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Pithori Amavasya Vrat Katha: क्यों खास है पिठोरी अमावस्या, जानने के लिए पढ़िए इसकी पावन व्रत कथा

 Written By: Laveena Sharma @laveena1693
 Published : Aug 22, 2025 06:33 am IST,  Updated : Aug 22, 2025 06:33 am IST

Pithori Amavasya Vrat Katha (पिठोरी अमावस्या व्रत कथा): पिठोरी अमावस्या का पर्व मुख्य रूप से दक्षिण भारत में मनाया जाता है। इस दिन महिलाएं व्रत रखती हैं और आटे से प्रतिमा बनाकर मां दु्र्गा समते 64 देवियों की पूजा करती हैं। यहां हम आपको बताएंगे पिठोरी अमावस्या की व्रत कथा।

pithori amavasya Vrat katha- India TV Hindi
पिठोरी अमावस्या व्रत कथा Image Source : CANVA

Pithori Amavasya Vrat Katha (पिठोरी अमावस्या व्रत कथा): पिठोरी अमावस्या का विशेष महत्व माना गया है। कहते हैं इस दिन पितरों का तर्पण करने से उनकी आत्मा का शांति मिलती है। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा का भी विशेष महत्व माना जाता है। इसके अलावा इस अमावस्या पर पीपल के पेड़ की भी पूजा होती है। वहीं इस दिन श्रद्धालु गंगा नदी में स्नान कर अपने समस्त पापों से छुटकारा पा लेते हैं। इस साल पिठोरी अमावस्या 22 अगस्त को मनाई जा रही है। यहां आप जानेंगे इसकी पावन कथा।

Pithori Amavasya Vrat Katha (पिठोरी अमावस्या व्रत कथा)

पिठोरी अमावस्या की कथा के अनुसार एक परिवार में सात भाई रहते थे। सभी विवाहित थे और उनके बच्चे भी थे। परिवार की सलामती के लिए सातों भाईयों की पत्नियां पिठोरी अमावस्या का व्रत रखना चाहती थीं। लेकिन जब बड़े भाई की पत्नी ने ये व्रत रखा तो उनके बेटे की मृत्यु हो गई। दूसरी बार फिर व्रत रखा तो दूसरे बेटे की भी मृत्यु हो गई। सातवें साल भी यही हुआ। इस बार बड़े भाई की पत्नी ने अपने मृत पुत्र का शव कहीं छिपा दिया। कहते हैं उस समय गांव की कुल देवी मां पोलेरम्मा लोगों की रक्षा के लिए गांव में पहरा दे रही थीं। उनकी नजर जब इस दु:खी मां पर पड़ी तो उन्होंने उसके दुख का कारण पूछा। तब बड़े भाई की पत्नी ने मां को सारी बात बता दी। देवी पोलेरम्मा ने दु:खी मां से कहा कि वह उन-उन स्थानों पर हल्दी छिड़क दे जहां-जहां उसके सभी बेटों का अंतिम संस्कार किया गया है। उस महिला ने ठीक वैसे ही किया। जब वह घर लौटी तो उसने देखा कि उसके सातों पुत्र जीवित हो गए हैं ये देखकर उसे बहुत खुशी हुई। कहते हैं तभी से उस गांव की हर मां बच्चों की लंबी आयु के लिए पिठोरी अमावस्या का व्रत रखने लगी।

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

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