कल श्रावण कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि और बुधवार का दिन है। अमावस्या तिथि 12 अगस्त को रात 11 बजकर 7 मिनट तक रहेगी। वहीं, कल दोपहर बाद 3 बजकर 26 मिनट तक व्यतिपात योग रहेगा। इसके साथ ही कल सुबह 8 बजे
तक पुष्य नक्षत्र रहेगा, उसके बाद आश्लेषा नक्षत्र लग जायेगा। इसके अलावा कल हरियाली अमावस्या भी मनाई जाएगी, जिसमें किए गए कुछ उपायों से भाग्योदय की मान्यता है। आचार्य इंदु प्रकाश से जानिए बुधवार का पंचांग, राहुकाल, शुभ मुहूर्त और सूर्योदय-सूर्यास्त का समय।
12 अगस्त 2026 का पंचांग
- श्रावण कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि- 12 अगस्त को रात 11 बजकर 7 मिनट तक
- व्यतिपात योग- दोपहर बाद 3 बजकर 26 मिनट तक
- पुष्य नक्षत्र- 12 अगस्त को सुबह 8 बजे तक पुष्य नक्षत्र रहेगा, उसके बाद आश्लेषा नक्षत्र लग जायेगा
- 12 अगस्त 2026 विशेष- हरियाली अमावस्या
12 अगस्त 2026 शुभ समय
- ब्रह्म मुहूर्त- 04:23 ए एम से 05:06 ए एम
- प्रातः सन्ध्या- 04:44 ए एम से 05:49 ए एम
- अभिजित मुहूर्त- कोई नहीं
- विजय मुहूर्त- 02:38 पी एम से 03:31 पी एम
- गोधूलि मुहूर्त- 07:03 पी एम से 07:25 पी एम
- सायाह्न सन्ध्या- 07:03 पी एम से 08:08 पी एम
- अमृत काल- 04:38 ए एम, अगस्त 13 से 06:06 ए एम, अगस्त 13
12 अगस्त 2026 अशुभ समय
- राहुकाल-12:26 पी एम से 02:05 पी एम
- यमगण्ड-07:28 ए एम से 09:07 ए एम
- आडल योग-05:49 ए एम से 07:59 ए एम
- दुर्मुहूर्त-11:59 ए एम से 12:52 पी एम
- गुलिक काल -10:47 ए एम से 12:26 पी एम
- वर्ज्य-07:47 पी एम से 09:15 पी एम
राहुकाल का समय
- दिल्ली- दोपहर 12:26 से दोपहर 02:05 तक
- मुंबई- दोपहर 12:43 से दोपहर 02:20 तक
- चंडीगढ़- दोपहर 12:28 से दोपहर 02:08 तक
- लखनऊ- दोपहर 12:11 से दोपहर 01:50 तक
- भोपाल- दोपहर 12:25 से दोपहर 02:02 तक
- कोलकाता- दोपहर पहले 11:41 से दोपहर 01:19 तक
- अहमदाबाद- दोपहर 12:44 से दोपहर 02:22 तक
- चेन्नई- दोपहर 12:14 से दोपहर 01:48 तक
सूर्योदय-सूर्यास्त का समय
- सूर्योदय- सुबह 05:49 बजे
- सूर्यास्त- शाम 07:03 बजे
योग और नक्षत्र
व्यतिपात योग के दौरान कोई भी नया काम शुरू करना अच्छा नहीं माना जाता है। इस योग के दौरान यदि आप किसी का भला करना भी चाहेंगे, तो उसकी नजर में आप ही बुरे बन सकते हैं। कल सुबह 8 बजे तक पुष्य नक्षत्र रहेगा। इसके बाद आश्लेषा नक्षत्र लग जाएगा। आकाशमंडल में स्थित 27 नक्षत्रों में आश्लेषा नौवां नक्षत्र है। इसका अर्थ होता है- आलिंगन। इस नक्षत्र की राशि कर्क है और स्वामी ग्रह बुध हैं। पेड़-पौधों में आश्लेषा नक्षत्र का संबंध नागकेसर के पेड़ से बताया गया है। जिन लोगों का जन्म आश्लेषा नक्षत्र में हुआ हो, उन्हें नागकेसर के पेड़ की पूजा करनी चाहिए।
(आचार्य इंदु प्रकाश देश के जाने-माने ज्योतिषी हैं, जिन्हें वास्तु, सामुद्रिक शास्त्र और ज्योतिष शास्त्र का लंबा अनुभव है। इंडिया टीवी पर आप इन्हें हर सुबह 7.30 बजे भविष्यवाणी में देखते हैं।)