हर साल भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि से गणपति उत्सव आरंभ होता है। इस दिन भव्य और धूमधाम तरीके से गणपति बप्पा की मूर्ति को श्रद्धालु अपने घर में लाकर स्थापित करते हैं। पूरे 10 दिनों तक पूरे देश में गणपति उत्सव की धूम देखने को मिलती है। खासतौर से महाराष्ट्र में गणपति उत्सव की खास रौनक देखने को मिलती है। यहां-यहां दूर से भक्तगण गणेश महोत्सव देखने आते हैं। वहीं पंडालों के अलावा लोग अपने घरों में भी बप्पा की प्रतिमा को स्थापित करते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, विधि-विधान के साथ गणेश जी को अपने घर लाकर स्थापित करने से सुख, समृद्धि और शुभता का वास होता है। बस गणपति जी की मूर्ति स्थापना करने से पहले इन बातों का ध्यान रखना जरूरी होता है वरना आपकी पूजा अधूरी रह सकती है।
गणपति स्थापना के समय जरूर रखें इन बातों का ध्यान
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साफ-सफाई- गणेश चतुर्थी से पहले पूरे घर और मंदिर की अच्छे से साफ-सफाई कर लें। विशेष रूप से जहां बप्पा की मूर्ति स्थापित करनी है उस जगह को स्वच्छ और गंगाजल छिड़कर शुद्ध कर लें। अगर आप भी गणपति स्थापना करने जा रहे हैं तो इन पूजा सामग्री को आज ही घर ले आएं।
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दिशा का रखें ध्यान- गणपति स्थापना करने से पहले दिशा का खास ध्यान रखें। गणेश जी की मूर्ति उत्तर-पूर्व दिशा (ईशान कोण) में स्थापित करें। मूर्ति को इस तरह से स्थापित करें की पूजा करते समय आपका मुख उत्तर या पूर्व दिशा में रहें।
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मूर्ति का स्वरूप- गणेश जी मूर्ति खंडित न हो इस बात का ध्यान रखें। इसके अलावा गणेश जी की ऐसी मूर्ति लाएं जिसमें बप्पा मूषक पर विराजमान हो और उनके हाथ में मोदक हो। साथ ही एक हाथ आशीर्वाद की मुद्रा में हो।
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सात्विकता का रखें ध्यान- गणपति बप्पा जितने दिन घर में उतने दिन सात्विक भोजन ही बनाएं। इसके साथ ही परिवार के सभी सदस्य सात्विक आहार ही ग्रहण करें। प्याज-लहसुन व तामसिक भोजन का सेवन बिल्कुल भी न करें।
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घर को खाली न छोड़ें- 1.5, 3, 5 या 10 दिन जितने दिन बप्पा आपके घर में विराजमान हैं उतने दिन घर को कभी खाली न छोड़ें और न ही ताला लगाकर रखें। जितने दिन (1.5, 3, 5 या 10 दिन) बप्पा आपके घर में विराजेंगे, घर को कभी भी ताला लगाकर खाली न छोड़ें। घर में सात्विक माहौल बनाए रखें और प्याज-लहसुन व तामसिक भोजन का सेवन न करें।
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नियमित रूप से पूजा करें- अगर आपने घर में गणपति स्थापना की है तो नियमित रूप से बप्पा की पूजा-अर्चना करें। गणेश जी को दिन में कम से कम 3 बार भोग लगाएं। बप्पा को मोदक अति प्रिय है तो मोदक का भोग अवश्य लगाएं।
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तुलसी दल न चढ़ाएं- गणेश जी की पूजा में तुलसी वर्जित होता है तो बप्पा को तुलसी न चढ़ाएं। पूजा में केवल दूर्वा, शमी के पत्ते, लाल फूल और मोदक का ही प्रयोग करें।
इन नियमों का भी करें पालन
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बप्पा का सीधा जमीन पर न रखें। पहले एक अच्छा सा ऊंचा स्थापना का स्थान बनाएं इसके बाद लकड़ी की चौकी पर पीला या लाल रंग का वस्त्र बिछाकर गणपति जी को स्थापित करें।
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घर के लिए गणेश जी की वो मूर्ति शुभ मानी जाती है जिसमें बप्पा की सूंड बाईं ओर हो। बाईं ओर को मुड़ी हुई सूंड वाले गणेश जी के रूप को वक्रतुंड कहा जाता है और ये भगवान गणेश का शुभ स्वरूप है। वहीं वास्तु के अनुसार गणेश जी की सूंड का दाईं ओर को मुड़ा होना गृहस्थ लोगों के लिए अच्छा नहीं होता क्योंकि ऐसे गणेश जी की पूजा करने के विधान कठोर हैं।
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इस बात का भी ख्याल रखें कि गणेश जी की प्रतिमा मिट्टी से बनी हो। प्लास्टिक आदि की मूर्तियां घर में स्थापित नहीं करनी चाहिए वरना सुखद परिणाम आपको पूजा के बाद भी प्राप्त नहीं होंगे।
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सिंदूरी, सफेद और पीले रंग की गणेश प्रतिमा को शुभ माना जाता है। तो आप इन रंगों की गणेश जी की प्रतिमा घर ला सकते हैं।
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)
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