How to check original Rudraksha: रुद्राक्ष एक अमूल्य मोती है, जिसे धारण करने या प्रयोग करने से व्यक्ति को अचूक फल प्राप्त होते हैं। भगवान शिव का स्वरूप रुद्राक्ष जीवन को सार्थक बनाता है इसे अपनाने से सभी को समृद्ध जीवन की प्राप्ति होती है। रुद्राक्ष की अनेक प्रजातियां और विभिन्न प्रकार उपलब्ध हैं लेकिन सही रुद्राक्ष की पहचान करना एक कठिन कार्य है। जानिए चिराग दारूवाला से असली रुद्राक्ष को कैसे पहचाने।
आजकल बाजार में हर कोई असली रुद्राक्ष उपलब्ध कराने का दावा करता है, लेकिन इस कथन में कितनी सच्चाई है, इसका अंदाजा लगाना मुश्किल है। लालची लोग रुद्राक्ष पर कई धारियां बनाकर उसे बारह मुखी या इक्कीस मुखी रुद्राक्ष बताकर बेच देते हैं। कभी-कभी दो रुद्राक्षों को जोड़कर एक रुद्राक्ष बना दिया जाता है जैसे गौरी शंकर या त्रिजुटी रुद्राक्ष। इसके अलावा इन्हें भारी बनाने के लिए इनमें सीसा या पारा भी मिलाया जाता है और कुछ रुद्राक्षों में सांप, त्रिशूल जैसी आकृतियां भी बनी होती हैं।
रुद्राक्ष की पहचान को लेकर कई भ्रांतियां हैं। जिसके कारण आम आदमी असली रुद्राक्ष की सही पहचान नहीं कर पाता और खुद को असाध्य पाता है। असली रुद्राक्ष की जानकारी न होना और पूजा-पाठ व साधना में असली रुद्राक्ष न होना पूजा और उसके प्रभाव को निरर्थक बना देता है। इसलिए जरूरी है कि पूजा के लिए रुद्राक्ष असली हो। रुद्राक्ष के समान एक और फल होता है जिसे भद्राक्ष कहते हैं और यह रुद्राक्ष जैसा ही दिखता है। भद्राक्ष देखने में रुद्राक्ष जैसा होता है लेकिन इसमें रुद्राक्ष जैसे गुण नहीं होते।
रुद्राक्ष की पहचान करने के लिए इसे कुछ घंटों के लिए पानी में उबालें। अगर रुद्राक्ष का रंग न निकले या उस पर कोई असर न हो तो वह असली होगा।
अगर रुद्राक्ष को काटने पर उसके अंदर भी उतने ही घेरे दिखें जितने बाहर हैं, तो वह असली रुद्राक्ष होगा। यह परीक्षण सही माना जाता है लेकिन इसका नकारात्मक पहलू यह है कि रुद्राक्ष नष्ट हो जाता है।
रुद्राक्ष की पहचान करने के लिए उसे किसी नुकीली चीज से खुरचें। अगर उसमें से रेशे निकल आएं तो समझ लें कि रुद्राक्ष असली है।
दो असली रुद्राक्षों की ऊपरी सतह यानी पठार एक जैसा नहीं होता, लेकिन नकली रुद्राक्ष का पठार एक जैसा होता है।
रुद्राक्ष को पानी में डालें। अगर वह डूब जाए तो वह असली होगा। अगर नहीं डूबे तो वह नकली है। लेकिन यह परीक्षण उपयोगी नहीं माना जाता, क्योंकि रुद्राक्ष के डूबने या तैरने की क्षमता उसके घनत्व और उसके कच्चे या पके होने पर निर्भर करती है। धातु या किसी अन्य भारी पदार्थ से बना रुद्राक्ष भी पानी में डूब जाता है।
एक तरीका यह भी है कि दो तांबे के सिक्कों के बीच रुद्राक्ष की माला रखें यह थोड़ा हिलता है।
अगर आप एक मुखी रुद्राक्ष को ध्यान से देखेंगे तो आपको इस पर त्रिशूल या आंख का निशान दिखाई देगा। अगर रुद्राक्ष की माला को लंबे समय तक तेज धूप में रखा जाए और रुद्राक्ष में दरार या टूटन न आए तो इसे असली माना जाता है।
(ज्योतिषी चिराग दारूवाला विशेषज्ञ ज्योतिषी बेजान दारूवाला के पुत्र हैं। उन्हें प्रेम, वित्त, करियर, स्वास्थ्य और व्यवसाय पर विस्तृत ज्योतिषीय भविष्यवाणियों के लिए जाना जाता है।)
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