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सावन माह की पहली एकादशी कब है? नोट कर लीजिए सही डेट, पूजा मुहूर्त और शुभ योग

 Published : Aug 01, 2026 08:58 pm IST,  Updated : Aug 01, 2026 08:58 pm IST

सावन माह में आने वाली एकादशी व्रत का विशेष महत्व होता है। तो यहां जानिए कि सावन की पहली एकादशी व्रत कब है और नारायण की पूजा के लिए शुभ मुहूर्त क्या रहेगा। साथ ही जानें एकादशी पारण का शुभ समय।

सावन 2026 एकादशी व्रत- India TV Hindi
सावन 2026 एकादशी व्रत Image Source : INDIA TV

हर माह में दो बार एकादशी का व्रत रखा जाता है एक शुक्ल और दूसरा कृष्ण पक्ष में। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, एकादशी का व्रत करने से भगवान विष्णु के साथ ही माता लक्ष्मी की  विशेष कृपा प्राप्त होती है। प्रत्येक महीने में आने वाली एकादशी को अलग-अलग नामों से जाना जाता है। सावन माह के कृष्ण पक्ष में आने वाली एकादशी को कामिका एकादशी के नाम से जाना जाता है। पुराणों के अनुसार कामिका एकादशी को उपवास करने से श्रेष्ठ संतान की प्राप्ति होती है। इसके साथ ही कामिका एकादशी का व्रत रखने से जातक की सारी मनोकामनाएं भी शीघ्र पूरी हो जाती हैं। तो आइए जानते हैं कि सावन महीने की पहली एकादशी कब मनाई जाएगी और इस दिन शुभ योग और पूजा का मुहूर्त क्या रहेगा।

सावन की पहली एकादशी कब है?

पंचांग के अनुसार, सावन माह की कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि का आरंभ 8 अगस्त को दोपहर 1 बजकर 59 मिनट पर होगा। एकादशी तिथि का समापन 9 अगस्त को सुबह 11 बजकर 4 मिनट पर होगा। उदयातिथि के अनुसार, कामिका एकादशी का व्रत 9 अगस्त 2026 को रखा जाएगा। वहीं सावन की दूसरी एकादशी 23 अगस्त 2026 को रखा जाएगा। सावन की दूसरी एकादशी पुत्रदा एकादशी होगी।

कामिका एकादशी 2026 शुभ मुहूर्त और योग 

कामिका एकादशी के दिन  द्विपुष्कर योग और हर्षण योग का संयोग भी बन रहा है। द्विपुष्कर योग दिन में 11 बजकर 04 मिनट पर बनेगा और यह दोपहर में 02 बजकर 43 मिनट तक रहेगा। हर्षण योग प्रात:काल से लेकर 10 अगस्त को 2:04 ए एम तक रहेगा। वहीं कामिका एकादशी के दिन ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4 बजकर 22 मिनट से सुबह 5 बजकर 4 मिनट तक रहेगा। अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12 बजे से दोपहर 12 बजकर 53 मिनट तक रहेगा।

कामिका एकादशी 2026 पारण का समय

कामिका एकादशी का पारण 10 अगस्त 2026 को किया जाएगा। पारण के लिए शुभ समय सुबह 6 बजकर 18 मिनट से सुबह 8 बजे तक रहेगा। पारण के दिन द्वादशी तिथि समाप्त होने का समय सुबह 8 बजकर 7 मिनट पर रहेगा। बता दें कि एकादशी के व्रत को समाप्त करने को पारण कहते हैं। एकादशी व्रत के अगले दिन सूर्योदय के बाद पारण किया जाता है। एकादशी व्रत का पारण द्वादशी तिथि समाप्त होने से पहले करना अत्यंत जरूरी होता है। द्वादशी तिथि सूर्योदय से पहले समाप्त हो गयी हो तो एकादशी व्रत का पारण सूर्योदय के बाद ही होता है। 

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

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