जितिया व्रत संतान की लंबी उम्र और सुखी जीवन की कामना से रखा जाता है। इस व्रत में महिलाएं करीब 24 घंटे तक निर्जला उपवास करती हैं। यह व्रत तीन दिनों तक चलता है, जिसमें पहले दिन नहाय खाय, दूसरे दिन निर्जला उपवास और तीसरे दिन पारण किया जाता है। जितिया के पारण में कुछ खास मौसमी साग-सब्जियों और अनाज को शामिल करने की परंपरा है। इसके साथ ही यहां पढ़िए जितिया के लोकगीत।
जितिया व्रत पारण में क्या-क्या खाना चाहिए?
नोनी का साग: जितिया की पारंपरिक थाली में नोनी साग का खास महत्व है। इससे साग के अलावा पकौड़े और दाल भी बनाई जाती है। नोनी साग में एंटीबैक्टीरियल और एंटीफंगल गुण पाए जाने की बात कही जाती है। पारण के दौरान इसे हल्के भोजन के रूप में शामिल किया जा सकता है।
अरबी: अरबी को बिहार के कई हिस्सों में कच्चू भी कहा जाता है। यह जमीन के अंदर उगने वाली सब्जी है और इसे घर पर भी उगाया जा सकता है। इसमें फाइबर, पोटैशियम, मैग्नीशियम और विटामिन सी जैसे पोषक तत्व पाए जाते हैं। लंबे उपवास के बाद इसे हल्के मसालों में बनाकर खाया जा सकता है।
तोरई: तोरई हल्की और आसानी से पचने वाली सब्जियों में शामिल की जाती है। इसमें फाइबर, विटामिन ए, विटामिन सी, आयरन और मैग्नीशियम जैसे पोषक तत्व होते हैं। कम तेल में बनी तोरई पारण के लिए अच्छा विकल्प हो सकती है।
मंडुआ या रागी: मंडुआ को भी पारण के भोजन में शामिल किया जाता है। यह पारंपरिक अनाज है और इसमें फाइबर, कैल्शियम, मैग्नीशियम और अन्य पोषक तत्व पाए जाते हैं। लंबे उपवास के बाद इसे संतुलित भोजन का हिस्सा बनाया जा सकता है। हालांकि, लंबे व्रत के बाद इसे कम मात्रा में लेना बेहतर रहेगा।
देसी मटर: कुशी केराव या देसी मटर को भी जितिया पारण भोजन में शामिल किया जाता है। यह ऐसी फसल है जो कठिन जमीन और परिस्थितियों में भी उग सकती है। इसी वजह से इसे संतान के जीवन में मजबूती और विपरीत परिस्थितियों से बचाव की कामना से जोड़कर देखा जाता है। इसमें प्रोटीन और कई पोषक तत्व पाए जाते हैं।
व्रत पारण के दौरान इस बात का रखें ध्यान
24 घंटे के निर्जला उपवास के बाद अचानक बहुत ज्यादा या भारी भोजन करने से बचें। हल्का और संतुलित भोजन करना बेहतर रहता है। बहुत अधिक तेल-मसाले वाली चीजें भोजन में न लें। परंपरा के अनुसार बनाए जाने वाले इन खाद्य पदार्थों को भोजन में शामिल किया जा सकता है।
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)