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Holika Dahan 2026 Puja Vidhi: आज जलाई जाएगी होली, जानें होलिका दहन की पूजा विधि

 Written By: Vineeta Mandal
 Published : Mar 02, 2026 11:17 am IST,  Updated : Mar 02, 2026 11:19 am IST

Holika Dahani 2026: आज होलिका दहन मनाया जा रहा है। हिंदू धर्म में इस दिन का विशेष महत्व बताया गया है। तो आइए जानते हैं कि होलिका दहन की पूजा विधि और कथा क्या है।

होलिका दहन 2026- India TV Hindi
होलिका दहन 2026 Image Source : INDIA TV

Holika Dahan 2026 Puja Vidhi: आज यानी 2 मार्च को होलिका दहन किया जाएगा। पूर्णिमा तिथि का आरंभ आज शाम 5 बजकर 56 मिनट से आरंभ होगा। बता दें कि हर साल फाल्गुन पूर्णिमा तिथि के दिन होली दहन किया जाता है। होलिका दहन को बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक माना जाता है। होलिका का ये त्यौहार बहुत पुराने समय से मनाया जा रहा है । इसका आरंभिक शब्दरूप 'होलाका' बताया गया है। वहीं कुछ ग्रंथों में होलिका को 'हुताशनी' कहा गया है। तो आइए जानते हैं कि होलिका दहन की पूजा कैसे करनी चाहिए और इसे मनाने के पीछे की मान्यता क्या है।

होलिका दहन पूजा विधि

  • घर के बाहर या आसपास खुले स्थान पर लकड़िया और उपले इक्ट्ठा करें और होलिका की मूर्ति या संरचना बनाएं।
  • इसके बाद उत्तर या पूर्व दिशा की तरफ मुंह कर के बैठ जाएं। भगवान नरसिंहा और भक्त प्रह्लाद का ध्यान करें।
  • अब पानी में थोड़ा सा घी और दूध मिलाकर होलिका दहन वाले स्थान पर अर्पित करें।
  • जल के बाद चावल, फूल आदि पूजा सामग्री अर्पित करें। 
  • इसके बाद गेहूं की सात बालियां और गोबर से बने उपले भी अर्पित करें।
  • कच्चे सूत से होलिका के चारों ओर तीन या सात बार परिक्रमा करें।
  • परिक्रमा करने के बाद होलिका की आग में जौ या गेहूं की बाली, चना, मूंग, चावल, नारियल, गन्ना, बताशे आदि चीजें भी अर्पित कर दें।
  • होली की आग में जौ की बालियों को भूनकर प्रसाद के रूप में  खाएं और सभी में बांटें भी।
  • होलिका दहन के बाद सबको गुलाल का टीका भी जरूर लगाएं।

होलिका दहन क्यों मनाया जाता है?

होलिका हिरण्यकश्यप की बहन थी और उसे आग में ना जलने का वरदान प्राप्त था, जबकि हिरण्यकश्यप के पुत्र प्रह्लाद भगवान विष्णु के परम भक्त थे, जो कि हिरण्यकश्यप को बिल्कुल भी पसंद नहीं था। इसलिए एक दिन हिरण्यकश्यप ने अपने बेटे की विष्णु भक्ति से परेशान होकर उसे होलिका के साथ आग में जलने के लिए बिठा दिया, लेकिन भगवान विष्णु की कृपा से भक्त प्रह्लाद बच गए और होलिका आग में जल गई। तभी से होलिका दहन का ये त्यौहार मनाया जाने लगा। इस दिन होलिका दहन के समय जलती हुई आग मेंवसे भक्त प्रह्लाद के प्रतीक स्वरूप मिट्टी में दबाये गये डंडे को निकाला जाता है, जबकि डंडे के आस-पास लगी हुई लकड़ियों को जलने दिया जाता है।

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

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