमत में हो गया ये उलटफेर, MCX पर प्रति 10 ग्राम का ये रहा भाव, जानें चांदी का हाल

 Published : Sep 16, 2025 10:28 am IST,  Updated : Sep 16, 2025 10:31 am IST

बुधवार को होने वाली फेडरल रिजर्व की बैठक में अगर ब्याज दरों में कटौती होती है तो सोने की कीमतों को और समर्थन मिल सकता है। हालांकि फेड के लिए फैसला लेना आसान नहीं होगा।

विदेशी निवेशकों के लिए सोने की खरीद आकर्षक हो गई है।- India TV Hindi
विदेशी निवेशकों के लिए सोने की खरीद आकर्षक हो गई है। Image Source : FREEPIK

घरेलू वायदा बाजार, मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) में मंगलवार सुबह सोने और चांदी की कीमतों में मामूली तेजी दर्ज की गई। डॉलर में आई कमजोरी और फेड द्वारा ब्याज दरों में कटौती की संभावना ने दोनों कीमती धातुओं को सहारा दिया। कीमतों में यह बदलाव अमेरिकी फेडरल रिज़र्व की आगामी मौद्रिक नीति बैठक से पहले देखने को मिली। लाइवमिंट के मुताबिक, सुबह 9:50 बजे, एमसीएक्स पर अक्टूबर वायदा सोना ₹1,10,229 प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया, जिसमें 0.05% की बढ़त हुई। वहीं, दिसंबर वायदा चांदी ₹1,29,630 प्रति किलोग्राम पर कारोबार कर रही थी, जिसमें 0.16% का उछाल देखा गया।

बाजार की निगाहें फेड की बैठक पर

निवेशकों की नजर अब बुधवार को होने वाली फेडरल रिजर्व की बैठक पर है। बाजार में इस बात की उम्मीद है कि फेड संभवतः ब्याज दरों में 25 बेसिस पॉइंट (0.25%) की कटौती कर सकता है। ऐसा होने पर सोने की कीमतों को और समर्थन मिल सकता है, क्योंकि कम ब्याज दरें डॉलर को कमजोर करती हैं, जिससे सोना दूसरी करेंसी धारकों के लिए सस्ता हो जाता है। सोने की कीमतों में आई तेजी की एक बड़ी वजह डॉलर इंडेक्स में आई 0.10% की गिरावट भी है, जिसने विदेशी निवेशकों के लिए सोने की खरीद को आकर्षक बना दिया है।

फेड के लिए दोहरी चुनौती

फेड के लिए फैसला लेना आसान नहीं होगा, क्योंकि हाल ही में जारी किए गए अमेरिकी जॉब मार्केट के संशोधित आंकड़े काफी कमजोर रहे हैं, क्योंकि मार्च तक के 12 महीनों में अमेरिका में अनुमान से 9.11 लाख कम नौकरियां पैदा हुईं। अगस्त में बेरोजगारी दर बढ़कर 4.3% हो गई, जबकि जुलाई में यह 4.2% थी। जॉब ग्रोथ भी जुलाई के 79,000 से गिरकर अगस्त में सिर्फ 22,000 रह गई।

हालांकि, जॉब मार्केट में सुस्ती के बावजूद अमेरिका में महंगाई अब भी एक बड़ी चुनौती है। अगस्त में अमेरिकी उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) बढ़कर 2.9% हो गया, जो जनवरी 2025 के बाद सबसे अधिक है और फेड के 2% के लक्ष्य से काफी ऊपर है। एक्सपर्ट का कहना है कि महंगाई के उच्च स्तर को देखते हुए फेड द्वारा 0.50% की बड़ी दर कटौती की संभावना फिलहाल कम है। बुधवार को फेड के फैसले पर सबकी निगाहें टिकी रहेंगी।

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