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Saraswati Puja 2026: नए साल में सरस्वती पूजा कब है? जानिए बसंत पंचमी 2026 की सही तारीख और मुहूर्त

 Written By: Arti Azad @Azadkeekalamse
 Published : Dec 23, 2025 11:26 am IST,  Updated : Dec 23, 2025 11:26 am IST

Saraswati Puja 2026: माघ के महीने में एक विशेष दिन सरस्वती पूजा का विधान है, जिसे बसंत पचंमी का त्योहार कहा जाता है। शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि का यह दिन विद्यार्थियों के लिए बहुत विशेष और महत्वपूर्ण होता है। जानते हैं नए साल 2026 में सरस्वती पूजन कब किया जाएगा?

Saraswati Puja 2026- India TV Hindi
2026 में सरस्वती पूजा कब है? Image Source : PEXELS

Saraswati Puja Kab Hai 2026: माघ महीने के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि विद्या की देवी मां शारदा को समर्पित है। हर साल इस दिन को बंसत पंचमी को रूप में बड़े उल्लास और धूमधाम से मनाया जाता है। यह त्योहार बंसत ऋतु के आगमन की शुरुआत का प्रतीक होता है। माघ महीने के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि खास तौर से छात्रों के लिए बहुत महत्वपूर्ण मानी जाती है। कहते हैं कि ज्ञान, कला और संगीत की देवी मां शारदे की की विशेष आराधना से व्यक्ति के जीवन में अज्ञान रूपी अंधकार समाप्त होता है और सद्बुद्धि का दीपक जीवनभर प्रजवल्लित रहता है। आइए जानते हैं कि साल 2026 में बसंत पंचमी किस दिन मनाई जाएगी? मां सरस्वती की पूजा विधि और बसंत पंचमी का महत्व भी जानिए। 

हर साल इसी तिथि को किया जाता है सरस्वती पूजन (Saraswati Puja Kab Hai 2026)

सबसे पहले तो आपको बता दें कि हिंदू कैलंडर के अनुसार, माघ के महीने में आने वाले शुक्ल पक्ष की पंचमी को सरस्वती पूजन की विधान है। इस शुभ तिथि को वसंत या बसंत पंचमी कहा जाता है। यह दिन ज्ञान, विद्या, बुद्धिमत्ता, कला और संस्कृति की देवी मां सरस्वती को समर्पित है। इस दिन देवी सरस्वती की पूजा का खास महत्व है। माना जाता है कि इस दिन की गई मां शारदा की आराधना विशेष फल देती है। 

बसंत पंचमी 2026 मुहूर्त (Basant Panchami 2026 Date And Time)

वैदिक पंचांग के अनुसार, माघ महीने के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि की शुरुआत 23 जनवरी 2026 को सुबह 2 बजकर 28 मिनट पर हो जाएगी और 24 जनवरी को सुबह 1 बजकर 46 मिनट पर इसका समापन होगा। इस तरह नए साल में 23 जनवरी को सरस्वती पूजा 2026 की जाएगी।

बसंत पंचमी के लिए शुभ मुहूर्त की शुरुआत सुबह 7 बजकर 13 मिनट पर हो जाएगी, जो दोपहर 12 बजकर 33 मिनट तक रहेगा। इस 5 घंटे 19 मिनट की अवधि में आप मां सरस्वती की पूजा तक सकेंगे। 

बसंत पंचमी का महत्व (Basant Panchami 2026 Significance)

सनातन धर्म ग्रथों के अनुसार, यही तिथि थी जब त्रिदेवों में से एक ब्रह्मा जी के मुख से देवी सरस्वती का प्राकट्य हुआ था। शारदा मां के प्रकट होते ही संसार से अज्ञानता का अंधकार दूर हुआ था। इस तिथि को 'अबूझ मुहूर्त' के नाम से भी जाना जाता है, क्योंकि इस दिन शुभ कायों जैसे कि विवाह, मुंडन या गृह प्रवेश के लिए पंचांग देखना जरूरी नहीं होती है। इसका मतलब है कि इस तिथि पर बिना पंचांग देखे शुभ कार्य बिना रोकटोक करने की शास्त्रों में अनुमति दी गई है। छोटे बच्चों की शिक्षा की शुरुआत यानी 'अक्षर अभ्यास' के लिए बसंत पंचमी को बेहद शुभ माना जाता है। इस दिन बच्चों से पहला अक्षर लिखवाना उनके भविष्य के लिए शुभ फलदायी माना गया है।

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

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