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Yashoda Jayanti 2024: संतान प्राप्ति से जुड़ा है यशोदा जयंती का महत्व, जान लें शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

 Written By: Bharti Singh
 Published : Feb 29, 2024 05:47 pm IST,  Updated : Feb 29, 2024 05:47 pm IST

फाल्गुन महीने में कृष्ण पक्ष षष्ठी तिथि को यशोदा जयंती मनाई जाती है। संतान प्राप्ति से इसका धार्मिक महत्व जुड़ा है। जानिए इस दिन किस-किस की पूरा होता है और यशोदा जयंती का शुभ मुहूर्त क्या है?

यशोदा जयंती 2024- India TV Hindi
यशोदा जयंती 2024 Image Source : INDIA TV

हिंदू कैलेंडर में यशोदा जयंती का खास महत्व है। पूरे उत्तर भारत में हर साल फाल्गुन महीने की कृष्ण पक्ष षष्ठी तिथि को मनाया जाता है। हालांकि महाराष्ट्र, गुजरात और साउथ के कई राज्यों में यशोदा जयंती को माघ महीने में इसी तिथि के दिन मनाया जाता है। पौराणिक मान्यताओं के मुताबिक भगवान विष्णु ने जब कृष्ण के रूप में धरती पर अवतार लिया था, तो उनका जन्म देवकी माता की कोख से हुआ था, लेकिन भगवान कृष्ण का पालन-पोषण माता यशोदा ने किया था। धार्मिक मान्यता के हिसाब से इस दिन भगवान श्रीकृष्ण और माता यशोदा की पूजा अर्चना की जाती है। इसे दिन व्रत रखने और पूजा करने से उत्तम संतान की प्राप्ति होती है।

यशोदा जयंती का समय

यशोदा जयंती 2024 में फाल्गुन महीने में 1 मार्च 2024 दिन शुक्रवार को मनाई जाएगी। इस दिन षष्ठी तिथि है जो सुबह 6 बजकर 21 मिनट पर शुरू होगी और 2 मार्च 2024 को सुबह 7 बजकर 53 मिनट तक रहेगी।

यशोदा जयंती का धार्मिक महत्व

एक कथाओं के अनुसार, धरती पर अधर्म के विनाश और धर्म की स्थापना के लिए भगवान विष्णु जी को कृष्ण के रूप में अवतार लेना पड़ा था। भगवान विष्णु समय-समय पर दुष्टों का विनाश करने के लिए धरती पर अवतरित होते रहे हैं। द्वापर युग में जब मथुरा नरेश कंस का अत्याचार बढ़ गया और लोग उससे परेशान होने लगे तो कंस के अंत के लिए भगवान कृष्ण ने जन्म लिया। भगवान कृष्ण ने कंस की ही बहन देवकी के गर्भ से जन्म लिया। पुत्र के प्राणों की रक्षा करने के लिए भगवान कृष्ण के पिता वसुदेव उन्हें अपने मित्र नंद के पास छोड़ आए थे। जहां कृष्ण के लालन-पालन का सौभाग्य नंद बाबा की पत्नी माता यशोदा को मिला था। 

यशोदा माता कृष्ण से इतना प्रेम करती थीं कि उन्हें उनकी लीलाएं सिर्फ लल्ला का बाल रूप ही नज़र आती थीं। यशोदा के कृष्ण प्रेम से पूरे ब्रजवासी भलीभांति परिचित थे। कृष्ण भी अपनी मैय्या यशोदा से बेहद लगाव रखते थे। यही वजह है कि भगवान कृष्ण को यशोदानंदन भी कहते हैं।

यशोदा जयंती की पूजा से लाभ

कहा जाता है इस दिन जो भी व्यक्ति माता यशोदा के साथ भगवान कृष्ण की पूजा करता है उसके सारे दुख दूर हो जाते हैं। इस दिन पूजा करने से संतान की कामना पूरी होती है। यशोदा जयंती पर पूजा करने से संतान सुख की प्राप्ति होती है और घर-परिवार में खुशी का माहौल बना रहता है। परिवार में प्यार और धन-धान्य की वृद्धि होती है।

यशोदा जयंती के दिन कैसे करें पूजा, जानिए विधि

  • यशोदा जयंती पर भगवान कृष्ण के बाल रूप जिसमें मां यशोदा की गोद में कान्हा हों ऐसी तस्वीर की पूजा करने का विधान है।

  • जो लोग इस दिन पूजा करते हैं उन्हें प्रात:काल जल्दी उठकर स्नान करना चाहिए। साफ कपड़े पहनकर ही पूजा करनी चाहिए।

  • इसके बाद माता यशोदा और कान्हा की गोल की हुई तस्वीर या फोटो पूजा स्थल पर लगाएं।

  • पूजा में धूप-दीप जलाकर, रोली-चावल से उनकी टीका करें और पुष्प अर्पित करें।

  • इसके बाद कृष्ण भगवान और माता को चंदन और रोली लगाएं और पान-सुपारी चढ़ाएं।

  • कान्हा का पसंदीदा भोगा पेड़ा, माखन और मिश्री चढ़ाकर आरती जाएं और पूजा संपन्न करें।

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