Monday, February 26, 2024
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बस ये एक छोटा सा काम करने वालों से नारायण हो जाते हैं प्रसन्न, देवर्षि नारद को भी बताई थी ये बात

बात करें हिंदू धर्म की तो भगवान विष्णु को जगत का पालन हार बताया गया है। इनका निवास स्थान बैकुंठ धाम है। लेकिन देवर्षि नारद के पूछने पर आखिर ऐसा भगवान विष्णु ने क्यों कह दिया की वो बैकुंठ धाम में नहीं रहते हैं। यदि बैकुंठ नहीं रहते श्री हरि तो फिर कहां निवास करते हैं।

Aditya Mehrotra Written By: Aditya Mehrotra
Updated on: November 30, 2023 16:05 IST
Lord Vishnu Mahima- India TV Hindi
Image Source : INDIA TV Lord Vishnu Mahima

Lord Vishnu Mahima: सनातन धर्म आदि अनंत है और उससे भी अधिक भगवान विष्णु की लीलाएं अनंत हैं। इसलिए कहते भी हैं हरि अनंत हरि कथा अनंता। वैसे तो आज गुरुवार का दिन है और इस दिन भगवान विष्णु की पूजा कर उन्हें शीघ्र प्रसन्न किया जा सकता है। यह बात सत्य है कि नारायण करुणानिधान हैं। जगत में उनके जैसा करुणामई कोई भी नहीं हैं। शास्त्रों की भी इतनी छमता नहीं कि उनकी महिमा का गुणगान पूर्ण रूप से कर पाएं। उनकी छवि ही आलौकिक है।

देवता हों चाहें बड़े-बड़े तपस्वी हों कोई भी उनकी महिमा पूर्ण रूप से नहीं बता सकता। पुराण पुरुष श्री हरि की कृपा पाने का एक मात्र साधन है। उनकी निस्वार्थ रूप से भक्ति करना। तो आइए आज हम आपको शास्त्रों के द्वारा यह बताते हैं कि वो कौन सा तरीका है जिससे भगवान विष्णु की कृपा तुरंत पाई जा सकती है। भगवान नारायण ने यह रहस्य की बात देवर्षि नारद मुनी को उनके प्रश्न करने पर बताई थी।

भगवान विष्णु ने नारद मुनी को बताया अपने निवास का रहस्य

शास्त्रों में तो यही बताया गया है कि देवर्षि नारद भगवान विष्ण के ही नाम का जाप करते हुए विचरण करते रहते हैं। एक बार की बात है जब नारद मुनी भगवान विष्णु के पास पहुंचे और अपने जिज्ञासा भरे मन से उनसे एक प्रश्न पूछ लिया कि है प्रभु आप कभी बैकुंठ धाम, तो कभी धरती लोक, तो कभी कहीं रहते हैं। आखिर आपका स्थाई पता क्या है। कृपा मुझे बताने का कष्ट करें। तब श्री हरि नारायण ने नारद जी को अपने निवास स्थान के बारे में इस प्रकार से बताया। इस श्लोक का वर्णन पुराणों में भी मिलता है। यह मुख्य रूप से भगवान विष्णु और नारद मुनी के बीच का संवाद है। श्लोक इस प्रकार से - 

नाहं वसामि वैकुंठे योगिनां हृदये न च।

मद्भक्ता यत्र गायन्ति तत्र तिष्ठामि नारद।।

भगवान विष्णु नारद जी के प्रश्न पूछने पर कहते हैं कि है नारद, मैं न तो बैकुंठ में निवास करता हूं, ना ही में तपस्वी और योगियों के पास रहता हूं। मैं सदैव अपने प्रेम करने वाले उन भक्तों के पास रहता हूं जो सदैव मेरा चिंतन किया करते हैं। मुझे उन्हीं के पास आनंद की प्राप्ति होती है। अतः जहां मेरे भक्त मेरा चिंतन किया करते हैं। वही मेरे लिए बैकुंठ है। क्योंकि जहां भक्त होते हैं वहां कुंठा किंचित मात्र भी नहीं रहती। मुझे मेरे भक्त सबसे प्रिय हैं। इसलिए में उनसे सदैव मिलने के लिए व्याकुल रहता हूं और उनके पास चला जाता हूं।

भगवान विष्णु की कृपा कैसे पाएं

भगवान विष्णु का आशीर्वाद मिलना बहुत दुर्लभ होता है। यदि आप नारायण की कृपा पाना चाहते हैं। तो शास्त्र कहते हैं उनको अपना मान लीजिए। उनकी सदैव सेवा कीजिए। नित्य उनके नाम का जाप कीजिए। सात्विक आहार लीजिए और तुलसी जी की पूजा के साथ ही साथ एकादशी का व्रत करिए। भगवान विष्णु का आशीर्वाद सदैव आपके साथ जीवन भर रहेगा और वेद वाणी द्वारा स्वयं उन्होनें कहा है कि वह अपने भक्त को कभी अपने से दूर और कष्ट में नहीं रहने देते हैं। चाहें तो भक्त प्रहलाद का उदाहरण हो, वन में वर्षों श्री राम की याद में सबरी की प्रतीक्षा हो या सुदामा की निस्वार्थ दोस्ती हो हर रूप में नारायण ने अपने भक्तों का मान रखा है। इसलिए यदि आप सच में भगवान विष्णु की कृपा पाना चाहते हैं। तो निस्वार्थ होकर उनकी भक्ति करिए। आपके जीवन के सारे कष्ट मिट जाएंगे और जीवन में आप अलग सी शांती महसूस करेंगे। 

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

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