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इस राज्य के 12 लाख सरकारी कर्मचारियों-पेंशनभोगियों के DA में 2% बढ़ोतरी को मंजूरी, जानें कब से लागू होगा

 Published : Apr 23, 2026 10:08 pm IST,  Updated : Apr 23, 2026 10:32 pm IST

यह कदम बढ़ती महंगाई के बीच राज्य के कर्मचारियों की क्रय शक्ति को बनाए रखने और उन्हें आर्थिक संबल प्रदान करने के उद्देश्य से उठाया गया है।

सरकार के खजाने पर प्रतिवर्ष लगभग ₹1,156 करोड़ का अतिरिक्त वित्तीय भार पड़ेगा।- India TV Hindi
सरकार के खजाने पर प्रतिवर्ष लगभग ₹1,156 करोड़ का अतिरिक्त वित्तीय भार पड़ेगा। Image Source : PTI

राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने राज्य के सरकारी कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के हित में एक महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए महंगाई भत्ते (DA) और महंगाई राहत (DR) में 2 प्रतिशत की वृद्धि को मंजूरी दे दी है। इस फैसले से प्रदेश के लगभग 12.46 लाख परिवारों को सीधा लाभ मिलेगा। पीटीआई की खबर के मुताबिक, सातवें वेतन आयोग के तहत अब DA और DR 58% से बढ़कर 60% हो गया है। यह वृद्धि 1 जनवरी, 2026 से लागू मानी जाएगी।

12 लाख सरकारी कर्मचारियों-पेंशनभोगियों को फायदा

खबर के मुताबिक, सरकार के इस फैसले का फायदा 7.02 लाख राज्य कर्मचारी और 5.44 लाख पेंशनभोगियों को मिलेगा। पंचायत समितियों और जिला परिषदों के कर्मचारी भी इसमें शामिल होंगे। इस फैसले से राजस्थान सरकार के खजाने पर प्रतिवर्ष लगभग ₹1,156 करोड़ का अतिरिक्त वित्तीय भार पड़ेगा।

भुगतान की प्रक्रिया और समयसीमा

सरकार ने स्पष्ट किया है कि बढ़े हुए भत्ते का भुगतान चरणबद्ध तरीके से किया जाएगा:

नकद भुगतान: बढ़ा हुआ DA मई 2026 के वेतन के साथ जुड़कर आएगा, जिसका भुगतान जून 2026 में होगा।
एरियर (बकाया): 1 जनवरी से 30 अप्रैल, 2026 तक की बकाया राशि कर्मचारियों के सामान्य भविष्य निधि (GPF) खातों में जमा की जाएगी।
पेंशनभोगी: बुजुर्गों को राहत देते हुए, पेंशनभोगियों को 1 जनवरी से ही बढ़ी हुई महंगाई राहत (DR) का भुगतान नकद किया जाएगा।

डीए को समझ लीजिए

सरकार अपने कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को महंगाई के असर से राहत देने के लिए डियरनेस अलाउंस (डीए) प्रदान करती है। यह एक तरह का कॉस्ट ऑफ लिविंग एडजस्टमेंट है, जिसका उद्देश्य बढ़ती कीमतों के बीच कर्मचारियों की वास्तविक आय को संतुलित बनाए रखना है। डियरनेस अलाउंस मूल वेतन (बेसिक सैलरी) का एक निश्चित प्रतिशत होता है, इसलिए यह हर कर्मचारी के वेतन के अनुसार अलग-अलग होता है। समय-समय पर महंगाई के स्तर को देखते हुए इसमें संशोधन किया जाता है, ताकि कर्मचारियों की क्रय शक्ति बनी रहे। नियमों के अनुसार, डियरनेस अलाउंस को वेतन का हिस्सा मानकर घोषित करना अनिवार्य है और यह पूरी तरह से कर योग्य (टैक्सेबल) होता है।

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