9 सितंबर को भाद्रपद कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि और बुधवार का दिन है। त्रयोदशी तिथि बुधवार को दोपहर 12 बजकर 31 मिनट तक रहेगी, उसके बाद चतुर्दशी तिथि लग जाएगी। 9 सितंबर को रात 9 बजकर 53 मिनट तक शिव योग रहेगा। बुधवार को दोपहर बाद 3 बजकर 15 मिनट तक अश्लेषा नक्षत्र रहेगा। 9 सितंबर को मासिक शिवरात्रि का व्रत किया जायेगा। इसके अलावा 9 सितंबर को अघोर चतुर्दशी भी है। तो चलिए आचार्य इंदु प्रकाश से जानते हैं मंगलवार का पंचांग, राहुकाल, शुभ मुहूर्त और सूर्योदय-सूर्यास्त का समय।
9 सितंबर 2026 का पंचांग
- भाद्रपद कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि- 9 सितंबर 2026 को दोपहर 12 बजकर 31 मिनट तक रहेगी, उसके बाद चतुर्दशी तिथि लग जाएगी
- शिव योग- 9 सितंबर 2026 को रात 9 बजकर 53 मिनट तक
- अश्लेषा नक्षत्र - 9 सितंबर 2026 को दोपहर बाद 3 बजकर 15 मिनट तक
- 9 सितंबर 2026 विशेष- मासिक शिवरात्रि, अघोर चतुर्दशी
9 सितंबर 2026 का शुभ समय
- ब्रह्म मुहूर्त- 04:52 ए एम से 05:38 ए एम
- प्रातः सन्ध्या- 05:15 ए एम से 06:25 ए एम
- अभिजित मुहूर्त- कोई नहीं
- विजय मुहूर्त- 02:39 पी एम से 03:29 पी एम
- गोधूलि मुहूर्त- 06:46 पी एम से 07:10 पी एम
- सायाह्न सन्ध्या- 06:46 पी एम से 07:56 पी एम
- अमृत काल- 01:43 पी एम से 03:14 पी एम
- निशिता मुहूर्त- 12:12 ए एम, सितंबर 10 से 12:59 ए एम, सितंबर 10
राहुकाल का समय
- दिल्ली- दोपहर 12:18 - 01:52 PM
- मुंबई- दोपहर 12:36 - 02:08 PM
- चंडीगढ़- दोपहर 12:20 - 01:54 PM
- लखनऊ- दोपहर 12:04 - 01:37 PM
- भोपाल- दोपहर 12:17 - 01:50 PM
- कोलकाता- दोपहर पहले 11:34 - 02:39 PM
- अहमदाबाद- दोपहर 12:36 - 02:10 PM
- चेन्नई- दोपहर 12:06 - 01:38 PM
सूर्योदय-सूर्यास्त का समय
- सूर्योदय- सुबह 6:02 बजे
- सूर्यास्त- शाम 6:33 बजे
अघोर चतुर्दशी के बारे में
भाद्रपद कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को अघोर चतुर्दशी मनाने का विधान है। अघोर चतुर्दशी में भगवान शंकर के अघोर रूप की पूजा की जाती है। इस दिन भगवान शंकर की पूजा करने से और गंगाजल, दूध, दही, घी और शक्कर से बने पंचामृत के साथ रुद्राभिषेक करने से व्यक्ति को मनोवांछित फलों की प्राप्ति होती है।
मासिक शिवरात्रि का महत्व
मासिक शिवरात्रि का व्रत उस दिन किया जाता है जिस दिन चतुर्दशी तिथि में रात्रि काल पड़े। चतुर्दशी तिथि बुधवार को दोपहर 12 बजकर 32 मिनट पर लग जाएगी और गुरुवार को सुबह 10 बजकर 34 मिनट तक रहेगी। मासिक शिवरात्रि के दिन के दिन भगवान शंकर की पूजा-अर्चना का विधान है। इस महादेव को बेलपत्र, पुष्प, धूप-दीप और भोग चढ़ाने के बाद शिव मंत्र का जप किया जाता है। कहते हैं ऐसा करने से मनचाहे फल की प्राप्ति होती है और जीवन में चल रही सभी समस्याओं का समाधान भी निकलता है।
(आचार्य इंदु प्रकाश देश के जाने-माने ज्योतिषी हैं, जिन्हें वास्तु, सामुद्रिक शास्त्र और ज्योतिष शास्त्र का लंबा अनुभव है। इंडिया टीवी पर आप इन्हें हर सुबह 7.30 बजे भविष्यवाणी में देखते हैं।)
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