1. Hindi News
  2. धर्म
  3. त्योहार
  4. गौरी व्रत 25 जुलाई से हो रहा है शुरू, जानिए इस व्रत की पूजा विधि, शुभ मुहूर्त और महत्व

गौरी व्रत 25 जुलाई से हो रहा है शुरू, जानिए इस व्रत की पूजा विधि, शुभ मुहूर्त और महत्व

 Written By: Laveena Sharma
 Published : Jul 24, 2026 01:37 pm IST,  Updated : Jul 24, 2026 01:37 pm IST

गौरी व्रत देवशयनी एकादशी से शुरू होकर गुरु पूर्णिमा तक चलता है। इस 5 दिवसीय व्रत को मोरकट व्रत के नाम से भी जाना जाता है। ये व्रत विशेषकर कुंवारी कन्याओं द्वारा सुयोग्य वर की प्राप्ति के लिए रखा जाता है।

gauri vrat- India TV Hindi
गौरी व्रत 2026 Image Source : INDIA TV

गौरी व्रत मुख्य रूप से गुजरात में लोकप्रिय है। यह व्रत अविवाहित लड़कियों द्वारा अच्छे पति की प्राप्ति के लिए रखा जाता है। इस व्रत की शुरुआत देवशयनी एकादशी से होती है और समापन गुरु पूर्णिमा के दिन होता है। इस व्रत में माता गौरी की पूजा होती है। पांच दिनों तक रखे जाना वाला यह व्रत माता पार्वती और भगवान शिव की विशेष कृपा दिलाता है। कई जगह इस व्रत को सुहागिन महिलाएं भी रखती हैं। इस साल यह उपवास 25 जुलाई से 29 जुलाई तक रखा जाएगा। यहां आप जानेंगे गौरी व्रत की पूजा का मुहूर्त, विधि और महत्व।

गौरी व्रत 2026 पूजा मुहूर्त

  • ब्रह्म मुहूर्त - 04:16 AM से 04:57 AM
  • प्रातः सन्ध्या - 04:36 AM से 05:38 AM
  • अभिजित मुहूर्त -12:00 PM से 12:55 PM
  • विजय मुहूर्त - 02:44 PM से 03:38 PM
  • गोधूलि मुहूर्त - 07:17 PM से 07:37 PM
  • सायाह्न सन्ध्या - 07:17 PM से 08:19 PM
  • अमृत काल - 09:41 PM से 11:29 PM

गौरी व्रत की पूजा विधि

  • गौरी व्रत के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें। 
  • पूजा स्थान के पास एक चौकी पर लाल वस्त्र बिछाकर उस पर शिव परिवार की प्रतिमा स्थापित करें।
  • माता की प्रतिमा के समक्ष एक कलश भी स्थापित करें। उसमें आम के पत्ते और नारियल रखें।
  • सबसे पहले गणेश भगवान की आराधना करें।
  • फिर माता को हल्दी, बिंदी, वस्त्र, कुमकुम, चूड़ी और अक्षत अर्पित करें।
  • इसके बाद गौरी व्रत की कथा पढ़ें या सुनें।
  • अंत में माता की आरती करके उन्हें भोग अर्पित करें।
  • दिनभर व्रत रखें और रात में एक बार फलाहार या सात्विक भोजन ग्रहण करें।

गौरी व्रत का महत्व

मान्यताओं अनुसार गौरी व्रत रखने से अविवाहित कन्याओं को अच्छे वर की प्राप्ति होती है, तो वहीं सुहागिन महिलाएं ये व्रत अखंड सौभाग्य की प्राप्ति के लिए रखती हैं। कहते हैं इस व्रत को रखने से वैवाहिक जीवन में प्रेम और सौहार्द बना रहता है। साथ ही घर में सुख-शांति आती है।

माता गौरी को प्रसन्न करने के उपाय

  • गौरी व्रत में माता को सिंदूर, चूड़ी, हल्दी-कुमकुम, बिंदी, काजल आदि सुहाग की वस्तुएं जरूर अर्पित करें।
  • साथ ही 'ऊँ गौरी त्रिपुरसुंदरी नमः' मंत्र का जाप करें।
  • इन 5 दिनों में छोटी कन्याओं को भोजन जरूर करवाएं।

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

यह भी पढ़ें:

चातुर्मास में 3 राशियों का होगा भाग्योदय, मिलेगी मनचाही नौकरी, कारोबार भी चमकेगा!

Advertisement

India TV हिंदी न्यूज़ के साथ रहें हर दिन अपडेट, पाएं देश और दुनिया की हर बड़ी खबर। Festivals से जुड़ी लेटेस्ट खबरों के लिए अभी विज़िट करें धर्म