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स्टॉक मार्केट में चौतरफा बिकवाली! सेंसेक्स 300 अंक लुढ़का, निफ्टी 23,800 के नीचे बंद; आखिर किस वजह से गिरा बाजार?

 Written By: Shivendra Singh
 Published : Jul 24, 2026 03:58 pm IST,  Updated : Jul 24, 2026 03:58 pm IST

शेयर बाजार में गिरावट का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। शुक्रवार को लगातार पांचवें कारोबारी सत्र में बाजार लाल निशान में बंद हुआ। सेंसेक्स 300 से ज्यादा अंक टूट गया, जबकि निफ्टी 23,800 के अहम स्तर से नीचे फिसल गया।

सेंसेक्स-निफ्टी गिरकर...- India TV Hindi
सेंसेक्स-निफ्टी गिरकर बंद हुए Image Source : CANVA

भारतीय शेयर बाजार में शुक्रवार को लगातार पांचवें कारोबारी दिन गिरावट देखने को मिली। पूरे दिन बिकवाली का दबाव बना रहा और कारोबार खत्म होने तक सेंसेक्स 332 अंक टूटकर 76,059.77 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 102 अंक फिसलकर 23,767.45 के स्तर पर आ गया। बढ़ती कच्चे तेल की कीमतें, अमेरिका-ईरान तनाव और विदेशी निवेशकों की चिंता ने निवेशकों का भरोसा कमजोर कर दिया है। इसका असर बड़े शेयरों से लेकर मिडकैप और स्मॉलकैप तक सभी वर्गों में देखने को मिला।

शुक्रवार को सेंसेक्स में 0.43 फीसदी और निफ्टी में भी 0.43 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 0.10 फीसदी और स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 0.32 फीसदी कमजोर होकर बंद हुए। पूरे सप्ताह की बात करें तो सेंसेक्स करीब 2,100 अंक टूट चुका है, जबकि निफ्टी में करीब 2.3 फीसदी की गिरावट आई।

इन शेयरों में सबसे ज्यादा बिकवाली

निफ्टी के 50 शेयरों में से 36 लाल निशान में बंद हुए। Eternal, बजाज फाइनेंस और महिंद्रा एंड महिंद्रा सबसे ज्यादा गिरने वाले शेयरों में शामिल रहे। वहीं HCL टेक, सिप्ला और विप्रो ने मजबूती दिखाई और बढ़त के साथ कारोबार समाप्त किया।

इन सेक्टरों पर सबसे ज्यादा दबाव

सेक्टोरल इंडेक्स की बात करें तो निफ्टी ऑटो में सबसे ज्यादा 1.10 फीसदी की गिरावट रही। इसके अलावा मेटल, रियल्टी और ऑयल एंड गैस सेक्टर भी दबाव में रहे। हालांकि आईटी, पीएसयू बैंक और मीडिया इंडेक्स में खरीदारी देखने को मिली, जिससे इन सेक्टरों ने बाजार को कुछ सहारा दिया।

आखिर क्यों टूटा शेयर बाजार?

बाजार में गिरावट की सबसे बड़ी वजह कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल रही। ब्रेंट क्रूड 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया, जिससे भारत जैसे तेल आयातक देश के लिए महंगाई और आयात बिल बढ़ने की चिंता गहरा गई। इसके अलावा अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में तेजी से विदेशी निवेशकों के उभरते बाजारों से पैसा निकालने की आशंका बढ़ी। वहीं अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से कई देशों पर नए टैरिफ लगाने की घोषणा ने भी वैश्विक बाजारों का माहौल खराब कर दिया। भारत पर भी 10 फीसदी अतिरिक्त टैरिफ लागू होने की खबर ने निवेशकों की चिंता और बढ़ा दी।

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