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ट्रंप की धमकी से ग्लोबल मार्केट में हड़कंप! एशियाई बाजार लुढ़के, कच्चा तेल $105 के पार

 Edited By: Shivendra Singh
 Published : Apr 02, 2026 07:59 am IST,  Updated : Apr 02, 2026 07:59 am IST

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ताजा बयान ने निवेशकों की उम्मीदों पर पानी फेर दिया। ट्रंप ने संकेत दिए कि अमेरिका आने वाले 2-3 हफ्तों में ईरान के खिलाफ सख्त कार्रवाई कर सकता है। इस बयान के बाद वैश्विक बाजारों में भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिला।

कच्चा तेल $105 के पार- India TV Hindi
कच्चा तेल $105 के पार Image Source : CANVA

मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच वैश्विक बाजारों में एक बार फिर घबराहट देखने को मिली है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ताजा बयान के बाद निवेशकों की उम्मीदों को झटका लगा है। ट्रंप ने साफ संकेत दिए हैं कि अमेरिका ईरान पर अगले 2-3 हफ्तों में कड़ा सैन्य एक्शन ले सकता है। इस बयान के बाद शेयर बाजारों में बिकवाली बढ़ गई और कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल देखने को मिला।

एशियाई बाजारों में भारी गिरावट

ट्रंप के बयान का असर सबसे पहले एशियाई बाजारों पर दिखा। गुरुवार को एशियाई शेयर बाजार 1.4% से ज्यादा गिर गए। वहीं, अमेरिकी फ्यूचर्स में भी करीब 1% की कमजोरी देखी गई। निवेशकों को उम्मीद थी कि जल्द युद्ध खत्म होगा, लेकिन ट्रंप के सख्त रुख ने इस उम्मीद पर पानी फेर दिया।

कच्चा तेल $105 के पार, बढ़ी चिंता

तनाव बढ़ने के साथ ही कच्चे तेल की कीमतों में भी उछाल आया। ब्रेंट क्रूड 4.2% बढ़कर $105 प्रति बैरल के पार पहुंच गया। इसका सीधा असर दुनिया की अर्थव्यवस्था और महंगाई पर पड़ सकता है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर हालात ऐसे ही रहे, तो तेल की कीमतें और बढ़ सकती हैं।

बॉन्ड यील्ड में भी तेजी

ग्लोबल अनिश्चितता के बीच अमेरिकी बॉन्ड मार्केट में भी हलचल देखने को मिली। 10 साल के ट्रेजरी बॉन्ड की यील्ड बढ़कर 4.36% तक पहुंच गई। यह संकेत देता है कि निवेशक सुरक्षित निवेश की ओर बढ़ रहे हैं, जिससे शेयर बाजार पर दबाव बन रहा है।

ट्रंप का बयान: बढ़ सकता है टकराव

ट्रंप ने अपने संबोधन में कहा कि अमेरिका अपने रणनीतिक लक्ष्यों को पूरा करने के करीब है और जरूरत पड़ी तो कार्रवाई और तेज की जाएगी। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि बातचीत के रास्ते अभी खुले हैं, लेकिन बाजार इस बयान से आश्वस्त नहीं दिखा।

होर्मुज जलडमरूमध्य बना बड़ा मुद्दा

इस पूरे तनाव के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य का बंद रहना भी चिंता का बड़ा कारण है। यह रास्ता दुनिया के करीब 20% कच्चे तेल की सप्लाई का मुख्य जरिया है। इसके बंद रहने से सप्लाई चेन पर असर पड़ रहा है और कीमतों में उछाल आ रहा है।

आगे क्या रहेगा असर?

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर तनाव जल्द कम नहीं हुआ, तो इसका असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर गहरा पड़ सकता है। लगातार बढ़ती अनिश्चितता निवेशकों के भरोसे को कमजोर कर रही है और बाजार में उतार-चढ़ाव बढ़ सकता है।

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