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1 घंटे के अंदर ₹5,80,000 करोड़ बर्बाद, भयावह गिरावट के बीच 22,300 के नीचे पहुंचा निफ्टी

 Written By: Sunil Chaurasia
 Published : Feb 28, 2025 10:21 am IST,  Updated : Feb 28, 2025 10:21 am IST

शुक्रवार को, शुरुआती कारोबार में बीएसई पर लिस्ट कंपनियों का कुल मार्केट कैप 5.8 लाख करोड़ रुपये की गिरावट के साथ 387.3 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गया। आज निफ्टी आईटी इंडेक्स के शेयरों में 4% तक की भारी-भरकम गिरावट देखने को मिली। पर्सिस्टेंट सिस्टम्स, टेक महिंद्रा सबसे ज्यादा गिरने वाले शेयर रहे।

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1 घंटे के अंदर शेयर बाजार निवेशकों के 5.8 लाख करोड़ रुपये स्वाहा Image Source : AP

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ पॉलिसी और जीडीपी आंकड़ों से जुड़ी चिंताओं के बीच आज भारतीय शेयर बाजार में हाहाकार मच गया। शुक्रवार को लाल निशान में खुलने के बाद बाजार में बिकवाली हावी हो गई। जहां एक तरफ सेंसेक्स 900 अंक तक गिर गया, वहीं दूसरी ओर निफ्टी 50 भी शुरुआती कारोबार में 22,300 अंकों के नीचे पहुंच गया। आज सुबह 9.39 बजे के आसपास बीएसई सेंसेक्स 929 अंकों (1.25 प्रतिशत) की गिरावट के साथ 73,683 अंकों तक पहुंच गया और निफ्टी 273 अंक (1.21%) गिरकर 22,271 पर आ गया। फरवरी के आखिरी दिन, शुरुआती कारोबार के दौरान इस गिरावट की वजह से शेयर बाजार निवेशकों के करीब 5.8 लाख करोड़ रुपये डूब गए। 

1 घंटे के अंदर शेयर बाजार निवेशकों के 5.8 लाख करोड़ रुपये स्वाहा

शुक्रवार को, शुरुआती कारोबार में बीएसई पर लिस्ट कंपनियों का कुल मार्केट कैप 5.8 लाख करोड़ रुपये की गिरावट के साथ 387.3 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गया। आज निफ्टी आईटी इंडेक्स के शेयरों में 4% तक की भारी-भरकम गिरावट देखने को मिली। पर्सिस्टेंट सिस्टम्स, टेक महिंद्रा सबसे ज्यादा गिरने वाले शेयर रहे। इस बीच, निफ्टी ऑटो इंडेक्स 2% से ज्यादा की गिरावट के साथ खुला, जबकि निफ्टी बैंक, मेटल, फार्मा, कंज्यूमर ड्यूरेबल्स और ऑयल एंड गैस इंडेक्स में भी 1 से 2% तक की गिरावट दर्ज की गई।

मजबूत हो रहे डॉलर ने बढ़ाई भारत जैसे तमाम बाजारों की चिंता

डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ पॉलिसी के बीच ट्रेड वॉर की बढ़ती चिंताओं के कारण अमेरिकी डॉलर दुनिया की प्रमुख करेंसी के मुकाबले कई हफ्तों के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया है। 6 प्रमुख करेंसी के मुकाबले डॉलर का मूल्यांकन करने वाला अमेरिकी डॉलर इंडेक्स शुक्रवार को बढ़कर 107.35 पर पहुंच गया। बताते चलें कि भारत जैसे उभरते बाजारों के लिए डॉलर का मजबूत होना अच्छा नहीं है, क्योंकि डॉलर के मजबूत होने से विदेशी निवेश काफी महंगा हो जाता है और इक्विटी से पूंजी का जबरदस्त आउटफ्लो होने लगता है।

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