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Chaitra Navratri 2026 Aarti, Mantra Live Updates: मंगल की सेवा सुन मेरी देवा, अंबे तू है जगदंबे काली...चैत्र नवरात्रि पर करें मां दुर्गा की आरती, देखें माता रानी की आरती और मंत्र

 Written By: Arti Azad @Azadkeekalamse
 Updated : Mar 19, 2026 07:54 pm IST

Chaitra Navratri 2026 Mata Ki Aarti Live Updates: देवी के साधकों को नवरात्रि पर्व का बेसब्री से इंतजार रहता है, क्योंकि यह पावन पर्व देवी दुर्गा की उपासना के लिए अति उत्तम माना गया है। इन दिनों माता की की विधि-विधान से पूजा होती है। नवरात्रि में दुर्गा मंत्रों का जाप, चालीसा, दुर्गासप्तशती, स्तुति पाठ शुभ फल देते हैं।

दुर्गा माता की आरती- India TV Hindi
दुर्गा माता की आरती Image Source : INDIA TV

Chaitra Navratri 2026 Mata Ki Aarti (माता रानी की आरती) Live Updates: साल 2026 में चैत्र नवरात्रि की शुरुआत 19 मार्च, गुरुवार से हुई है। इस महापर्व का समापन राम जन्मोत्सव के साथ 26 मार्च 2026 को होगा। शक्ति की आराधना को समर्पित यह त्योहार हिंदूओं के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। माता रानी के गृहस्थ साधकों के लिए नवरात्रि ही तो वह सबसे उत्तम समय माना जाता है, जब देवी की उपासना कर उनकी विशेष कृपा प्राप्त की जा सकती है। चैत्र नवरात्रि के दौरान माता दुर्गा के 9 अलग-अलग स्वरूपों की उपासना की जाती है। नवरात्रि में मां भगवती की विधिपूर्वक पूजा-अर्चना करने से भक्तों की सारी मनोकामनाएं पूरी होती है। चैत्र नवरात्रि में नौ दिन व्रत करने का विधान है। बहुत से लोग नौ दिनों का व्रत नहीं रख पाते, लेकिन नियम से सुबह-शाम माता की आरती और विधि-विधान से पूजा करते हैं। नवरात्रि में हर किसी को माता रानी की आरती जरूर करनी चाहिए। चलिए आपको बताते हैं माता की आरती के संपूर्ण लिरिक्स।

अम्बे तू है जगदम्बे काली (Ambe Tu Hai jagdambe Kali)

अम्बे तू है जगदम्बे काली,

जय दुर्गे खप्पर वाली ।
तेरे ही गुण गाये भारती,
ओ मैया हम सब उतरें, तेरी आरती ॥

तेरे भक्त जनो पर,
भीर पडी है भारी माँ ।
दानव दल पर टूट पडो,
माँ करके सिंह सवारी ।
सौ-सौ सिंहो से बलशाली,
अष्ट भुजाओ वाली,
दुष्टो को पलमे संहारती ।
ओ मैया हम सब उतरें, तेरी आरती ॥

अम्बे तू है जगदम्बे काली,
जय दुर्गे खप्पर वाली ।
तेरे ही गुण गाये भारती,
ओ मैया हम सब उतरें, तेरी आरती ॥

माँ बेटे का है इस जग मे,
बडा ही निर्मल नाता ।
पूत - कपूत सुने है पर न,
माता सुनी कुमाता ॥
सब पे करूणा दरसाने वाली,
अमृत बरसाने वाली,
दुखियो के दुखडे निवारती ।
ओ मैया हम सब उतरें, तेरी आरती ॥

अम्बे तू है जगदम्बे काली,
जय दुर्गे खप्पर वाली ।
तेरे ही गुण गाये भारती,
ओ मैया हम सब उतरें, तेरी आरती ॥

नही मांगते धन और दौलत,
न चांदी न सोना माँ ।
हम तो मांगे माँ तेरे मन मे,
इक छोटा सा कोना ॥
सबकी बिगडी बनाने वाली,
लाज बचाने वाली,
सतियो के सत को सवांरती ।
ओ मैया हम सब उतरें, तेरी आरती ॥

अम्बे तू है जगदम्बे काली,
जय दुर्गे खप्पर वाली ।
तेरे ही गुण गाये भारती,
ओ मैया हम सब उतरें, तेरी आरती ॥

चरण शरण मे खडे तुम्हारी,
ले पूजा की थाली ।
वरद हस्त सर पर रख दो,
मॉ सकंट हरने वाली ।
मॉ भर दो भक्ति रस प्याली,
अष्ट भुजाओ वाली,
भक्तो के कारज तू ही सारती ।
ओ मैया हम सब उतरें, तेरी आरती ॥

अम्बे तू है जगदम्बे काली,
जय दुर्गे खप्पर वाली ।
तेरे ही गुण गाये भारती,
ओ मैया हम सब उतरें, तेरी आरती ॥

जय अंबे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी (Jai Ambe Gauri Maiya Jai Shyama Gauri)

जय अंबे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी।
तुमको निशिदिन ध्यावत, हरि ब्रह्मा शिवरी॥ ओम जय अंबे गौरी

मांग सिन्दूर विराजत, टीको मृगमद को।
उज्जवल से दो‌उ नैना, चन्द्रवदन नीको॥ ओम जय अंबे गौरकनक समान कलेवर, रक्ताम्बर राजै।
रक्तपुष्प गल माला, कण्ठन पर साजै॥ ओम जय अंबे गौरी

केहरि वाहन राजत, खड्ग खप्परधारी।
सुर-नर-मुनि-जन सेवत, तिनके दुखहारी॥ ओम जय अंबे गौरी

कानन कुण्डल शोभित, नासाग्रे मोती। कोटिक चन्द्र दिवाकर,
सम राजत ज्योति॥ ओम जय अंबे गौरी

शुम्भ-निशुम्भ बिदारे, महिषासुर घाती। धूम्र विलोचन नैना,
निशिदिन मदमाती॥ ओम जय अंबे गौरी

चण्ड-मुण्ड संहारे, शोणित बीज हरे।
मधु-कैटभ दो‌उ मारे, सुर भयहीन करे॥ ओम जय अंबे गौरी

ब्रहमाणी रुद्राणी तुम कमला रानी।
आगम-निगम-बखानी, तुम शिव पटरानी॥ ओम जय अंबे गौरी

चौंसठ योगिनी मंगल गावत, नृत्य करत भैरूं।
बाजत ताल मृदंगा, अरु बाजत डमरु॥ ओम जय अंबे गौरी

तुम ही जग की माता, तुम ही हो भरता।
भक्‍तन की दु:ख हरता, सुख सम्पत्ति करता॥ ओम जय अंबे गौरी

भुजा चार अति शोभित, वर-मुद्रा धारी।
मनवान्छित फल पावत, सेवत नर-नारी॥ ओम जय अंबे गौरी

कंचन थाल विराजत, अगर कपूर बाती।
श्रीमालकेतु में राजत, कोटि रतन ज्योति॥ ओम जय अंबे गौरी

श्री अम्बेजी की आरती, जो को‌ई नर गावै।
कहत शिवानन्द स्वामी, सुख सम्पत्ति पावै॥ ओम जय अंबे गौरी, ओम जय अंबे गौरी

 

Chaitra Navratri 2026 Live Updates: चैत्र नवरात्रि आरती, मंत्र, चालीसा, स्तुति, दुर्गासप्तशती श्लोक, माता के 108 नाम, गणेश जी की आरती, विष्णु आरती

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  • 7:04 PM (IST)
    Posted by Naveen Khantwal

    माता शैलपुत्री के प्रसिद्ध मंदिर

    नवदेवी मंदिर, नौरंगाबाद- इस मंदिर में माता की ज्योति प्रकट हुई थी और यह मंदिर लगभग 100 साल पुराना माना जाता है।
    शैलपुत्री मंदिर, वाराणसी- यहां माता स्वयं प्रकट हुई थीं। 
    शैलपुत्री मंदिर, बारामुला- यह प्राचीन मंदिर माता को समर्पित है क्योंकि मां हिमालय की पुत्री हैं। 
    शैलपुत्री मंदिर, मंडी- इस मंदिर में माता मूर्ति के रूप में विराजमान है और स्थानीय लोग शैलपुत्री को राजमाता भी कहते हैं। 
    शैलपुत्री मंदिर, श्रीनगर- इस मंदिर में माता शिला के रूप में एक गुफा के अंदर विराजमान हैं। 
     

  • 6:40 PM (IST)
    Posted by Naveen Khantwal

    शैलपुत्री माता की पूजा के लिए रात्रि कालीन मुहूर्त

    शैलपुत्री माता की पूजा के लिए रात्रि के समय शुभ मुहूर्त 

    • गोधूलि मुहूर्त- 06:47 PM से 07:11 PM तक
    • सायाह्न सन्ध्या- 06:49 PM से 08:00 PM  तक

  • 6:30 PM (IST)
    Posted by Naveen Khantwal

    नवरात्रि के पहले दिन आत्मविश्वास और बौद्धिक कौशल के लिए करें इस मंत्र का जप

    माता के भक्तों को नवरात्रि के पहले दिन आत्मविश्वास और बौद्धिक कौशल को बढ़ाने के लिए नावार्ण मंत्र का जप अवश्य करना चाहिए। मंत्र नीचे दिया गया है। 

    मंत्र- 'ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चै' 

  • 6:16 PM (IST)
    Posted by Naveen Khantwal

    शिवजी की आरती (Shiv Ji Ki Aarti Om Jai Shiv Omkara)

    ॐ जय शिव ओंकारा, स्वामी जय शिव ओंकारा।
    ब्रह्मा, विष्णु, सदाशिव, अर्द्धांगी धारा॥

    ओम जय शिव ओंकारा॥एकानन चतुरानन पञ्चानन राजे।
    हंसासन गरूड़ासन वृषवाहन साजे॥

    ओम जय शिव ओंकारा॥

    दो भुज चार चतुर्भुज दसभुज अति सोहे।
    त्रिगुण रूप निरखत त्रिभुवन जन मोहे॥

    ओम जय शिव ओंकारा॥

    अक्षमाला वनमाला मुण्डमालाधारी।
    त्रिपुरारी कंसारी कर माला धारी॥

    ओम जय शिव ओंकारा॥

    श्वेताम्बर पीताम्बर बाघंबर अंगे।
    सनकादिक गरुड़ादिक भूतादिक संगे॥

    ओम जय शिव ओंकारा॥

    कर के मध्य कमण्डल चक्र त्रिशूलधारी।
    जगकर्ता जगभर्ता जगसंहारकर्ता॥

    ओम जय शिव ओंकारा॥

    ब्रह्मा विष्णु सदाशिव जानत अविवेका।
    प्रणवाक्षर के मध्ये ये तीनों एका॥

    ओम जय शिव ओंकारा॥

    पर्वत सोहैं पार्वती, शंकर कैलासा।
    भांग धतूरे का भोजन, भस्मी में वासा॥

    ओम जय शिव ओंकारा॥

    जटा में गंग बहत है, गल मुण्डन माला।
    शेष नाग लिपटावत, ओढ़त मृगछाला॥

    ओम जय शिव ओंकारा॥

    काशी में विराजे विश्वनाथ, नन्दी ब्रह्मचारी।
    नित उठ दर्शन पावत, महिमा अति भारी॥

    ओम जय शिव ओंकारा॥

    त्रिगुणस्वामी जी की आरति जो कोइ नर गावे।
    कहत शिवानन्द स्वामी, मनवान्छित फल पावे॥

    ओम जय शिव ओंकारा॥ स्वामी ओम जय शिव ओंकारा॥

  • 5:59 PM (IST)
    Posted by Naveen Khantwal

    Chaitra Navratri 2026: रक्षा मंत्र

    सर्वस्वरूपे सर्वेशे सर्वशक्ति समन्विते।
    भयेभ्यस्त्राहि नो देवी दुर्गे देवी नमोऽस्तुते।।

  • 5:46 PM (IST)
    Posted by Naveen Khantwal

    मां दुर्गा के सबसे लोकप्रिय मंत्र

    मां दुर्गा के सबसे लोकप्रिय मंत्र

    मूल मंत्र (सर्व-बाधा मुक्ति):
    ॐ जयन्ती मङ्गला काली भद्रकाली कपालिनी।
    दुर्गा क्षमा शिवा धात्री स्वाहा स्वधा नमोऽस्तुते।।

  • 5:14 PM (IST)
    Posted by Naveen Khantwal

    Chaitra Navratri 2026 Live Update: चैत्र नवरात्रि में क्या नहीं खाना चाहिए?

    नवरात्रि व्रत में अनाज का सेवन न करें। व्रत में चावल और गेहूं से बनी चीजों को खाने की मनाही है।
    नवरात्रि व्रत के दौरान पैकेट वाले खाद्य पदार्थ, तेल में तले हुए व्यंजन और मीठी चीजों से भी दूरी बनाकर रखें।
    नवरात्रि उपवास में भूलकर भी प्याज और लहसुन का सेवन न करें। ये सब चीजें खाना वर्जित होता है।
    चैत्र नवरात्रि के दौरान तामसिक चीजों से पूरी तरह दूरी बनाकर रखें।

  • 4:59 PM (IST)
    Posted by Naveen Khantwal

    Chaitra Navratri 2026 Live Update: चैत्र नवरात्रि से जुड़ी पौराणिक कथा

    पौराणिक कथा के अनुसार अनुसार, महिषासुर नामक राक्षस का आतंक पृथ्वी लोक पर काफी अधिक बढ़ गया था। महिषासुर को वरदान था कि उसे कोई देव या दानव नहीं हरा पाएगा। महिषासुर के आतंक से चारों तरफ त्राहिमाम-त्राहिमाम मचा हुआ था। इसके बाद सभी देवताओं ने माता पार्वती से उनकी रक्षा के लिए प्रार्थना किया। तब देवी पार्वती ने अपने अंश से नौ रूप प्रकट किए, जिन्हें देवताओं ने अपने शस्त्र देकर शक्ति संपन्न किया। धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक, ये पूरी प्रक्रिया चैत्र माह के प्रतिपदा तिथि से शुरू होकर पूरे 9 दिनों तक चला था। इसके बाद से चैत्र महीने में नवरात्रि मनाने की परंपरा की शुरुआत हुई। चैत्र नवरात्रि आध्यात्मिक इच्छाओं की पूर्ति करने वाली मानी जाती है।

  • 4:11 PM (IST)
    Posted by Naveen Khantwal

    अंबे मैया की आरती (Ambe Maa Ki Aarti)

    जय हो अम्बे मैया,
    तेरी आरती उतारू मां,
    जय हो अम्बे मैया,
    तेरी आरती उतारू मां,
    आरती उतारू मां,
    जय हो अम्बे मैया,
    तेरी आरती उतारू मां...

    अदभुद तेज बदन पर सोहे,
    तीनो लोक उजाला मां,
    मेरी मैया बनो खिवैया,
    तेरी आरती उतारू मां,
    जय हो अम्बे मैया,
    तेरी आरती उतारू मां...

    एक भरोसा तेरो मैया,
    दूजा नहीं सहारा मां,
    भक्तो के कल्याण करेआ,
    आरती उतारू मां,
    जय हो अम्बे मैया,
    तेरी आरती उतारू मां...

    रोग हरो मां कष्ट हरो मां,
    दुःख से हमें बचाओ मां,
    विजय करो मां बाँध बधेया,
    आरती उतारू मां,
    जय हो अम्बे मैया,
    तेरी आरती उतारू मां...

    जो जन मां की करे आरती,
    कष्ट कभी ना पाता मां,
    दूध पूत भंडार भरइया,
    आरती उतारू मां,
    जय हो अम्बे मैया,
    तेरी आरती उतारू मां,
    आरती उतारू मां,
    जय हो अम्बे मैया,
    तेरी आरती उतारू मां...

  • 3:29 PM (IST)
    Posted by Naveen Khantwal

    Chaitra Navratri 2026 Live Update: मां शैलपुत्री का भोग

    मां को गाय के घी से बनी खीर या सफेद रंग की मिठाई का भोग लगाएं. पूजा के अंत में मां शैलपुत्री की आरती करें और परिवार के सदस्यों के साथ प्रसाद बाटें.

  • 2:41 PM (IST)
    Posted by Arti Azad

    नवरात्रि में मां दुर्गा को किस दिन लगाएं कौन सा भोग

    मां शैलपुत्री: नवरात्र के पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा होती है। उन्हें गाय के शुद्ध घी का भोग लगाना चाहिए। 

    मां ब्रह्मचारिणी: दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की पूजा की जाती है। इन्हें शक्कर, सफेद मिठाई और पंचामृत का भोग बहुत प्रिय है। 

    मां चंद्रघंटा: तीसरे दिन दुखों का नाश करने वाली मां चंद्रघंटा की पूजा होती है। इन्हें दूध से बनी मिठाइयां या खीर अर्पित करनी चाहिए। 

    मां कुष्मांडा: चौथे दिन मां कुष्मांडा को मालपुआ चढ़ाया जाता है। इस भोग को चढ़ाने से बुद्धि तेज होती है और निर्णय शक्ति बढ़ती है।

    मां स्कंदमाता: पांचवें दिन कार्तिकेय जी की माता स्कंदमाता की पूजा होती है। मां को केला विशेष रूप से अर्पित किया जाता है। 

    मां कात्यायनी: छठे दिन महिषासुर मर्दिनी मां कात्यायनी को शहद का भोग लगाना चाहिए। 

    मां कालरात्रि: सातवें दिन शत्रुओं का नाश करने वाली मां कालरात्रि को गुड़ चढ़ाया जाता है। 

    मां महागौरी: अष्टमी के दिन मां महागौरी को नारियल का भोग लगाया जाता है। 

    मां सिद्धिदात्री: नवमी के दिन मां सिद्धिदात्री को तिल, हलवा, पूरी और काले चने का भोग लगाया जाता है। 

  • 2:25 PM (IST)
    Posted by Arti Azad

    विष्णु जी की आरती (Vishnu Ji ki Aarti Lyrics)

    श्री विष्णु जी की आरती: ॐ जय जगदीश हरे

    ॐ जय जगदीश हरे, स्वामी! जय जगदीश हरे।
    भक्तजनों के संकट क्षण में दूर करे॥

    जो ध्यावै फल पावै, दुख बिनसे मन का।
    सुख-संपत्ति घर आवै, कष्ट मिटे तन का॥ ॐ जय…॥

    मात-पिता तुम मेरे, शरण गहूं किसकी।
    तुम बिन और न दूजा, आस करूं जिसकी॥ ॐ जय…॥

    तुम पूरन परमात्मा, तुम अंतरयामी॥
    पारब्रह्म परेमश्वर, तुम सबके स्वामी॥ ॐ जय…॥

    तुम करुणा के सागर तुम पालनकर्ता।
    मैं मूरख खल कामी, कृपा करो भर्ता॥ ॐ जय…॥

    तुम हो एक अगोचर, सबके प्राणपति।
    किस विधि मिलूं दयामय! तुमको मैं कुमति॥ ॐ जय…॥

    दीनबंधु दुखहर्ता, तुम ठाकुर मेरे।
    अपने हाथ उठाओ, द्वार पड़ा तेरे॥ ॐ जय…॥

    विषय विकार मिटाओ, पाप हरो देवा।
    श्रद्धा-भक्ति बढ़ाओ, संतन की सेवा॥ ॐ जय…॥

    तन-मन-धन और संपत्ति, सब कुछ है तेरा।
    तेरा तुझको अर्पण क्या लागे मेरा॥ ॐ जय…॥

    जगदीश्वरजी की आरती जो कोई नर गावे।
    कहत शिवानंद स्वामी, मनवांछित फल पावे॥ ॐ जय…॥

  • 1:55 PM (IST)
    Posted by Arti Azad

    Chaitra Navratri 2026 Live Updates: चैत्र नवरात्रि के नौ दिनों के 9 रंग

    • नवरात्रि के पहले दिन- लाल, पीला
    • नवरात्रि का दूसरा दिन- हरा, सफेद
    • नवरात्रि का तीसरा दिन- आसमानी, नारंगी, हरा
    • नवरात्रि का चौथा दिन- नारंगी
    • नवरात्रि का पांचवां दिन- सफेद
    • नवरात्रि का छठा दिन- आसमानी, नारंगी, लाल, हरा
    • नवरात्रि का सातवां दिन- नीला, काला, ग्रे
    • नवरात्रि का आठवां दिन- गुलाबी, लाल, सफेद
    • नवरात्रि का नौवां दिन- नारंगी, लाल
  • 1:30 PM (IST)
    Posted by Arti Azad

    Chaitra Navratri 2026 Shubh Muahurat: आज का शुभ मुहूर्त

    गुरुवार के शुभ मुहूर्त 

    विजय मुहूर्त: दोपहर 2 बजकर 30 मिनट से 3 बजकर 18 मिनट तक 
    गोधूलि मुहूर्त: शाम 6 बजकर 29 मिनट से 6 बजकर 53 मिनट तक
    अमृतकाल: रात 11 बजकर 32 मिनट से देर रात 1 बजकर 3 मिनट तक

  • 12:50 PM (IST)
    Posted by Arti Azad

    Chaitra Navratri 2026 Live Updates: नवरात्रि में जरूर करें काली माता की ये आरती

    मंगर की सेवा...

    मंगल की सेवा सुन मेरी देवा, हाथ जोड तेरे द्वार खडे।
    पान सुपारी ध्वजा नारियल ले ज्वाला तेरी भेट धरे
    सुन जगदम्बे न कर विलम्बे, संतन के भडांर भरे।
    सन्तन प्रतिपाली सदा खुशहाली, जै काली कल्याण करे ।। 
    बुद्धि विधाता तू जग माता, मेरा कारज सिद्व करे।
    चरण कमल का लिया आसरा शरण तुम्हारी आन पडे
    जब जब भीड पडी भक्तन पर, तब तब आप सहाय करे ।। 
    गुरु के वार सकल जग मोहयो, तरुणी रूप अनूप धरे
    माता होकर पुत्र खिलावे, कही भार्या भोग करे
    शुक्र सुखदाई सदा सहाई संत खडे जयकार करे ।। 
    ब्रह्मा विष्णु महेश फल लिये भेट तेरे द्वार खडे
    अटल सिहांसन बैठी मेरी माता, सिर सोने का छत्र फिरे
    वार शनिचर कुकम बरणो, जब लकड पर हुकुम करे ।। 
    खड्ग खप्पर त्रिशुल हाथ लिये, रक्त बीज को भस्म करे
    शुम्भ निशुम्भ को क्षण में मारे, महिषासुर को पकड दले ।।
    आदित वारी आदि भवानी, जन अपने को कष्ट हरे ।। 
    कुपित होकर दानव मारे, चण्डमुण्ड सब चूर करे
    जब तुम देखी दया रूप हो, पल में सकंट दूर करे
    सौम्य स्वभाव धरयो मेरी माता, जन की अर्ज कबूल करे ।। 
    सात बार की महिमा बरनी, सब गुण कौन बखान करे
    सिंह पीठ पर चढी भवानी, अटल भवन में राज्य करे
    दर्शन पावे मंगल गावे, सिद्ध साधक तेरी भेट धरे ।। 
    ब्रह्मा वेद पढे तेरे द्वारे, शिव शंकर हरी ध्यान धरे
    इन्द्र कृष्ण तेरी करे आरती, चॅवर कुबेर डुलाय रहे
    जय जननी जय मातु भवानी, अटल भवन में राज्य करे ।। 
    सन्तन प्रतिपाली सदा खुशहाली, मैया जै काली कल्याण करे ।।

  • 12:30 PM (IST)
    Posted by Arti Azad

    अम्बे तू है जगदम्बे काली (Maa Durga Maa Kali Aarti)

    अम्बे तू है जगदम्बे काली,जय दुर्गे खप्पर वाली,

    तेरे ही गुण गावें भारती,ओ मैया हम सब उतारे तेरी आरती।

    ओ मैया हम सब उतारे तेरी आरती॥

    तेरे भक्त जनो पर माताभीर पड़ी है भारी।

    दानव दल पर टूट पड़ो माँकरके सिंह सवारी॥

    सौ-सौ सिहों से बलशाली,है अष्ट भुजाओं वाली,

    दुष्टों को तू ही ललकारती।

    ओ मैया हम सब उतारे तेरी आरती॥

    माँ-बेटे का है इस जग मेंबड़ा ही निर्मल नाता।

    पूत-कपूत सुने हैपर ना माता सुनी कुमाता॥

    सब पे करूणा दर्शाने वाली,अमृत बरसाने वाली,

    दुखियों के दुखड़े निवारती।

    ओ मैया हम सब उतारे तेरी आरती॥

    नहीं मांगते धन और दौलत,न चांदी न सोना।

    हम तो मांगें तेरे चरणों मेंछोटा सा कोना॥

    सबकी बिगड़ी बनाने वाली,लाज बचाने वाली,

    सतियों के सत को संवारती।

    ओ मैया हम सब उतारे तेरी आरती॥

    चरण शरण में खड़े तुम्हारी,ले पूजा की थाली।

    वरद हस्त सर पर रख दो माँसंकट हरने वाली॥

    माँ भर दो भक्ति रस प्याली,अष्ट भुजाओं वाली,

    भक्तों के कारज तू ही सारती।

    ओ मैया हम सब उतारे तेरी आरती॥

  • 11:58 AM (IST)
    Posted by Arti Azad

    चैत्र नवरात्रि व्रत नियम

    • नवरात्रि के पहले दिन कलश स्थापना करें। साथ ही अखंड ज्योति भी जलाएं।
    • अखंड ज्योति वाले घर को कभी भी खाली न छोड़ें और ध्यान रखें की यह बुझे नहीं।
    • पूजा स्थल को हमेशा साफ-सुथरा रखें।
    • नवरात्रि के नौ दिनों तक मां दुर्गा के 9 रूपों की पूजा-अर्चना करें।
    • दुर्गा चालीसा का पाठ करें।
    • नवरात्रि में अष्टमी या नवमी के दिन कन्या पूजन करें।
    • नवरात्रि व्रत का पारण नवमी तिथि समाप्त होने और दशमी तिथि शुरू होने के बाद करें।
    • नवरात्रि में ब्रह्मचर्य का पूरा पालन करें।
  • 10:50 AM (IST)
    Posted by Arti Azad

    Chaitra Navratri 2026: गणेश जी की आरती

    सुखकर्ता दुखहर्ता, वार्ता विघ्नांची|
    नुरवी; पुरवी प्रेम, कृपा जयाची |
    सर्वांगी सुंदर, उटी शेंदुराची|
    कंठी झळके माळ, मुक्ताफळांची॥१॥

    जय देव, जय देव जय मंगलमूर्ती|
    दर्शनमात्रे मन कामना पुरती ॥धृ॥

    रत्नखचित फरा, तुज गौरीकुमरा|
    चंदनाची उटी , कुमकुम केशरा|
    हिरेजडित मुकुट, शोभतो बरा |
    रुणझुणती नूपुरे, चरणी घागरिया|
    जय देव जय देव जय मंगलमूर्ती ॥२॥

    लंबोदर पीतांबर, फणिवरबंधना |
    सरळ सोंड, वक्रतुंड त्रिनयना|
    दास रामाचा, वाट पाहे सदना|
    संकटी पावावे, निर्वाणी रक्षावे, सुरवरवंदना|
    जय देव जय देव, जय मंगलमूर्ती|
    दर्शनमात्रे मनकामना पुरती ॥३॥

  • 10:23 AM (IST)
    Posted by Arti Azad

    Chaitra Navratri 2026: दुर्गा सप्तशती पाठ के 7 श्लोक देंगे पूरा फल

    हर कोई पूरे 13 अध्यायों का पाठ नहीं कर पाता। ऐसे भक्तों के लिए, शास्त्रों में एक सरल विधि सुझाई गई है। यदि पूरे अध्याय का पाठ करना संभव न हो, तो ऐसा माना जाता है कि यदि केवल 7 विशेष श्लोकों का ही जाप किया जाए, तो भी वही परिणाम प्राप्त हो सकते हैं। आइए जानते हैं इन 7 प्रमुख श्लोकों के बारे में। 

    मां दुर्गा का सप्तशती पाठ

    ॐ ज्ञानिनामपि चेतांसि देवी भगवती हि सा। 
    बलादाकृष्य मोहाय महामाया प्रयच्छति।।

    दुर्गे स्मृता हरसि भीतिमशेष जन्तोः स्वस्थैः स्मृता मतिमतीव शुभां ददासि। 
    दारिद्र्य दुःख भयहारिणि का त्वदन्या सर्वोपकार करणाय सदार्द्रचित्ता।।

    सर्वमङ्गल माङ्गल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके। 
    शरण्ये त्र्यंम्बके गौरि नारायणि नमोस्तु ते॥

    शरणागत दीनार्तपरित्राण परायणे 
    सर्वस्यार्ति हरे देवि नारायणि नमोस्तु ते॥4॥

    सर्वस्वरुपे सर्वेशे सर्वशक्ति समन्विते। 
    भयेभ्यस्त्राहि नो देवि दुर्गे देवि नमोस्तु ते॥

    रोगानशेषानपंहसि तुष्टारुष्टा तु कामान् सकलानभीष्टान्। 
    त्वामाश्रितानां न विपन्नराणां त्वामाश्रिता हि आश्रयतां प्रयान्ति॥

    सर्वबाधा प्रशमनं त्रैलोक्यस्याखिलेश्वरि। 
    एवमेव त्वया कार्यम् अस्मद् वैरि विनाशनम्॥

  • 10:06 AM (IST)
    Posted by Arti Azad

    मां महिषासुरमर्दिनी स्रोत के पाठ की विधि

    स्नान के बाद स्वच्छ, कपड़े पहनें। पूजा स्थल या घर के किसी साफ स्थान पर एक आसन बिछाएं और उस पर बैठें। इसके बाद देवी मां की तस्वीर पर पुष्प, माला आदि अर्पित करें। इसके बाद धूप, दीप आदि से पूजा करें और माता को भोग लगाएं। अब एकाग्र मन से महिषासुरमर्दिनी स्रोत का पाठ करें। इसके बाद मां के चरणों में प्रणाम करत्व हुए उनसे समस्त कष्टों को दूर करने की प्रार्थना करें। 

  • 9:46 AM (IST)
    Posted by Arti Azad

    देवी की आरती से पहले जरूर करें गणेश जी की आरती

    जय गणेश जय गणेश,

    जय गणेश देवा ।
    माता जाकी पार्वती,
    पिता महादेवा ॥

    एक दंत दयावंत,
    चार भुजा धारी ।
    माथे सिंदूर सोहे,
    मूसे की सवारी ॥

    जय गणेश जय गणेश,
    जय गणेश देवा ।
    माता जाकी पार्वती,
    पिता महादेवा ॥

    पान चढ़े फल चढ़े,
    और चढ़े मेवा ।
    लड्डुअन का भोग लगे,
    संत करें सेवा ॥

    जय गणेश जय गणेश,
    जय गणेश देवा ।
    माता जाकी पार्वती,
    पिता महादेवा ॥

    अंधन को आंख देत,
    कोढ़िन को काया ।
    बांझन को पुत्र देत,
    निर्धन को माया ॥

    जय गणेश जय गणेश,
    जय गणेश देवा ।
    माता जाकी पार्वती,
    पिता महादेवा ॥

    'सूर' श्याम शरण आए,
    सफल कीजे सेवा ।
    माता जाकी पार्वती,
    पिता महादेवा ॥

    जय गणेश जय गणेश,
    जय गणेश देवा ।
    माता जाकी पार्वती,
    पिता महादेवा ॥

    दीनन की लाज रखो,
    शंभु सुतकारी ।
    कामना को पूर्ण करो,
    जाऊं बलिहारी ॥

    जय गणेश जय गणेश,
    जय गणेश देवा ।
    माता जाकी पार्वती,
    पिता महादेवा ॥

  • 8:36 AM (IST)
    Posted by Arti Azad

    महिषासुरमर्दिनि स्त्रोत: Mahishasur Mardini Stotram

    अयि गिरिनन्दिनि नन्दितमेदिनि विश्वविनोदिनि नन्दिनुते
    गिरिवरविन्ध्यशिरोऽधिनिवासिनि विष्णुविलासिनि जिष्णुनुते ।
    भगवति हे शितिकण्ठकुटुम्बिनि भूरिकुटुम्बिनि भूरिकृते
    जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥ १ ॥

    सुरवरवर्षिणि दुर्धरधर्षिणि दुर्मुखमर्षिणि हर्षरते
    त्रिभुवनपोषिणि शङ्करतोषिणि किल्बिषमोषिणि घोषरते
    दनुजनिरोषिणि दितिसुतरोषिणि दुर्मदशोषिणि सिन्धुसुते
    जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥ २ ॥

    अयि जगदम्ब मदम्ब कदम्ब वनप्रियवासिनि हासरते
    शिखरि शिरोमणि तुङ्गहिमलय शृङ्गनिजालय मध्यगते ।
    मधुमधुरे मधुकैटभगञ्जिनि कैटभभञ्जिनि रासरते
    जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥ ३ ॥

    अयि शतखण्ड विखण्डितरुण्ड वितुण्डितशुण्द गजाधिपते
    रिपुगजगण्ड विदारणचण्ड पराक्रमशुण्ड मृगाधिपते ।
    निजभुजदण्ड निपातितखण्ड विपातितमुण्ड भटाधिपते
    जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥ ४ ॥

    अयि रणदुर्मद शत्रुवधोदित दुर्धरनिर्जर शक्तिभृते
    चतुरविचार धुरीणमहाशिव दूतकृत प्रमथाधिपते ।
    दुरितदुरीह दुराशयदुर्मति दानवदुत कृतान्तमते
    जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥ ५ ॥

    अयि शरणागत वैरिवधुवर वीरवराभय दायकरे
    त्रिभुवनमस्तक शुलविरोधि शिरोऽधिकृतामल शुलकरे ।
    दुमिदुमितामर धुन्दुभिनादमहोमुखरीकृत दिङ्मकरे
    जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥ ६ ॥

    अयि निजहुङ्कृति मात्रनिराकृत धूम्रविलोचन धूम्रशते
    समरविशोषित शोणितबीज समुद्भवशोणित बीजलते ।
    शिवशिवशुम्भ निशुम्भमहाहव तर्पितभूत पिशाचरते
    जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥ ७ ॥

    धनुरनुषङ्ग रणक्षणसङ्ग परिस्फुरदङ्ग नटत्कटके
    कनकपिशङ्ग पृषत्कनिषङ्ग रसद्भटशृङ्ग हताबटुके ।
    कृतचतुरङ्ग बलक्षितिरङ्ग घटद्बहुरङ्ग रटद्बटुके
    जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥ ८ ॥

    सुरललना ततथेयि तथेयि कृताभिनयोदर नृत्यरते
    कृत कुकुथः कुकुथो गडदादिकताल कुतूहल गानरते ।
    धुधुकुट धुक्कुट धिंधिमित ध्वनि धीर मृदंग निनादरते
    जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥ ९ ॥

    जय जय जप्य जयेजयशब्द परस्तुति तत्परविश्वनुते
    झणझणझिञ्झिमि झिङ्कृत नूपुरशिञ्जितमोहित भूतपते ।
    नटित नटार्ध नटी नट नायक नाटितनाट्य सुगानरते
    जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥ १० ॥

    अयि सुमनःसुमनःसुमनः सुमनःसुमनोहरकान्तियुते
    श्रितरजनी रजनीरजनी रजनीरजनी करवक्त्रवृते ।
    सुनयनविभ्रमर भ्रमरभ्रमर भ्रमरभ्रमराधिपते
    जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥ ११ ॥

    सहितमहाहव मल्लमतल्लिक मल्लितरल्लक मल्लरते
    विरचितवल्लिक पल्लिकमल्लिक झिल्लिकभिल्लिक वर्गवृते ।
    शितकृतफुल्ल समुल्लसितारुण तल्लजपल्लव सल्ललिते
    जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥ १२ ॥

    अविरलगण्ड गलन्मदमेदुर मत्तमतङ्ग जराजपते
    त्रिभुवनभुषण भूतकलानिधि रूपपयोनिधि राजसुते ।
    अयि सुदतीजन लालसमानस मोहन मन्मथराजसुते
    जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥ १३ ॥

    कमलदलामल कोमलकान्ति कलाकलितामल भाललते
    सकलविलास कलानिलयक्रम केलिचलत्कल हंसकुले ।
    अलिकुलसङ्कुल कुवलयमण्डल मौलिमिलद्बकुलालिकुले
    जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥ १४ ॥

    करमुरलीरव वीजितकूजित लज्जितकोकिल मञ्जुमते
    मिलितपुलिन्द मनोहरगुञ्जित रञ्जितशैल निकुञ्जगते ।
    निजगणभूत महाशबरीगण सद्गुणसम्भृत केलितले
    जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥ १५ ॥

    कटितटपीत दुकूलविचित्र मयुखतिरस्कृत चन्द्ररुचे
    प्रणतसुरासुर मौलिमणिस्फुर दंशुलसन्नख चन्द्ररुचे
    जितकनकाचल मौलिमदोर्जित निर्भरकुञ्जर कुम्भकुचे
    जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥ १६ ॥

    विजितसहस्रकरैक सहस्रकरैक सहस्रकरैकनुते
    कृतसुरतारक सङ्गरतारक सङ्गरतारक सूनुसुते ।
    सुरथसमाधि समानसमाधि समाधिसमाधि सुजातरते ।
    जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥ १७ ॥

    पदकमलं करुणानिलये वरिवस्यति योऽनुदिनं सुशिवे
    अयि कमले कमलानिलये कमलानिलयः स कथं न भवेत् ।
    तव पदमेव परम्पदमित्यनुशीलयतो मम किं न शिवे
    जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥ १८ ॥

    कनकलसत्कलसिन्धुजलैरनुषिञ्चति तेगुणरङ्गभुवम्
    भजति स किं न शचीकुचकुम्भतटीपरिरम्भसुखानुभवम् ।
    तव चरणं शरणं करवाणि नतामरवाणि निवासि शिवम्
    जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥ १९ ॥

    तव विमलेन्दुकुलं वदनेन्दुमलं सकलं ननु कूलयते
    किमु पुरुहूतपुरीन्दु मुखी सुमुखीभिरसौ विमुखीक्रियते ।
    मम तु मतं शिवनामधने भवती कृपया किमुत क्रियते
    जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥ २० ॥

    अयि मयि दीन दयालुतया कृपयैव त्वया भवितव्यमुमे
    अयि जगतो जननी कृपयासि यथासि तथानुमितासिरते ।
    यदुचितमत्र भवत्युररीकुरुतादुरुतापमपाकुरुते
    जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥ २१ ॥

  • 8:23 AM (IST)
    Posted by Arti Azad

    साल में 4 बार आती है नवरात्रि

    शक्ति के उपासकों को नवरात्रि महापर्व का साल भर बेसब्री से इंतजार रहता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि नवरात्रि साल में कितनी बार आती है। बता दें कि साल में चार बार नवरात्रि का त्योहार मनाया जाता है, जिसमें से चैत्र नवरात्रि और आश्विन माह में आने वाली शारदीय नवरात्रि सबसे ज्यादा मशहूर है। बाकी के दो नवरात्रों को गुप्त नवरात्रि के नाम से जाना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक, तंत्र मंत्र सीखने वाले साधकों के लिए गुप्त नवरात्रि बेहद महत्वपूर्ण होती है। 

     

  • 8:20 AM (IST)
    Posted by Arti Azad

    नवरात्रि के पहले दिन पहनें इस रंग के कपड़े

    नवरात्रि के पहले दिन मां शैलपुत्री का पूजन किया जाता है। इस दिन पूजा के समय आपको पीले वस्त्र पहनना चाहिए। नवरात्र के पहले दिन पीले रंग के वस्त्र पहनने से मां शैलपुत्री की विशेष कृपा प्राप्त होती है। पीला रंग ऊर्जा, पॉजिटिविटी और खुशहाली का प्रतीक है। 

  • 7:35 AM (IST)
    Posted by Arti Azad

    Chaitra Navratri 2026: नवरात्रि के पहले दिन करें मां शैलपुत्री की आरती

    मां शैलपुत्री की आरती 

    शैलपुत्री मां बैल असवार। करें देवता जय जयकार।।

    शिव शंकर की प्रिय भवानी।

    तेरी महिमा किस ने ना जानी।।

    पार्वती तू उमा कहलावे।

    जो तुझे सिमरे सो सुख पावे।।

    ऋद्धि-सिद्धि परवान करे तू।

    दया करे धनवान करे तू।।

    सोमवार को शिव संग प्यारी।

    आरती तेरी जिसने उतारी।।

    उसकी सगरी आस पुजा दो।

    सगरे दुख तकलीफ मिला दो।।

    घी का सुंदर दीप जला के।

    गोला गरी का भोग लगा के।।

    श्रद्धा भाव से मंत्र गाएं।

    प्रेम सहित फिर शीश झुकाएं।।

    जय गिरिराज किशोरी अंबे।

    शिव मुख चंद्र चकोरी अंबे।।

    मनोकामना पूर्ण कर दो।

    भक्त सदा सुख संपत्ति भर दो।।

  • 7:16 AM (IST)
    Posted by Arti Azad

    नवरात्रि के पहले दिन इस विधि से करें मां शैलपुत्री की पूजा

    1. नवरात्रि के पहले दिन मां दुर्गा के शैलपुत्री स्वरूप की आराधना की जाती है। मां शैलपुत्री के पूजन की विधि यहां जानिए। 
    2. इसके लिए सबसे पहले सुबह स्नान करके साफ-सुथरे कपड़े पहनें और पूजा घर को सजाएं। 
    3. इसके बाद मां शैलपुत्री की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें। 
    4. अब कलश या घट स्थापना करें और उसमें जल, आम के पत्ते और नारियल रखें। 
    5. इसके बाद मां की मूर्ति को गंगाजल से स्नान कराएं। 
    6. अब रोली, अक्षत, फूल और धूप-दीप माता को अर्पित करें। 
    7. मां शैलपुत्री की आरती के लिए घी का दीपक जलाएं। 
    8. अंत में मां की आरती करें और प्रसाद चढ़ाएं। भोग में सफेद रंग की वस्तुएं अवश्य चढ़ाएं। 
  • 7:10 AM (IST)
    Posted by Arti Azad

    Chaitra Navratri 2026: नवरात्रि के पहले दिन करें इस कवच का पाठ

    ओमकार: मेंशिर: पातुमूलाधार निवासिनी।
    हींकार: पातु ललाटे बीजरूपा महेश्वरी॥

    श्रींकारपातुवदने लावाण्या महेश्वरी ।
    हुंकार पातु हदयं तारिणी शक्ति स्वघृत।

    फट्कार पात सर्वागे सर्व सिद्धि फलप्रदा॥

  • 6:52 AM (IST)
    Posted by Arti Azad

    नवरात्रि के पहले दिन की आरती (Chaitra Navratri 1st Day Aarti)

    मां शैलपुत्री की आरती

    शैलपुत्री मां बैल असवार। करें देवता जय जयकार।।

    शिव शंकर की प्रिय भवानी।

    तेरी महिमा किस ने ना जानी।।

    पार्वती तू उमा कहलावे।

    जो तुझे सिमरे सो सुख पावे।।

    ऋद्धि-सिद्धि परवान करे तू।

    दया करे धनवान करे तू।।

    सोमवार को शिव संग प्यारी।

    आरती तेरी जिसने उतारी।।

    उसकी सगरी आस पुजा दो।

    सगरे दुख तकलीफ मिला दो।।

    घी का सुंदर दीप जला के।

    गोला गरी का भोग लगा के।।

    श्रद्धा भाव से मंत्र गाएं।

    प्रेम सहित फिर शीश झुकाएं।।

    जय गिरिराज किशोरी अंबे।

    शिव मुख चंद्र चकोरी अंबे।।

    मनोकामना पूर्ण कर दो।

    भक्त सदा सुख संपत्ति भर दो।।

  • 6:30 AM (IST)
    Posted by Arti Azad

    Shri Durga Stuti: श्री दुर्गा स्तुति

    श्री दुर्गा स्तुति

    जय जग जननी आदि भवानी,
    जय महिषासुर मारिणी मां ।
    उमा रमा गौरी ब्रह्माणी,
    जय त्रिभुवन सुख कारिणी मां ।।

    हे महालक्ष्मी हे महामाया,
    तुम में सारा जगत समाया ।
    तीन रूप तीनों गुण धारिणी,
    तीन काल त्रैलोक बिहारिणी ।।

    हरि हर ब्रह्मा इंद्रादिक के,
    सारे काज संवारिणी माँ ।
    जय जग जननी आदि भवानी,
    जय महिषासुर मारिणी मां

    शैल सुता मां ब्रह्मचारिणी,
    चंद्रघंटा कूष्मांडा माँ ।
    स्कंदमाता कात्यायनी माता,
    शरण तुम्हारी सारा जहां।।

    कालरात्रि महागौरी तुम हो
    सकल रिद्धि सिद्धि धारिणी मां
    जय जग जननी आदि भवानी
    जय महिषासुर मारिणी माँ

    अजा अनादि अनेका एका,
    आद्या जया त्रिनेत्रा विद्या।
    नाम रूप गुण कीर्ति अनंता,
    गावहिं सदा देव मुनि संता।।

    अपने साधक सेवक जन पर,
    सुख यश वैभव वारिणी मां ।।
    जय जगजननी आदि भवानी,
    जय महिषासुर मारिणी मां।।

    दुर्गति नाशिनी दुर्मति हारिणी दुर्ग निवारण दुर्गा मां,
    भवभय हारिणी भवजल तारिणी सिंह विराजिनी दुर्गा मां ।
    पाप ताप हर बंध छुड़ाकर जीवो की उद्धारिणी माँ,
    जय जग जननी आदि भवानी जय महिषासुर मारिणी माँ।।

  • 6:25 AM (IST)
    Posted by Arti Azad

    श्री दुर्गा चालीसा (Shri Durga Chalisa)

    नमो नमो दुर्गे सुख करनी...

    नमो नमो दुर्गे सुख करनी।
    नमो नमो दुर्गे दुःख हरनी॥

    निरंकार है ज्योति तुम्हारी।
    तिहूं लोक फैली उजियारी॥ शशि ललाट मुख महाविशाला।
    नेत्र लाल भृकुटि विकराला॥

    रूप मातु को अधिक सुहावे।
    दरश करत जन अति सुख पावे॥

    तुम संसार शक्ति लै कीना।
    पालन हेतु अन्न धन दीना॥

    अन्नपूर्णा हुई जग पाला।
    तुम ही आदि सुन्दरी बाला॥

    प्रलयकाल सब नाशन हारी।
    तुम गौरी शिवशंकर प्यारी॥

    शिव योगी तुम्हरे गुण गावें।
    ब्रह्मा विष्णु तुम्हें नित ध्यावें॥

    रूप सरस्वती को तुम धारा।
    दे सुबुद्धि ऋषि मुनिन उबारा॥

    धरयो रूप नरसिंह को अम्बा।
    परगट भई फाड़कर खम्बा॥

    रक्षा करि प्रह्लाद बचायो।
    हिरण्याक्ष को स्वर्ग पठायो॥

    लक्ष्मी रूप धरो जग माहीं।
    श्री नारायण अंग समाहीं॥

    क्षीरसिन्धु में करत विलासा।
    दयासिन्धु दीजै मन आसा॥

    हिंगलाज में तुम्हीं भवानी।
    महिमा अमित न जात बखानी॥

    मातंगी अरु धूमावति माता।
    भुवनेश्वरी बगला सुख दाता॥

    श्री भैरव तारा जग तारिणी।
    छिन्न भाल भव दुःख निवारिणी॥

    केहरि वाहन सोह भवानी।
    लांगुर वीर चलत अगवानी॥

    कर में खप्पर खड्ग विराजै।
    जाको देख काल डर भाजै॥

    सोहै अस्त्र और त्रिशूला।
    जाते उठत शत्रु हिय शूला॥

    नगरकोट में तुम्हीं विराजत।
    तिहुँलोक में डंका बाजत॥

    शुम्भ निशुम्भ दानव तुम मारे।
    रक्तन बीज शंखन संहारे॥

    महिषासुर नृप अति अभिमानी।
    जेहि अघ भार मही अकुलानी॥

    रूप कराल कालिका धारा।
    सेन सहित तुम तिहि संहारा॥

    परी गाढ़ सन्तन पर जब जब।
    भई सहाय मातु तुम तब तब॥

    आभा पुरी अरु बासव लोका।
    तब महिमा सब रहें अशोका॥

    ज्वाला में है ज्योति तुम्हारी।
    तुम्हें सदा पूजें नर-नारी॥

    प्रेम भक्ति से जो यश गावें।
    दुःख दारिद्र निकट नहिं आवें॥

    ध्यावे तुम्हें जो नर मन लाई।
    जन्म-मरण ताकौ छुटि जाई॥

    जोगी सुर मुनि कहत पुकारी।
    योग न हो बिन शक्ति तुम्हारी॥

    शंकर आचारज तप कीनो।
    काम क्रोध जीति सब लीनो॥

    निशिदिन ध्यान धरो शंकर को।
    काहु काल नहिं सुमिरो तुमको॥

    शक्ति रूप का मरम न पायो।
    शक्ति गई तब मन पछितायो॥

    शरणागत हुई कीर्ति बखानी।
    जय जय जय जगदम्ब भवानी॥

    भई प्रसन्न आदि जगदम्बा।
    दई शक्ति नहिं कीन विलम्बा॥

    मोको मातु कष्ट अति घेरो।
    तुम बिन कौन हरै दुःख मेरो॥

    आशा तृष्णा निपट सतावें।
    रिपु मुरख मोही डरपावे॥

    शत्रु नाश कीजै महारानी।
    सुमिरौं इकचित तुम्हें भवानी॥

    करो कृपा हे मातु दयाला।
    ऋद्धि-सिद्धि दै करहु निहाला।।

    जब लगि जियऊं दया फल पाऊं।
    तुम्हरो यश मैं सदा सुनाऊं॥

    श्री दुर्गा चालीसा जो कोई गावै।
    सब सुख भोग परमपद पावै॥

    देवीदास शरण निज जानी।
    करहु कृपा जगदम्ब भवानी॥

    ॥इति श्रीदुर्गा चालीसा सम्पूर्ण॥

    यहां से डाउनलोड करें दुर्गा चालीसा पीडीएफ

  • 6:21 AM (IST)
    Posted by Arti Azad

    नवार्ण मंत्र

    शक्ति के उपासक नवरात्रि पर नवार्ण मंत्र का जाप अधिक से अधिक अवश्‍य करें।

    मंत्र 'ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चै' 

  • 6:18 AM (IST)
    Posted by Arti Azad

    मां दुर्गा की आरती (Maa Durga Navratri Aarti)

    जय अंबे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी...

    जय अंबे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी।
    तुमको निशिदिन ध्यावत, हरि ब्रह्मा शिवरी॥ ओम जय अंबे गौरी

    मांग सिन्दूर विराजत, टीको मृगमद को।
    उज्जवल से दो‌उ नैना, चन्द्रवदन नीको॥ ओम जय अंबे गौरकनक समान कलेवर, रक्ताम्बर राजै।
    रक्तपुष्प गल माला, कण्ठन पर साजै॥ ओम जय अंबे गौरी

    केहरि वाहन राजत, खड्ग खप्परधारी।
    सुर-नर-मुनि-जन सेवत, तिनके दुखहारी॥ ओम जय अंबे गौरी

    कानन कुण्डल शोभित, नासाग्रे मोती। कोटिक चन्द्र दिवाकर,
    सम राजत ज्योति॥ ओम जय अंबे गौरी

    शुम्भ-निशुम्भ बिदारे, महिषासुर घाती। धूम्र विलोचन नैना,
    निशिदिन मदमाती॥ ओम जय अंबे गौरी

    चण्ड-मुण्ड संहारे, शोणित बीज हरे।
    मधु-कैटभ दो‌उ मारे, सुर भयहीन करे॥ ओम जय अंबे गौरी

    ब्रहमाणी रुद्राणी तुम कमला रानी।
    आगम-निगम-बखानी, तुम शिव पटरानी॥ ओम जय अंबे गौरी

    चौंसठ योगिनी मंगल गावत, नृत्य करत भैरूं।
    बाजत ताल मृदंगा, अरु बाजत डमरु॥ ओम जय अंबे गौरी

    तुम ही जग की माता, तुम ही हो भरता।
    भक्‍तन की दु:ख हरता, सुख सम्पत्ति करता॥ ओम जय अंबे गौरी

    भुजा चार अति शोभित, वर-मुद्रा धारी।
    मनवान्छित फल पावत, सेवत नर-नारी॥ ओम जय अंबे गौरी

    कंचन थाल विराजत, अगर कपूर बाती।
    श्रीमालकेतु में राजत, कोटि रतन ज्योति॥ ओम जय अंबे गौरी

    श्री अम्बेजी की आरती, जो को‌ई नर गावै।
    कहत शिवानन्द स्वामी, सुख सम्पत्ति पावै॥ ओम जय अंबे गौरी, ओम जय अंबे गौरी

  • 6:16 AM (IST)
    Posted by Arti Azad

    दुर्गा मां के मंत्र (Maa Durga Ke Mantra)

    1. सर्वमंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके।

    शरण्ये त्र्यंबके गौरी नारायणि नमोऽस्तुते।।

    2. ॐ जयन्ती मंगला काली भद्रकाली कपालिनी।

    दुर्गा क्षमा शिवा धात्री स्वाहा स्वधा नमोऽस्तुते।।

    3. या देवी सर्वभूतेषु शक्तिरूपेण संस्थिता,

    नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।

    या देवी सर्वभूतेषु लक्ष्मीरूपेण संस्थिता,

    नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।

    या देवी सर्वभूतेषु तुष्टिरूपेण संस्थिता,

    नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।

    या देवी सर्वभूतेषु मातृरूपेण संस्थिता,

    नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।

    या देवी सर्वभूतेषु दयारूपेण संस्थिता,

    नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।

    या देवी सर्वभूतेषु बुद्धिरूपेण संस्थिता,

    नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।

    या देवी सर्वभूतेषु शांतिरूपेण संस्थिता,

    नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।

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