Dussehra Puja Vidhi, Mantra: आज अश्विन शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि गुरुवार का दिन है। दशमी तिथि आज शाम 7 बजकर 11 मिनट तक रहेगी। आज जीत का प्रतीक ‘विजयदशमी’ का त्योहार मनाया जायेगा। पुराणों के अनुसार रावण पर भगवान श्री राम की जीत के उपलक्ष्य में विजयदशमी का ये त्योहार मनाया जाता है। आज अपना कोई खास काम करने से आपकी जीत सुनिश्चित होती है। आपको बता दूं कि आज दोपहर 1 बजकर 46 मिनट से लेकर दोपहर 2 बजकर 33 मिनट तक विजय मुहूर्त रहेगा। इस बीच आप कोई भी कार्य करके अपनी जीत सुनिश्चित कर सकते हैं। क्या आप जानते हैं कि विजयदशमी साल की तीन सबसे शुभ तिथियों में से एक है। अन्य दो तिथियां चैत्र शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा और कार्तिक शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा है।
दशहरा पर देवी अपराजिता की पूजा विधि (Dussehra Puja Vidhi, Mantra)
विजयदशमी के दिन अपराजिता की पूजा करने का विधान है। आज अपराजिता की पूजा से सालभर तक कार्यों में जीत हासिल होती है और किसी भी काम में रूकावट नहीं आती। आज दोपहर बाद घर के ईशान कोण, यानि उत्तर-पूर्व दिशा को अच्छे से साफ करके, उसे गोबर से लीपकर, उसके ऊपर चंदन से आठ पत्तियों वाला कमल का फूल बनाना चाहिए और संकल्प करना चाहिए-
संकल्प मंत्र- “मम सकुटुम्बस्य क्षेम सिद्धयर्थे अपराजिता पूजनं करिष्ये”
अगर आप ये मंत्र न पढ़ पायें, तो आपको इस प्रकार कहना चाहिए कि हे देवी ! मैं अपने परिवार के साथ अपने कार्य को सिद्ध करने के लिये और विजय पाने के लिये आपकी पूजा कर रहा हूं। इस प्रकार कहकर उस कमल की आकृति के बीच में अपराजिता का पौधा रखना चाहिए। इसके बाद अपराजिता की दाहिनी ओर जया और बायीं ओर विजया शक्ति का आह्वाहन करना चाहिए। इसके बाद तीनों को प्रणाम करते हुए क्रमशः ये कहना चाहिए-
- ‘अपराजितायै नमः’
- ‘जयायै नमः’
- ‘विजयायै नमः’
इस तरह मंत्र कहते हुए उनकी षोडशोपचार, यानि 16 उपचारों के साथ पूजा करनी चाहिए और प्रार्थना करनी चाहिए- ‘हे देवी, यथाशक्ति जो पूजा मैंने अपनी रक्षा के लिये की है, उसे स्वीकार कीजिये।‘ इस प्रकार पूजा के बाद देवी मां से अपने स्थान पर वापस जाने का आग्रह करें। अपराजिता पूजा के बाद अब बात करेंगे शमी पूजा की।
दशहरा पर शमी पूजा की विधि (Dussehra Par Shami Puja Ki Vidhi)
शमी पूजा के लिये गांव की सीमा पर जाकर उत्तर-पूर्व दिशा में शमी के पौधे की पूजा करनी चाहिए। सबसे पहले शमी की जड़ में लोटे से साफ जल चढ़ाना चाहिए और घी का दीपक जलाना चाहिए। ऐसा करने से व्यक्ति को सालभर तक यात्राओं में लाभ मिलता है, यात्रा में किसी प्रकार की बाधा नहीं आती और काम में सफलता मिलती है। शमी की पूजा के बाद सीमा उल्लंघन करना चाहिए, यानि अपने गांव या शहर की सीमा को लांघकर बाहर जाना चाहिये। इससे जीवन में उत्साह और प्रगति बनी रहती है।
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)
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